{"_id":"5fbeb38f8ebc3edc0f59e8d6","slug":"sugar-cane-lakhimpur-news-bly4280850169","type":"story","status":"publish","title_hn":"आर्थिक संकट से जूझ रहा गन्ना किसान: पिछले सत्र का 9.18 अरब बकाया, नए सत्र का भुगतान भी लटका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आर्थिक संकट से जूझ रहा गन्ना किसान: पिछले सत्र का 9.18 अरब बकाया, नए सत्र का भुगतान भी लटका
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लखीमपुर खीरी। प्रदेश सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद चीनी मिलों ने पिछले पेराई सत्र का गन्ना मूल्य भुगतान नहीं किया है, जिससे किसानों का नौ अरब 18 करोड़ 59 लाख रुपये मिलों पर बकाया है। बजाज ग्रुप की गोला, पलिया, खंभारखेड़ा के साथ ही गोविंद शुगर मिल ऐरा पर सबसे अधिक गन्ना मूल्य बकाया है, जिससे इन मिलों को गन्ना सप्लाई करने वाले किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। पिछले सत्र का बकाया भुगतान तो बकाया है ही, लेकिन नए पेराई सत्र में गन्ना मूल्य तय न होने से नए सत्र का भुगतान नहीं हो पा रहा है। अधिकारियों ने भी चुप्पी साध रखी है।
पेराई सत्र 2019-20 में नौ चीनी मिलों को कुल 41 अरब 56 करोड़ 77 लाख 79 हजार रुपये गन्ना मूल्य भुगतान करना है, जिसके सापेक्ष अभी तक 32 अरब 38 करोड़ 18 लाख 69 हजार रुपये भुगतान किसानों को किया गया है। सिर्फ कुंभी और गुलरिया मिल ने संपूर्ण भुगतान किया है, लेकिन किसानों को देय ब्याज करीब 13.07 करोड़ का भुगतान नहीं किया है। अजबापुर मिल ने 25.32 करोड़ रुपये भुगतान रोक रखा है। सहकारी क्षेत्र की बेलरायां मिल ने 80 प्रतिशत भुगतान किया है, जबकि संपूर्णानगर मिल ने 82 प्रतिशत भुगतान किया है। वहीं सबसे बड़े बकाएदारों में शुमार गोला मिल ने 63.60 प्रतिशत, पलिया ने 48.57 प्रतिशत, खंभारखेड़ा ने 67.13 प्रतिशत और ऐरा मिल ने 66.21 प्रतिशत भुगतान किया है। गन्ना मूल्य के अलावा मिलों पर एक अरब 80 करोड़ 66 लाख रुपये ब्याज की देनदारी बनती है, जिसका किसी मिल ने अभी तक भुगतान नहीं किया है।
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चीनी मिलवार बकाया (लाख में)
गोला 24877.65
पलिया 25089.71
खंभारखेड़ा 15366.26
ऐरा 14851.49
अजबापुर 2532.61
बेलरायां 4987.16
संपूर्णानगर 4154.22
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पिछले वर्ष का चीनी मिलों पर नौ अरब से अधिक गन्ना मूल्य बकाया है, जिसके शीघ्र भ़ुगतान के लिए मिलों के अध्यासियों (यूनिट हेड)पर निरंतर दबाव बनाया जा रहा है। दो मिलों ने संपूर्ण भुगतान कर दिया है, लेकिन सात मिलों पर अभी भी गन्ना मूल्य बकाया है। जिन किसानों के घरों में शादी है या इलाज के लिए आवश्यकता है, तो उस किसान को बकाया भुगतान कराया जा रहा है।
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-ब्रजेश कुमार पटेल, जिला गन्ना अधिकारी
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किसान औने-पौने दाम पर गन्ना बेचने को मजबूर
धौरहरा/ईसानगर। किसानों का एक अरब से अधिक गन्ना मूल्य दबाए बैठी गोविंद शुगर मिल ऐरा इस बार भी किसानों का उधार गन्ना खरीद रही है। पुराना भुगतान न होने से क्षेत्र का किसान आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। घर का खर्च चलाने और बच्चों की फीस भरने की मजबूरी में किसान गन्ने को औने-पौने दामों में क्रेशर व कोल्हू पर बेचने के मजबूर है।
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खर्च के लिए 150 से 200 रुपये में बेच रहे गन्ना
मिल द्वारा भुगतान न किए जाने से किसान अपना दैनिक खर्च चलाने के लिये कोल्हू व क्रेशरों पर 150 से लेकर 200 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से गन्ना बेचने को मजबूर हैं, जिससे उनकी लागत निकलना मुश्किल हो रहा है। ईसानगर के किसान बड़के अवस्थी बताते है कि खेती व परिवार के खर्च के लिए रुपये की आवश्कता है। कम रेट में गन्ना बेचना मजबूरी है।
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पिछले साल का शुगर मिल पर बकाया है, जो अभी तक नहीं मिल सका है। दिसंबर में बेटी की शादी है, लेकिन भुगतान न मिलने के कारण शादी की तैयारियों में आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
-कृष्ण कुमार अवस्थी, किसान, दुबेपुरवा
