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स्वास्थ्य विभाग ने माना जेई से हुई आठ बच्चों की मौत
लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 17 Sep 2015 10:24 PM IST
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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों की मानें तो जेई और एईएस से अब तक सिर्फ आठ बच्चों की मौत हुई है, जबकि जिला अस्पताल अथवा लखनऊ में बुखार से 19 बच्चों की मौतों का रिकार्ड अमर उजाला के पास मौजूद है। हालांकि इनमें से कितने बच्चे दिमागी बुखार से मरे या सामान्य बुखार से इसकी जांच अभी बाकी है। इनमें पिछले दो दिनों में जिन चार बच्चों की मौत हुई है, उनकी जांच तक नहीं कराई गई थी, जबकि उन्हें बेहोशी के साथ झटके तक आ रहे थे। सूत्रों की मानें तो बच्चों की जेई और एईएस की जांच इसलिए नहीं हो रही है ताकि स्वास्थ्य विभाग बीमारी के आंकड़े को कम रखे। इतना ही नहीं जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को तत्परता से रेफर किया जा रहा है। इसके पीछे भी वार्ड खाली रखकर बुखार पर नियंत्रण और आंकड़े करना ही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अपनी साख बचाने में बच्चों को सामान्य बुखार का मरीज बता रहे हैं। बहरहाल, सवाल यह भी है कि अगर मौतें सामान्य बुखार से हो रही हैं तो डॉक्टर इलाज क्यों नहीं कर पा रहे हैं। उधर जिला अस्पताल के आईसीयू वार्ड में मरीज को भर्ती करने के बाद तीमारदार भगवान भरोसे रहते हैं। उनके लिए कोई स्थान न होने के कारण वह खुले आसमान में ही रहने और खाने को मजबूर हैं।
एक और बच्चे में मिले दिमागी बुखार के लक्षण
शनिवार को बुखार से पीड़ित भर्ती कराए गए तीन बच्चों में एक में दिमागी बुखार के लक्षण मिले हैं। भर्ती कराए जाने वालों में थाना निघासन के ग्राम राजारामपुरवा निवासी जंत्री प्रसाद की चार वर्षीय पुत्री अंजली, थाना खीरी क्षेत्र के ग्राम गौरिया निवासी परविंदर का दो वर्ष का पुत्र आदर्श तथा थाना खीरी क्षेत्र के ग्राम देवरिया निवासी पुरुषोत्तम के एक वर्ष के पुत्र अंश को बुखार के चलते जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसके अलावा थाना खीरी क्षेत्र के ग्राम केवलपुरवा निवासी गोमती की तीन वर्षीय पुत्री गीता देवी में बुधवार को दिमागी बुखार के लक्षण मिले हैं। इस बालिका को जिला अस्पताल के आईसीयू वार्ड में भर्ती किया गया है।
सीएमओ डॉ. वीके साहू ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में जितने भी बच्चे बुखार की वजह से भर्ती हैं, उनकी जांच नियमित हो रही है। जिला अस्पताल से किसी को भी जबरन रेफर नहीं किया जा रहा है और न ही अस्पतालों में भर्ती बच्चों की जेई या एईएस की जांच न कराने का कोई मामला सामने आया है, फिलहाल इसे दिखवाएंगे। लापरवाही मिली तो कार्रवाई भी होगी।
बच्चों की क्षमता हो जाती है कम
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आईबी त्रिपाठी के अनुसार दिमागी बुखार की चपेट में आने के बाद बच्चों की समझने और पहचानने की क्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है। दिमाग में वायरस फैलने से बच्चों की बोलने की क्षमता पर असर पड़ता है। ऐसी स्थिति में बच्चों का शरीर पूरी तरह शिथिल पड़ जाता है और उनके हाथ, पैर और गर्दन काम करना बंद कर देते हैं। ऐसे में बच्चों की रिकवरी के साथ उनके बोलने, समझने और सुनने की क्षमता को बनाए रखने के लिए नियमित ध्यान देने की जरूरत है। ऐसे में बच्चों के हाथ पैर पर हल्की मालिश के साथ आंख से देखने और कान से सुनने की जांच भी कराना चाहिए।
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एक्सरसाइज से बेहतर होगा स्वास्थ्य
नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि टंडन बताते हैं कि बुखार से ठीक होने के बाद कई बार ये पता चलता है कि बच्चा सुनने और देखने की क्षमता खो चुका है। ऐसे में इस बात का ध्यान जरूरी है और ओरोमोटर एक्सरसाइज जरूरी है। बच्चे के मुंह से लगातार लार गिरती रहती है। मुंह बंद या खुला रहता है। सांस लेने में दिक्कत होती है। पानी या खाना निगलने में दिक्कत होती है तो स्पीच पैथोलॉजिस्ट के साथ ईएनटी एक्सपर्ट की सलाह लेनी चाहिए। बच्चों के गाल पर हाथ से गोल-गोल घुमाते रहना चाहिए। गुब्बारा फुलाने के साथ सीटी बजाने के लिए लिए प्रेरित करना चाहिए, जिससे वो तेजी से रिकवर करे और सामान्य जीवन जी सके।
ये रखे ध्यान
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आईबी त्रिपाठी बताते हैं कि दिमागी बुखार से शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है इसलिए ठंडे पानी से शरीर को अच्छे तरीके से साफ करें।
2. शरीर को ढक कर रखने की बजाय खुले में पंखे में रखे। शरीर के तापमान के हिसाब से नियमित फ्लूयड चढ़ाया जाए जिससे उनकी हालत और गंभीर न हो।
3. बुखार आने पर बच्चों को बिना डॉक्टरी सलाह के कोई भी दवा न दें। इससे हालत और बिगड़ सकती है।
ये हैं सरकारी आंकड़े
कुल दिमागी बुखार के संभावित मरीज 37
जेई के मिले मरीज 17
एईएस के मरीज 12
कुल मौत 08
जेई से मौत 04
एईएस से मौत 04
10 ब्लाकों के 30 गांव जापानी बुखार से प्रभावित।
अब तक इन बच्चों की हो चुकी है मौत
23 अगस्त : मोहम्मद अफजल (11) पुत्र नजरअली, लाल्हापुर-गोला।
23 अगस्त : सोनी (10) पुत्री नाजिर अली, लाल्हापुर-गोला।
01 सितंबर : विकास (7) पुत्र ब्रम्हादीन, अलीगंज-गोला।
02 सितंबर : जितिन (3) पुत्र सतीश, द्वारिकागंज-गोला।
02 सितंबर : नैमिष (1) पुत्र विक्रम, अमिलहार।
02/03 सितंबर : लक्ष्मी (8) पुत्री अरुण, बांकेगंज।
02 सितंबर : गंगा (8) पुत्री बलराम, चूराटांडा-निघासन।
03 सितंबर : अंजली (14) पुत्री रजनीश, मैगलगंज।
03 सितंबर : प्रतिभा (5) पुत्री जगदंबा, अमिलाहार।
04 सितंबर : नैंसी (2) पुत्री राजकुमार, अमिलाहार।
05 सितंबर : महक (2) पुत्री रामनरेश, रुद्रपुर-ईसानगर।
05 सितंबर : रोहिणी (1) पुत्री श्यामलाल, मरखापुर।
06 सितंबर : खुशी (7) पुत्री राजू, मैलानी।
13 सितंबर : अंकित (6) पुत्र मनोज, राजापुर-लखीमपुर।
13 सितंबर : मनोज (7) पुत्र बाबूराम, कुकरा।
14 सितंबर : गुडिय़ा (5) पुत्री रामपाल, सलारपुर।
15/16 सितंबर : रनवीर (5) पुत्र अच्छेलाल, पहाडिय़ापुर-धौरहरा।
15 सितंबर : रीशू (9) पुत्र जितेंद्र, डुडौलिया-पसगवां।
15 सितंबर : शालू (5) पुत्री लालता, फरधान।
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एक और बच्चे में मिले दिमागी बुखार के लक्षण
शनिवार को बुखार से पीड़ित भर्ती कराए गए तीन बच्चों में एक में दिमागी बुखार के लक्षण मिले हैं। भर्ती कराए जाने वालों में थाना निघासन के ग्राम राजारामपुरवा निवासी जंत्री प्रसाद की चार वर्षीय पुत्री अंजली, थाना खीरी क्षेत्र के ग्राम गौरिया निवासी परविंदर का दो वर्ष का पुत्र आदर्श तथा थाना खीरी क्षेत्र के ग्राम देवरिया निवासी पुरुषोत्तम के एक वर्ष के पुत्र अंश को बुखार के चलते जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसके अलावा थाना खीरी क्षेत्र के ग्राम केवलपुरवा निवासी गोमती की तीन वर्षीय पुत्री गीता देवी में बुधवार को दिमागी बुखार के लक्षण मिले हैं। इस बालिका को जिला अस्पताल के आईसीयू वार्ड में भर्ती किया गया है।
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सीएमओ डॉ. वीके साहू ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में जितने भी बच्चे बुखार की वजह से भर्ती हैं, उनकी जांच नियमित हो रही है। जिला अस्पताल से किसी को भी जबरन रेफर नहीं किया जा रहा है और न ही अस्पतालों में भर्ती बच्चों की जेई या एईएस की जांच न कराने का कोई मामला सामने आया है, फिलहाल इसे दिखवाएंगे। लापरवाही मिली तो कार्रवाई भी होगी।
