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कटरुआ की पहली फसल बिका हजार रुपये किलो
बांकेगंज
Updated Mon, 29 Jun 2015 07:53 PM IST
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मानसून की पहली वर्षा होते ही जंगलों में कटरुआ निकलना शुरू हो गया है। बाजार में इन दिनों कटरुआ एक हजार रुपये किलो बिक रहा है। इसके बावजूद कटरुआ खाने के शौकीन लोगों ने खरीदारी कर पहली फसल का स्वाद चखा।
हर साल मानसून की पहली वर्षा होने के साथ ही साल के घने जंगलों में भारी मात्रा में कटरुआ निकलता है। यह प्रोटीन से भरपूर एक तरह का मशरूम होता है। कटरुआ खाने के शौकीन पूरे साल बड़ी बेसब्री से वर्षा का इंतजार करते हैं। वर्षा चाहे जिस मौसम में हो लेकिन कटरुआ केवल वर्षा के मौसम में ही निकलता है। शुरुआती दौर में यह 250 से 400 रुपये किलो तक बिकता था। इस बार कटरुआ के भाव ने रिकार्ड तोड़ दिया है। इन दिनों यह बाजार में एक 1000 रुपये किलो बिक रहा है।
खाने में स्वादिष्ट और पौष्टिकता से भरपूर कटरुआ देश की प्रमुख मंडियों में अपनी जगह बना चुका है। यहां से यह कटरुआ दिल्ली, मुंबई समेत देश की प्रमुख मंडियों में जाता है और महंगे दामों में बिकता है। स्थानीय लोगों के लिए यह रोजगार का अच्छा साधन है। हालांकि वन विभाग जंगल में प्रवेश की इजाजत नहीं देता, इसके बावजूद लोग चोरी-छिपे जंगल से कटरुआ बीन कर प्रतिदिन एक से 2000 रुपये कमा लेते हैं।
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हर साल मानसून की पहली वर्षा होने के साथ ही साल के घने जंगलों में भारी मात्रा में कटरुआ निकलता है। यह प्रोटीन से भरपूर एक तरह का मशरूम होता है। कटरुआ खाने के शौकीन पूरे साल बड़ी बेसब्री से वर्षा का इंतजार करते हैं। वर्षा चाहे जिस मौसम में हो लेकिन कटरुआ केवल वर्षा के मौसम में ही निकलता है। शुरुआती दौर में यह 250 से 400 रुपये किलो तक बिकता था। इस बार कटरुआ के भाव ने रिकार्ड तोड़ दिया है। इन दिनों यह बाजार में एक 1000 रुपये किलो बिक रहा है।
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खाने में स्वादिष्ट और पौष्टिकता से भरपूर कटरुआ देश की प्रमुख मंडियों में अपनी जगह बना चुका है। यहां से यह कटरुआ दिल्ली, मुंबई समेत देश की प्रमुख मंडियों में जाता है और महंगे दामों में बिकता है। स्थानीय लोगों के लिए यह रोजगार का अच्छा साधन है। हालांकि वन विभाग जंगल में प्रवेश की इजाजत नहीं देता, इसके बावजूद लोग चोरी-छिपे जंगल से कटरुआ बीन कर प्रतिदिन एक से 2000 रुपये कमा लेते हैं।
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