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घर में मरम्मत का कार्य होना है। तैयारी थी कि जैसे ही शुगर मिल से गन्ने का बकाया मिलेगा, वैसे ही घर में काम शुरू कर दिया जाएगा। भुगतान का इंतजार करते हुए मुझे एक साल हो गया, लेकिन अब तक गन्ने का भुगतान नहीं आया है।
-उमेश अवस्थी, किसान, ईसानगर
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गन्ना भुगतान न होने से आर्थिक स्थिति खराब है। गन्ने के ही पैसे से घर परिवार के खर्चे चलते है, लेकिन कुछ सालों से गन्ने का भुगतान समय से नहीं मिल पा रहा। इससे बच्चों की फीस के साथ-साथ घर के दैनिक खर्च चलना मुश्किल हो रहा है।
-ब्रजेंद्र मिश्र, किसान, खमरिया
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पेराई सत्र 2019-20 में नौ चीनी मिलों को कुल 41 अरब 56 करोड़ 77 लाख 79 हजार रुपये गन्ना मूल्य भुगतान करना है, जिसके सापेक्ष अभी तक 32 अरब 38 करोड़ 18 लाख 69 हजार रुपये भुगतान किसानों को किया गया है। सिर्फ कुंभी और गुलरिया मिल ने संपूर्ण भुगतान किया है, लेकिन किसानों को देय ब्याज करीब 13.07 करोड़ का भुगतान नहीं किया है। अजबापुर मिल ने 25.32 करोड़ रुपये भुगतान रोक रखा है। सहकारी क्षेत्र की बेलरायां मिल ने 80 प्रतिशत भुगतान किया है, जबकि संपूर्णानगर मिल ने 82 प्रतिशत भुगतान किया है। वहीं सबसे बड़े बकाएदारों में शुमार गोला मिल ने 63.60 प्रतिशत, पलिया ने 48.57 प्रतिशत, खंभारखेड़ा ने 67.13 प्रतिशत और ऐरा मिल ने 66.21 प्रतिशत भुगतान किया है। गन्ना मूल्य के अलावा मिलों पर एक अरब 80 करोड़ 66 लाख रुपये ब्याज की देनदारी बनती है, जिसका किसी मिल ने अभी तक भुगतान नहीं किया है।
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चीनी मिलवार बकाया (लाख में)
गोला 24877.65
पलिया 25089.71
खंभारखेड़ा 15366.26
ऐरा 14851.49
अजबापुर 2532.61
बेलरायां 4987.16
संपूर्णानगर 4154.22
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पिछले वर्ष का चीनी मिलों पर नौ अरब से अधिक गन्ना मूल्य बकाया है, जिसके शीघ्र भ़ुगतान के लिए मिलों के अध्यासियों (यूनिट हेड)पर निरंतर दबाव बनाया जा रहा है। दो मिलों ने संपूर्ण भुगतान कर दिया है, लेकिन सात मिलों पर अभी भी गन्ना मूल्य बकाया है। जिन किसानों के घरों में शादी है या इलाज के लिए आवश्यकता है, तो उस किसान को बकाया भुगतान कराया जा रहा है।
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-ब्रजेश कुमार पटेल, जिला गन्ना अधिकारी
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किसान औने-पौने दाम पर गन्ना बेचने को मजबूर
धौरहरा/ईसानगर। किसानों का एक अरब से अधिक गन्ना मूल्य दबाए बैठी गोविंद शुगर मिल ऐरा इस बार भी किसानों का उधार गन्ना खरीद रही है। पुराना भुगतान न होने से क्षेत्र का किसान आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। घर का खर्च चलाने और बच्चों की फीस भरने की मजबूरी में किसान गन्ने को औने-पौने दामों में क्रेशर व कोल्हू पर बेचने के मजबूर है।
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खर्च के लिए 150 से 200 रुपये में बेच रहे गन्ना
मिल द्वारा भुगतान न किए जाने से किसान अपना दैनिक खर्च चलाने के लिये कोल्हू व क्रेशरों पर 150 से लेकर 200 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से गन्ना बेचने को मजबूर हैं, जिससे उनकी लागत निकलना मुश्किल हो रहा है। ईसानगर के किसान बड़के अवस्थी बताते है कि खेती व परिवार के खर्च के लिए रुपये की आवश्कता है। कम रेट में गन्ना बेचना मजबूरी है।
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पिछले साल का शुगर मिल पर बकाया है, जो अभी तक नहीं मिल सका है। दिसंबर में बेटी की शादी है, लेकिन भुगतान न मिलने के कारण शादी की तैयारियों में आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
-कृष्ण कुमार अवस्थी, किसान, दुबेपुरवा
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घर में मरम्मत का कार्य होना है। तैयारी थी कि जैसे ही शुगर मिल से गन्ने का बकाया मिलेगा, वैसे ही घर में काम शुरू कर दिया जाएगा। भुगतान का इंतजार करते हुए मुझे एक साल हो गया, लेकिन अब तक गन्ने का भुगतान नहीं आया है।
-उमेश अवस्थी, किसान, ईसानगर
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गन्ना भुगतान न होने से आर्थिक स्थिति खराब है। गन्ने के ही पैसे से घर परिवार के खर्चे चलते है, लेकिन कुछ सालों से गन्ने का भुगतान समय से नहीं मिल पा रहा। इससे बच्चों की फीस के साथ-साथ घर के दैनिक खर्च चलना मुश्किल हो रहा है।
-ब्रजेंद्र मिश्र, किसान, खमरिया