बच्चों की क्षमता हो जाती है कम
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आईबी त्रिपाठी के अनुसार दिमागी बुखार की चपेट में आने के बाद बच्चों की समझने और पहचानने की क्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है। दिमाग में वायरस फैलने से बच्चों की बोलने की क्षमता पर असर पड़ता है। ऐसी स्थिति में बच्चों का शरीर पूरी तरह शिथिल पड़ जाता है और उनके हाथ, पैर और गर्दन काम करना बंद कर देते हैं। ऐसे में बच्चों की रिकवरी के साथ उनके बोलने, समझने और सुनने की क्षमता को बनाए रखने के लिए नियमित ध्यान देने की जरूरत है। ऐसे में बच्चों के हाथ पैर पर हल्की मालिश के साथ आंख से देखने और कान से सुनने की जांच भी कराना चाहिए।
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एक्सरसाइज से बेहतर होगा स्वास्थ्य
नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि टंडन बताते हैं कि बुखार से ठीक होने के बाद कई बार ये पता चलता है कि बच्चा सुनने और देखने की क्षमता खो चुका है। ऐसे में इस बात का ध्यान जरूरी है और ओरोमोटर एक्सरसाइज जरूरी है। बच्चे के मुंह से लगातार लार गिरती रहती है। मुंह बंद या खुला रहता है। सांस लेने में दिक्कत होती है। पानी या खाना निगलने में दिक्कत होती है तो स्पीच पैथोलॉजिस्ट के साथ ईएनटी एक्सपर्ट की सलाह लेनी चाहिए। बच्चों के गाल पर हाथ से गोल-गोल घुमाते रहना चाहिए। गुब्बारा फुलाने के साथ सीटी बजाने के लिए लिए प्रेरित करना चाहिए, जिससे वो तेजी से रिकवर करे और सामान्य जीवन जी सके।
ये रखे ध्यान
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आईबी त्रिपाठी बताते हैं कि दिमागी बुखार से शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है इसलिए ठंडे पानी से शरीर को अच्छे तरीके से साफ करें।
2. शरीर को ढक कर रखने की बजाय खुले में पंखे में रखे। शरीर के तापमान के हिसाब से नियमित फ्लूयड चढ़ाया जाए जिससे उनकी हालत और गंभीर न हो।
3. बुखार आने पर बच्चों को बिना डॉक्टरी सलाह के कोई भी दवा न दें। इससे हालत और बिगड़ सकती है।
ये हैं सरकारी आंकड़े
कुल दिमागी बुखार के संभावित मरीज 37
जेई के मिले मरीज 17
एईएस के मरीज 12
कुल मौत 08
जेई से मौत 04
एईएस से मौत 04
10 ब्लाकों के 30 गांव जापानी बुखार से प्रभावित।
अब तक इन बच्चों की हो चुकी है मौत
23 अगस्त : मोहम्मद अफजल (11) पुत्र नजरअली, लाल्हापुर-गोला।
23 अगस्त : सोनी (10) पुत्री नाजिर अली, लाल्हापुर-गोला।
01 सितंबर : विकास (7) पुत्र ब्रम्हादीन, अलीगंज-गोला।
02 सितंबर : जितिन (3) पुत्र सतीश, द्वारिकागंज-गोला।
02 सितंबर : नैमिष (1) पुत्र विक्रम, अमिलहार।
02/03 सितंबर : लक्ष्मी (8) पुत्री अरुण, बांकेगंज।
02 सितंबर : गंगा (8) पुत्री बलराम, चूराटांडा-निघासन।
03 सितंबर : अंजली (14) पुत्री रजनीश, मैगलगंज।
03 सितंबर : प्रतिभा (5) पुत्री जगदंबा, अमिलाहार।
04 सितंबर : नैंसी (2) पुत्री राजकुमार, अमिलाहार।
05 सितंबर : महक (2) पुत्री रामनरेश, रुद्रपुर-ईसानगर।
05 सितंबर : रोहिणी (1) पुत्री श्यामलाल, मरखापुर।
06 सितंबर : खुशी (7) पुत्री राजू, मैलानी।
13 सितंबर : अंकित (6) पुत्र मनोज, राजापुर-लखीमपुर।
13 सितंबर : मनोज (7) पुत्र बाबूराम, कुकरा।
14 सितंबर : गुडिय़ा (5) पुत्री रामपाल, सलारपुर।
15/16 सितंबर : रनवीर (5) पुत्र अच्छेलाल, पहाडिय़ापुर-धौरहरा।
15 सितंबर : रीशू (9) पुत्र जितेंद्र, डुडौलिया-पसगवां।
15 सितंबर : शालू (5) पुत्री लालता, फरधान।