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Lakhimpur Kheri News: भवन जर्जर, दफ्तरों के चक्कर काट रही मरम्मत कार्य की फाइल

Wed, 08 Oct 2025 11:42 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Wed, 08 Oct 2025 11:42 PM IST
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The building is dilapidated, the file for repair work is going around the offices
इसी सत्संग भवन में रुकने को मजबूर छात्र। संवाद
मैगलगंज। मढ़िया घाट स्थित संस्कृत माध्यमिक विद्यालय का भवन जर्जर हो चुका है। छत कई जगह से झड़ चुकी है। उसमें से सरिया दिखने लगी हैं। दीवारें दरक रही हैं, लेकिन मरम्मत और सुंदरीकरण कार्य की फाइल दफ्तरों के चक्कर काट रही है।
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विद्यालय प्रबंधन ने खतरे के बीच पढ़ रहे वेदपाठियों की कक्षाएं सामने बने सत्संग भवन में संचालित करनी शुरू की, लेकिन छात्रावास जर्जर भवन में ही संचालित है। इस कारण वेदपाठियों को दैनिक कार्यों के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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प्रधानाध्यापक राजीव द्विवेदी ने बताया कि भवन के जर्जर होने से उसमें अक्सर सांप-बिच्छू निकल आते हैं, जिससे बच्चे डर जाते हैं। रात में वहां रुकने से भी कतराते हैं। उन्होंने बताया कि विद्यालय में वर्तमान में लगभग 50 से 60 विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। हर वर्ष लगभग 10 विद्यार्थी शिक्षा पूर्ण कर निकल जाते हैं और 20 नए छात्र प्रवेश लेते हैं, लेकिन सुविधा के नाम पर विद्यालय में कुछ नहीं है। यहां न तो वाटर कूलर है और न ही भोजन व बिजली की सुविधा।
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प्रधानाध्यापक व छात्रों का कहना है कि कई बार विभागीय अधिकारियों से शिकायत की गई, परंतु समाधान नहीं हुआ। प्रशासन की अनदेखी से विद्यार्थी विद्यालय के सामने सत्संग भवन के टिन शेड के नीचे पढ़ते हैं। उसी के नीचे सोते हैं। यह सत्संग स्थल क्षेत्र के समाजसेवियों की मदद से बनवाया गया था।

प्रधानाध्यापक ने बताया कि सरकार की तरफ से चलाई जा रही प्रोजेक्ट अलंकार योजना के तहत भवन की मरम्मत और सुंदरीकरण कराने के लिए विद्यालय की फाइल अक्तूबर, 2024 में भेजी गई। काफी दिनों तक फाइल जिला विद्यालय निरीक्षक के यहां पड़ी रही। पिछले दो महीने से उपजिलाधिकारी मितौली के यहां आ गई है, लेकिन अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। संवाद



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बिजली जाने पर होती है परेशानी

स्कूल स्टाफ के मुताबिक, विद्यालय में रोशनी के नाम पर सिर्फ बिजली की व्यवस्था है। बिजली चले जाने पर परिसर अंधेरे में डूब जाता है। बच्चों को भीषण गर्मी और सर्दी दोनों का सामना करना पड़ता है। विद्यालय में न इन्वर्टर है और न ही जनरेटर। विद्यालय में चहारदीवारी भी नहीं है। खुले परिसर के कारण वेदपाठी हर समय असुरक्षित महसूस करते हैं, जिससे उनकी दिनचर्या और एकाग्रता पर असर पड़ता है। प्रधानाध्यापक ने बताया कि रहने की समस्या के साथ ही छात्रों के खाने-पीने की व्यवस्था प्रधानाध्यापक अपने जेब खर्च, अभिभावकों व सामाजिक सहयोग से होती है। मढ़िया घाट ट्रस्ट की तरफ से कोई सहयोग प्राप्त नहीं हो पाता है। यहां तक का प्रधानाध्यापक और शिक्षक का वेतनमान भी समय से नहीं मिल पर रहा है।

अध्यापकों की है कमी

विद्यालय में लगभग 50 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। यहां पर प्रधानाध्यापक को मिलाकर शिक्षकों के पांच पद हैं, लेकिन सिर्फ दो अध्यापक (एक प्रधानाध्यापक और एक शिक्षक) की तैनाती है। इससे बच्चों की पढ़ाई की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ रहा है।
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फाइल अगर कार्यालय में रुकी हुई है तो तहसीलदार से बात कर आगे की कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।



-मधुसूदन, उपजिलाधिकारी, मितौली

इसी सत्संग भवन में रुकने को मजबूर छात्र। संवाद

इसी सत्संग भवन में रुकने को मजबूर छात्र। संवाद

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