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Lakhimpur Kheri News: खाद की कालाबाजारी का शक, वीडियो की जांच शुरू
Sun, 19 Jul 2026 11:01 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 19 Jul 2026 11:01 PM IST
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एक में रखी यूरिया की बोरियों को पिकअप में डालते हुए। स्रोत: वीडियो ग्रैब
लखीमपुर खीरी। जिले में किसान खाद के लिए सहकारी समितियों पर घंटों लाइन में लग रहे हैं। इस बीच रविवार को वायरल एक वीडियो ने खाद की कालाबाजारी का संदेह बढ़ा दिया है।
वीडियो खमरिया क्षेत्र की लाखून सहकारी समिति से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें कथित तौर पर एक घर के पास पिकअप वाहन में यूरिया की बोरियां लादते या उतारते दिखाया गया है। आरोप है कि समिति सचिव ने पड़ोस के एक घर में यूरिया रखवाकर बड़े पैमाने पर कालाबाजारी की। हालांकि इस आरोप की अभी पुष्टि नहीं हुई है। लाखून समिति के सचिव श्याम बिहारी ने बताया कि वीडियो दो माह पुराना है। खाद समिति की नहीं, निजी है। गांव का एक बड़ा किसान अपने खेतों में डालने के लिए खाद ले जा रहा था।
जिला कृषि अधिकारी ने मामले की जांच शुरू करा दी है। किसानों का आरोप है कि एक ओर समितियों पर एक-एक बोरी खाद के लिए घंटों लाइन लगानी पड़ रही है, दूसरी ओर जिम्मेदारों की मिलीभगत से खाद की कालाबाजारी हो रही है। इससे जरूरतमंद किसानों को समय पर खाद नहीं मिल पा रही है।
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विभागीय सूत्रों ने दावा किया कि कुछ सहकारी समितियों के जिम्मेदारों ने पिछले कुछ वर्षों में भारी आर्थिक लाभ अर्जित किया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
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वीडियो खमरिया क्षेत्र की लाखून सहकारी समिति से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें कथित तौर पर एक घर के पास पिकअप वाहन में यूरिया की बोरियां लादते या उतारते दिखाया गया है। आरोप है कि समिति सचिव ने पड़ोस के एक घर में यूरिया रखवाकर बड़े पैमाने पर कालाबाजारी की। हालांकि इस आरोप की अभी पुष्टि नहीं हुई है। लाखून समिति के सचिव श्याम बिहारी ने बताया कि वीडियो दो माह पुराना है। खाद समिति की नहीं, निजी है। गांव का एक बड़ा किसान अपने खेतों में डालने के लिए खाद ले जा रहा था।
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जिला कृषि अधिकारी ने मामले की जांच शुरू करा दी है। किसानों का आरोप है कि एक ओर समितियों पर एक-एक बोरी खाद के लिए घंटों लाइन लगानी पड़ रही है, दूसरी ओर जिम्मेदारों की मिलीभगत से खाद की कालाबाजारी हो रही है। इससे जरूरतमंद किसानों को समय पर खाद नहीं मिल पा रही है।
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विभागीय सूत्रों ने दावा किया कि कुछ सहकारी समितियों के जिम्मेदारों ने पिछले कुछ वर्षों में भारी आर्थिक लाभ अर्जित किया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।