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घर-घर पहुंच रहा सिंथेटिक दूध, कर रहा बीमार
लखीमपुर खीरी।
Updated Wed, 29 Jul 2015 10:55 PM IST
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जिले में दूध के कम उत्पादन और ज्यादा डिमांड के चलते मिलावटखोरी के मामले बढ़े हैैं। बाजार की डिमांड पूरी करने के लिए सिंथेटिक दूध का कारोबार फलफूल रहा है। शायद, यही वजह है कि बाजार में दूध की कोई कमी नहीं है। दूध से बाजार पटा पड़ा है। वहीं संबंधित विभाग की कार्रवाई भी महज खानापूर्ति भर सीमित रह गई है। डिमांड के अलावा दुधारू पशुओं की संख्या में लगातार हो रही कमी भी दूध उत्पादन में गिरावट का कारण माना जा रहा है।
दूध के अलावा इससे बने सह उत्पाद जैैसे पनीर, मावा, मिठाई आदि की मांग बढ़ रही है, जिसकी कमी पूरी करने के लिए मुनाफाखोर मिलावट करने से नहीं चूकते हैं। समय-समय पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन टीम के अभियानों में दूध के अलावा इसके सह उत्पादों के नमूने लैब जांच में फेल हो चुके हैं। अधिकतर नमूने अधोमानक पाए गए हैं, जिसमें दूधियों द्वारा क्रीम निकालकर उसमें रिफाइंड ऑयल या पानी मिलाने की पुष्टि हो चुकी हैै। त्योहार या सहालग में तो सिंथेटिक दूध से लेकर नकली मावा का कारोबार तेजी पकड़ लेता है। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में स्थापित डेयरियों पर दूध से क्रीम निकालने का सिलसिला भी बेधड़क चल रहा है, जिससे उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाले दूध की गुणवत्ता दोयम दर्जे की रह जाती है। इस पर रोक लगाने के लिए प्रशासन की ओर से कोई उपाय नहीं किए गए हैं।
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जगह-जगह लगी क्रीम निकालने लगी हैं मशीनें
पलियाकलां। इलाके में दुधारू पशुओं की भले ही कमी हो गई है, लेकिन जगह-जगह दूध से क्रीम निकालने की मशीनें लगी होना यह साबित करता है कि यहां भी दूध का कारोबार जमकर हो रहा है, जबकि पशु गणना पर नजर डालें तो 2007 में दुधारू पशुओं की संख्या 92429 थी, जबकि 2012 में यह संख्या घटकर 88827 रह गई। इस तरह इनके आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो दूधारू पशुओं की संख्या काफी घटी है। सिंथेटिक दूध के साथ यहां डेयरियों पर क्रीम निकलवाने का धंधा भी जोरों पर है। इससे पशुओं से प्राप्त होने वाले दूध की क्वालिटी में भी कमी आई है। यहां क्रीम निकलवाने के लिए दूधियों की लाइन लगी रहती है। क्रीम निकलवाकर दूध बिक्री से दूधियों को काफी लाभ होता है। उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जेबी सिंह के मुताबिक पशुओं की संख्या निर्धारित नहीं रहती है, क्योंकि इनकी बिक्री भी होती रहती है और यहां खरीदकर लाया भी जाता है।
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धड़ल्ले से बिक रहा मिलावटी दूध
बांकेगंज। क्षेत्र में मिलावटी दूध धड़ल्ले से बिक रहा है। मिलावटी दूध पीकर लोग बीमार हो रहे हैं। सीएचसी अधीक्षक डॉ. कमलेश नारायन का कहना है कि कई बार ऐसे मरीज आते हैं तो बताते हैं कि मिलावटी और केमिकल युक्त दूध सेहत को नुकसान पहुंचाता है।
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मिलावटी दूध के यह हैं लक्षण
बांकेगंज। वॉशिंग पाउडर, यूरिया और केमिकल युक्त दूध पीने के बाद लोगों में उल्टी, दस्त, पेट दर्द आदि की तकलीफ हो जाती है। गंदा पानी मिला हुआ दूध पीने से पेट संबंधी बीमारियां हो जाती हैं। लक्षण दिखने पर रोगी का तुरंत उपचार कराना चाहिए।
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बाक्स......
