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Lakhimpur Kheri News: 1971 के मुकदमे की फाइल गायब, मृत कलक्ट्रेट कर्मी के खिलाफ ही लिख लिया मुकदमा
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लखीमपुर खीरी। वर्ष 1971 में बहुचर्चित मुकदमा सरजा सिंह बनाम लक्ष्मी देवी चैरिटेबल ट्रस्ट ग्राम घोला परगना पलिया की मूल फाइल रहस्यमय ढंग से गायब है। मुकदमा उच्च न्यायालय लखनऊ खंडपीठ के आदेश पर दर्ज किया गया था। मामला डीएम के संज्ञान में आया तो प्रभारी अभिलेखापाल की तहरीर पर कलक्ट्रेट स्थित अभिलेखागार (माल) के अरेंजर प्रेम शंकर के खिलाफ शुक्रवार को मुकदमा दर्ज कर लिया गया। पुलिस ने जांच शुरू की तो पता चला कि अरेंजर अभिलेखागार प्रेम शंकर रिटायर हो चुके हैं और उनकी मृत्यु भी हो चुकी है।
पुलिस को दी गई तहरीर में प्रभारी अभिलेखापाल ने बताया कि उच्च न्यायालय ने 22 अगस्त 2025 को पारित आदेश में 31 दिसंबर 1971 को तय किए गए इस पुराने मुकदमा संख्या-130, धारा 229-बी वाद से संबंधित मूल पत्रावली उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। बताया जा रहा है कि यह मुकदमा उस समय के परगनाधिकारी निघासन न्यायालय में निर्णीत हुआ था।
उधर, उच्च न्यायालय के आदेश के बाद डीएम कार्यालय ने अभिलेखागार में दस्तावेज तलाशना शुरू किया। इसको लेकर डीएम ने एक टीम भी गठित की। गठित टीम ने वर्ष 1971 से 2025 तक के अंदर व बाहर जाने वाले रजिस्टर, सभी बस्तों और परगनों के फेहरिस्त, यहां तक की जिला आदान-प्रदान रजिस्टर तक खंगाले। इसके बाद भी सरजा सिंह बनाम लक्ष्मी देवी चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़ी मूल फाइल का कोई अंकन या रिकॉर्ड नहीं मिला।
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जांच रिपोर्ट में डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल को यह बताया गया कि फाइल अंतिम बार प्रेमशंकर की अभिरक्षा में थी। इसी के बाद से फाइल गायब हो गई। डीएम ने दोषी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए तो अरेंजर प्रेमशंकर के खिलाफ कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। अब बताया जा रहा है कि तत्कालीन अरेंजर अभिलेखागार प्रेम शंकर रिटायर हो चुके हैं और उनकी मृत्यु भी हो चुकी है।
मामले में प्रेम शंकर के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच की जा रही है। जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।-- हेमंत राय, प्रभारी निरीक्षक, कोतवाली सदर
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पुलिस को दी गई तहरीर में प्रभारी अभिलेखापाल ने बताया कि उच्च न्यायालय ने 22 अगस्त 2025 को पारित आदेश में 31 दिसंबर 1971 को तय किए गए इस पुराने मुकदमा संख्या-130, धारा 229-बी वाद से संबंधित मूल पत्रावली उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। बताया जा रहा है कि यह मुकदमा उस समय के परगनाधिकारी निघासन न्यायालय में निर्णीत हुआ था।
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उधर, उच्च न्यायालय के आदेश के बाद डीएम कार्यालय ने अभिलेखागार में दस्तावेज तलाशना शुरू किया। इसको लेकर डीएम ने एक टीम भी गठित की। गठित टीम ने वर्ष 1971 से 2025 तक के अंदर व बाहर जाने वाले रजिस्टर, सभी बस्तों और परगनों के फेहरिस्त, यहां तक की जिला आदान-प्रदान रजिस्टर तक खंगाले। इसके बाद भी सरजा सिंह बनाम लक्ष्मी देवी चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़ी मूल फाइल का कोई अंकन या रिकॉर्ड नहीं मिला।
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जांच रिपोर्ट में डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल को यह बताया गया कि फाइल अंतिम बार प्रेमशंकर की अभिरक्षा में थी। इसी के बाद से फाइल गायब हो गई। डीएम ने दोषी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए तो अरेंजर प्रेमशंकर के खिलाफ कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। अब बताया जा रहा है कि तत्कालीन अरेंजर अभिलेखागार प्रेम शंकर रिटायर हो चुके हैं और उनकी मृत्यु भी हो चुकी है।
मामले में प्रेम शंकर के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच की जा रही है। जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।