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थारूओं के लिए स्टेडियम बनाने को मिली मंजूरी
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Thu, 07 Jul 2016 11:07 PM IST
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स्टेडियम
- फोटो : pti
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जनजातीय मंत्रालय ने 50 लाख बजट स्वीकृत किया
निदेशक ने थारू इलाके में मांगी दो एकड़ जमीन
थारू बाहुल्य इलाके मेें स्टेडियम का निर्माण कराने को भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है। मंत्रालय ने स्टेडियम के निर्माण के लिए 50 लाख रुपये धनराशि भी आवंटित कर दी हैै, जिससे गेंद अब डीएम के पाले में पहुंच गई है। दो एकड़ जमीन में स्टेडियम का निर्माण कराया जाना प्रस्तावित है, जिसके लिए जनजाति विकास विभाग के निदेशक ने डीएम को पत्र भेजकर आवश्यक जमीन विभाग के नाम उपलब्ध कराने की मांग की है।
इंडो-नेपाल बार्डर पर जंगल और उसके आसपास के गांवों में रहने वाले थारूओं के विकास में खेल का अहम रोल हो सकता है। प्रकृति के सानिध्य में स्टेडियम के बनने से पयर्टन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। इसी के मद्देनजर चंदनचौकी स्थित एकीकृत जनजाति विकास परियोजना के परियोजना अधिकारी यूके सिंह ने जनजाति कार्य मंत्रालय नई दिल्ली से थारू बाहुल्य इलाके में स्टेडियम की मांग की थी। मंत्रालय ने इस मांग को गंभीरता से लेते हुए इसे सहर्ष मंजूरी दे दी और इसके निर्माण कार्य के लिए 50 लाख रुपये का बजट भी आवंटित कर दिया। इससे थारू बाहुल्य क्षेत्र में खेलों को बढ़ावा देने के प्रयासों को अभी आंशिक सफलता माना जा रहा है, क्योंकि स्टेडियम के निर्माण के लिए कम से कम दो एकड़ जमीन मिलने पर ही परिकल्पना साकार हो सकेगी। थारू बाहुल्य इलाके में दो एकड़ जमीन के लिए जनजाति विकास विभाग के निदेशक विजय बहादुर सिंह ने डीएम खीरी को चिठ्ठी भेजकर जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित कराने का रिमाइंडर जारी किया है, क्योंकि इससे पूर्व जनवरी 2016 में निदेशक जमीन उपलब्ध कराने की मांग कर चुके हैं। वहीं मंत्रालय ने जमीन की उपलब्धता को लेकर जनजाति विकास निदेशक से रिपोर्ट मांगी है।
निदेशक ने थारू इलाके में मांगी दो एकड़ जमीन
थारू बाहुल्य इलाके मेें स्टेडियम का निर्माण कराने को भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है। मंत्रालय ने स्टेडियम के निर्माण के लिए 50 लाख रुपये धनराशि भी आवंटित कर दी हैै, जिससे गेंद अब डीएम के पाले में पहुंच गई है। दो एकड़ जमीन में स्टेडियम का निर्माण कराया जाना प्रस्तावित है, जिसके लिए जनजाति विकास विभाग के निदेशक ने डीएम को पत्र भेजकर आवश्यक जमीन विभाग के नाम उपलब्ध कराने की मांग की है।
इंडो-नेपाल बार्डर पर जंगल और उसके आसपास के गांवों में रहने वाले थारूओं के विकास में खेल का अहम रोल हो सकता है। प्रकृति के सानिध्य में स्टेडियम के बनने से पयर्टन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। इसी के मद्देनजर चंदनचौकी स्थित एकीकृत जनजाति विकास परियोजना के परियोजना अधिकारी यूके सिंह ने जनजाति कार्य मंत्रालय नई दिल्ली से थारू बाहुल्य इलाके में स्टेडियम की मांग की थी। मंत्रालय ने इस मांग को गंभीरता से लेते हुए इसे सहर्ष मंजूरी दे दी और इसके निर्माण कार्य के लिए 50 लाख रुपये का बजट भी आवंटित कर दिया। इससे थारू बाहुल्य क्षेत्र में खेलों को बढ़ावा देने के प्रयासों को अभी आंशिक सफलता माना जा रहा है, क्योंकि स्टेडियम के निर्माण के लिए कम से कम दो एकड़ जमीन मिलने पर ही परिकल्पना साकार हो सकेगी। थारू बाहुल्य इलाके में दो एकड़ जमीन के लिए जनजाति विकास विभाग के निदेशक विजय बहादुर सिंह ने डीएम खीरी को चिठ्ठी भेजकर जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित कराने का रिमाइंडर जारी किया है, क्योंकि इससे पूर्व जनवरी 2016 में निदेशक जमीन उपलब्ध कराने की मांग कर चुके हैं। वहीं मंत्रालय ने जमीन की उपलब्धता को लेकर जनजाति विकास निदेशक से रिपोर्ट मांगी है।
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