10 हजार लीटर दूध की सप्लाई
जिले से प्रतिदिन 10 हजार लीटर दूध दूसरे जिलों को सप्लाई किया जा रहा है, जिससे भी किल्लत पैदा हुई हैै। पराग डेयरी के मैनेजर एससी वर्मा ने पुष्टि करते हुए बताया कि कुछ निजी क्षेत्र की डेयरियां भी दूध खरीद कर बाहर आपूर्ति कर रहीं हैं।
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दूध में मिलावट के खिलाफ अभियान चलाए जाते हैं। हाल में शासन से प्राप्त निर्देशों के मुताबिक दूधियों के दूध के सैंपल लेने का काम शुरू कर दिया गया हैै। पूर्व में भरे गए नमूनों की लैब रिपोर्ट में अधोमानक के मामले पाए गए हैं, जिनमें संबंधित दूधियों के खिलाफ वाद दायर किए गए हैैं।
-एके पाठक, खाद्य सुरक्षा अधिकारी
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दूध के अलावा इससे बने सह उत्पाद जैैसे पनीर, मावा, मिठाई आदि की मांग बढ़ रही है, जिसकी कमी पूरी करने के लिए मुनाफाखोर मिलावट करने से नहीं चूकते हैं। समय-समय पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन टीम के अभियानों में दूध के अलावा इसके सह उत्पादों के नमूने लैब जांच में फेल हो चुके हैं। अधिकतर नमूने अधोमानक पाए गए हैं, जिसमें दूधियों द्वारा क्रीम निकालकर उसमें रिफाइंड ऑयल या पानी मिलाने की पुष्टि हो चुकी हैै। त्योहार या सहालग में तो सिंथेटिक दूध से लेकर नकली मावा का कारोबार तेजी पकड़ लेता है। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में स्थापित डेयरियों पर दूध से क्रीम निकालने का सिलसिला भी बेधड़क चल रहा है, जिससे उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाले दूध की गुणवत्ता दोयम दर्जे की रह जाती है। इस पर रोक लगाने के लिए प्रशासन की ओर से कोई उपाय नहीं किए गए हैं।
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जगह-जगह लगी क्रीम निकालने लगी हैं मशीनें
पलियाकलां। इलाके में दुधारू पशुओं की भले ही कमी हो गई है, लेकिन जगह-जगह दूध से क्रीम निकालने की मशीनें लगी होना यह साबित करता है कि यहां भी दूध का कारोबार जमकर हो रहा है, जबकि पशु गणना पर नजर डालें तो 2007 में दुधारू पशुओं की संख्या 92429 थी, जबकि 2012 में यह संख्या घटकर 88827 रह गई। इस तरह इनके आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो दूधारू पशुओं की संख्या काफी घटी है। सिंथेटिक दूध के साथ यहां डेयरियों पर क्रीम निकलवाने का धंधा भी जोरों पर है। इससे पशुओं से प्राप्त होने वाले दूध की क्वालिटी में भी कमी आई है। यहां क्रीम निकलवाने के लिए दूधियों की लाइन लगी रहती है। क्रीम निकलवाकर दूध बिक्री से दूधियों को काफी लाभ होता है। उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जेबी सिंह के मुताबिक पशुओं की संख्या निर्धारित नहीं रहती है, क्योंकि इनकी बिक्री भी होती रहती है और यहां खरीदकर लाया भी जाता है।
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धड़ल्ले से बिक रहा मिलावटी दूध
बांकेगंज। क्षेत्र में मिलावटी दूध धड़ल्ले से बिक रहा है। मिलावटी दूध पीकर लोग बीमार हो रहे हैं। सीएचसी अधीक्षक डॉ. कमलेश नारायन का कहना है कि कई बार ऐसे मरीज आते हैं तो बताते हैं कि मिलावटी और केमिकल युक्त दूध सेहत को नुकसान पहुंचाता है।
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मिलावटी दूध के यह हैं लक्षण
बांकेगंज। वॉशिंग पाउडर, यूरिया और केमिकल युक्त दूध पीने के बाद लोगों में उल्टी, दस्त, पेट दर्द आदि की तकलीफ हो जाती है। गंदा पानी मिला हुआ दूध पीने से पेट संबंधी बीमारियां हो जाती हैं। लक्षण दिखने पर रोगी का तुरंत उपचार कराना चाहिए।
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10 हजार लीटर दूध की सप्लाई
जिले से प्रतिदिन 10 हजार लीटर दूध दूसरे जिलों को सप्लाई किया जा रहा है, जिससे भी किल्लत पैदा हुई हैै। पराग डेयरी के मैनेजर एससी वर्मा ने पुष्टि करते हुए बताया कि कुछ निजी क्षेत्र की डेयरियां भी दूध खरीद कर बाहर आपूर्ति कर रहीं हैं।
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दूध में मिलावट के खिलाफ अभियान चलाए जाते हैं। हाल में शासन से प्राप्त निर्देशों के मुताबिक दूधियों के दूध के सैंपल लेने का काम शुरू कर दिया गया हैै। पूर्व में भरे गए नमूनों की लैब रिपोर्ट में अधोमानक के मामले पाए गए हैं, जिनमें संबंधित दूधियों के खिलाफ वाद दायर किए गए हैैं।
-एके पाठक, खाद्य सुरक्षा अधिकारी