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थारू शिल्प ग्राम के सपने को लगे पंख
लखीमपुर खीरी
Updated Mon, 11 Jan 2016 10:16 PM IST
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बार्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत 19 मार्च 2014 को प्रशासन ने थारू जनजाति की जीवनशैली में बदलाव लाने और उन्हें विकास से जोड़ने के लिए जिस थारू शिल्प ग्राम की अवधारणा की गई थी, उसे शासन ने मंजूरी दे दी है। जिसके बाद केंद्र सरकार ने इस कार्ययोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए 1.23 करोड़ का बजट स्वीकृत किया है। इसमें 74.42 लाख रुपये जारी भी कर दिए गए हैं। कार्ययोजना को मंजूरी मिलने और बजट की प्रथम किस्त मिलने के बाद अधिकारियों ने विकाय कार्यों को लेकर कवायद तेज कर दी है। सीडीओ नितीश कुमार ने बताया कि विकास कार्यों के लिए लोक निर्माण विभाग को कार्यदाई संस्था का दायित्व सौंपा गया है।
सीडीओ के मुताबिक भारत-नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पलिया और दुधवा नेशनल पार्क के आसपास स्थित 24 ग्रामों में थारू जनजाति के लोग निवास करते हैं। जिला प्रशासन ने थारू जनजाति के समग्र विकास और उस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा था। जिसे मंजूरी मिल गई है। थारू जनजाति के विकास के लिए अब केंद्र सरकार से बजट मिल गया है। सीडीओ ने विकास कार्यों को लेकर कार्यदाई संस्था के अधिकारियों को बुलाकर थारू शिल्प ग्राम के लिए जमीन तलाश करने का निर्देश दिया है।
प्रशासन की प्राथमिकता है कि शिल्प ग्राम दुधवा नेशनल पार्क के आसपास ही बनाया जाए, ताकि दुधवा नेशनल पार्क आने वाले पर्यटकों को थारू जनजाति द्वारा बनाए गए उत्पाद की बिक्री आसानी से हो सके। सामाजिक क्षेत्र के विकास, बार्डर एरिया के निवासियों की क्षमता संवर्धन, कौशल विकास, रोजगार एवं स्वारोजगार सृजन, पर्यटन के विकास के लिए गेस्ट हाउस, कैंटीन, ग्रामीण एवं परंपरागत पर्यटन स्थल के विकास के लिए कार्य किया जाएगा।
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शिल्प ग्राम में अभिनव स्थल होगा विकसित
-थारू हेरिटेज वर्कशेड (एक)
-थारू शिल्प विक्रय/प्रदर्शन केंद्र (दस)
-थारू शिल्प/वस्त्र प्रशिक्षण केंद्र (एक)
-थारू रेस्टोरेंट (एक)
-थारू हट (चार)
-थारू नृत्य-संगीत कें द्र (एक)
-अन्य कार्य गाइड लाइन के अनुसार
महिलाओं के लिए स्वयं सहायता समूहों का सृजन
थारू शिल्प ग्राम के निर्माण से थारू जनजाति के लोगों खासकर महिलाओं का क्षमता संवर्धन, कौशल विकास एवं रोजगार एवं स्वरोजगार सूजन होगा। जिसमें सोशल सेक्टर, शिक्षा, मॉडल विलेज, आजीविका जिसमें वर्कशेड, मल्टी यूटीलिटी कम्यूनिटी सेंटर, मार्केटिंग यार्ड, मिनीहाट, कॉमन इंडस्ट्रियल शेड आदि विकास कार्य किए जाएंगे।
जमीन तलाशने का निर्देश
सीडीओ नितीश कुमार ने बताया कि थारू शिल्प ग्राम की अवधारणा कर विकास के लिए प्रशासन की ओर से भेजी गई कार्ययोजना को शासन ने मंजूर कर लिया है। इसके लिए निर्धारित 1.23 करोड़ रुपये में प्रथम किस्त के रूप में 74.42 लाख रुपये मिल भी गए हैं। इस कार्ययोजना को मंजूरी मिलने के बाद थारू शिल्प ग्राम बनाने को लेकर कार्यदाई संस्था पीडब्ल्यूडी को जमीन तलाशने का निर्देश दे दिया गया है। उम्मीद है जल्द ही जमीन मिल जाएगी।
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सीडीओ के मुताबिक भारत-नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पलिया और दुधवा नेशनल पार्क के आसपास स्थित 24 ग्रामों में थारू जनजाति के लोग निवास करते हैं। जिला प्रशासन ने थारू जनजाति के समग्र विकास और उस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा था। जिसे मंजूरी मिल गई है। थारू जनजाति के विकास के लिए अब केंद्र सरकार से बजट मिल गया है। सीडीओ ने विकास कार्यों को लेकर कार्यदाई संस्था के अधिकारियों को बुलाकर थारू शिल्प ग्राम के लिए जमीन तलाश करने का निर्देश दिया है।
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प्रशासन की प्राथमिकता है कि शिल्प ग्राम दुधवा नेशनल पार्क के आसपास ही बनाया जाए, ताकि दुधवा नेशनल पार्क आने वाले पर्यटकों को थारू जनजाति द्वारा बनाए गए उत्पाद की बिक्री आसानी से हो सके। सामाजिक क्षेत्र के विकास, बार्डर एरिया के निवासियों की क्षमता संवर्धन, कौशल विकास, रोजगार एवं स्वारोजगार सृजन, पर्यटन के विकास के लिए गेस्ट हाउस, कैंटीन, ग्रामीण एवं परंपरागत पर्यटन स्थल के विकास के लिए कार्य किया जाएगा।
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शिल्प ग्राम में अभिनव स्थल होगा विकसित
-थारू हेरिटेज वर्कशेड (एक)
-थारू शिल्प विक्रय/प्रदर्शन केंद्र (दस)
-थारू शिल्प/वस्त्र प्रशिक्षण केंद्र (एक)
-थारू रेस्टोरेंट (एक)
-थारू हट (चार)
-थारू नृत्य-संगीत कें द्र (एक)
-अन्य कार्य गाइड लाइन के अनुसार
महिलाओं के लिए स्वयं सहायता समूहों का सृजन
थारू शिल्प ग्राम के निर्माण से थारू जनजाति के लोगों खासकर महिलाओं का क्षमता संवर्धन, कौशल विकास एवं रोजगार एवं स्वरोजगार सूजन होगा। जिसमें सोशल सेक्टर, शिक्षा, मॉडल विलेज, आजीविका जिसमें वर्कशेड, मल्टी यूटीलिटी कम्यूनिटी सेंटर, मार्केटिंग यार्ड, मिनीहाट, कॉमन इंडस्ट्रियल शेड आदि विकास कार्य किए जाएंगे।
जमीन तलाशने का निर्देश
सीडीओ नितीश कुमार ने बताया कि थारू शिल्प ग्राम की अवधारणा कर विकास के लिए प्रशासन की ओर से भेजी गई कार्ययोजना को शासन ने मंजूर कर लिया है। इसके लिए निर्धारित 1.23 करोड़ रुपये में प्रथम किस्त के रूप में 74.42 लाख रुपये मिल भी गए हैं। इस कार्ययोजना को मंजूरी मिलने के बाद थारू शिल्प ग्राम बनाने को लेकर कार्यदाई संस्था पीडब्ल्यूडी को जमीन तलाशने का निर्देश दे दिया गया है। उम्मीद है जल्द ही जमीन मिल जाएगी।