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Lakhimpur Kheri News: सरकार की झोली खाली, नौनिहालों को बजट का इंतजार

Thu, 24 Jul 2025 11:33 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Thu, 24 Jul 2025 11:33 PM IST
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The government's coffers are empty, children are waiting for the budget
लखीमपुर खीरी। बेसहारा बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में आर्थिक दिक्कतों को दूर करने के लिए प्रदेश सरकार की स्पॉन्सरशिप योजना बजट के अभाव में थमती नजर आ रही है। करीब चार माह पहले धनराशि कुछ बच्चों के खाते में भेजा गया था। इसके बाद से बच्चे लाभ लेने से वंचित हैं।
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योजना के तहत निराश्रित बच्चों को उनकी शिक्षा व पालन-पोषण के लिए बालिग होने तक चार हजार रुपये प्रतिमाह देने थे। पहले चरण में जिले के करीब 95 बच्चों को इस योजना का लाभ दिया गया था। दूसरे चरण में 2024-25 वित्तीय वर्ष में 1001 बच्चों के खाते में रुपये भेजे गए थे। हालांकि, धीरे-धीरे विभाग के पास करीब 2400 आवेदन हो गए। विभाग के पास इस वित्तीय वर्ष में बजट न होने के कारण बच्चे अब भी मदद का इंतजार कर रहे हैं। संवाद
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डीएम ने कराया आवेदन, नहीं पहुंची राशि

बीते कुछ समय पहले नीमगांव क्षेत्र के जनार्दन प्रसाद मिश्रा का हृदयाघात से निधन हो गया था। डीएम के कहने पर प्रशासन ने उनकी पत्नी को विधवा पेंशन व दोनों बच्चों की पढ़ाई के लिए स्पान्सरशिप योजना के तहत लाभ दिलाने की बात कही थी। इसके बाद पीड़ित से आवेदन भी करा दिया गया था, लेकिन बजट की कमी से अभी तक उनके खाते में सहायता राशि नहीं पहुंची। वहीं, सिंगाही की श्रेष्ठा ने बताया कि उन्होंने करीब एक वर्ष पहले अपनी पुत्री के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक उनके खाते में राशि नहीं आई है। सैधरी की डिम्पल ने बताया कि उनकी पुत्री के खाते में मार्च में तो यह राशि पहुंची। अब करीब चार माह हो रहे हैं, लेकिन दोबारा सहायता राशि नहीं मिली। यह तो महज बानगी है। ऐसे कई परिवार हैं, जो काफी समय से इस सहायता राशि का इंतजार कर रहे हैं।
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इन बच्चों को मिलता है योजना का लाभ

-वे बच्चे, जिनके माता-पिता की मौत हो गई हो या मां तलाकशुदा या परिवार से अलग हो गई हो।

-जिनके माता-पिता या उनमें से कोई एक गंभीर अथवा जानलेवा बीमारी से ग्रसित हो।

-ऐसे बच्चे, जो बेघर व निराश्रित हों या विस्थापित परिवार के साथ रह रहे हों।

-जो कानून से संघर्षरत हैं, जिन्हें बाल तस्करी, बाल विवाह, बाल श्रम, बाल भिक्षावृत्ति से मुक्त कराया गया हो।

-ऐसे बच्चे जो किसी प्राकृतिक आपदा के शिकार हों, दिव्यांग, लापता या घर से भागे हुए हैं।

-जिनके माता-पिता या उनमें से एक कारागार में निरुद्ध हैं या एचआइवी एड्स से ग्रसित बच्चे।

-जिन बच्चों के माता-पिता आर्थिक, शारीरिक या मानसिक रूप से देखभाल में असमर्थ हों।

-वे बच्चे, जिनको सहायता एवं पुनर्वास की आवश्यकता हो।

-जो बच्चे फुटपाथ पर जीवनयापन कर रहे, प्रताड़ित, उत्पीड़ित या शोषित हों।

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पात्रता के लिए यह होनी चाहिए अभिभावकों की आय
योजना के तहत चार हजार रुपये प्रति माह दिए जाने का प्रावधान है। योजना के अंतर्गत अभिभावकों की आय ग्रामीण क्षेत्रों में 72 हजार रुपये वार्षिक व शहरी क्षेत्रों में 96 हजार रुपये वार्षिक से अधिक नहीं होनी चाहिए। पात्र बच्चे या उनके अभिभावक आवेदन पत्र के साथ आधार कार्ड, आय तथा आयु प्रमाण-पत्र, अभिभावक का मृत्यु प्रमाण-पत्र एवं शिक्षण संस्थान में पंजीयन के प्रमाण पत्र के साथ जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय में जमा करना होता है।

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बजट न मिलने की वजह से खाते में धनराशि नहीं भेजी जा पा रही है। बजट आते ही लाभार्थियों के खाते में सहायता राशि भेज दी जाएगी।

लवकुश भार्गव, जिला प्रोबेशन अधिकारी
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