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चकनाचूर हुए सपने: बेटी करना चाहती थी देश की सेवा, पिता बोले- उम्मीद नहीं थी कनाडा में ऐसा कदम उठाएगी वो

Sat, 25 Feb 2023 08:41 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखीमपुर खीरी
अमर उजाला नेटवर्क, लखीमपुर खीरी Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 25 Feb 2023 08:41 PM IST
सार

लखीमपुर खीरी के गांव सिंहोना के किसान की 20 वर्षीय बेटी पढ़ाई करने 27 दिसंबर को कनाडा के टोरंटो गई थी। यहां वह ब्रंप्टन कॉलेज में बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रही थी। परिवार वालों का कहना है कि बिटिया ने डिप्रेशन में आ जाने के चलते छह फरवरी को खुदकुशी कर ली थी। 

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Student committed suicide in Toronto due to depression in Lakhimpur Kheri
खुशनीत कौर (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

18 दिन पहले कनाडा में लखीमपुर खीरी के तिकुनिया की एक होनहार छात्रा की संदिग्ध परिस्थियों में हुई मौत के बाद शनिवार को उसका शव कस्बे में पहुंचा। परिवार में मातम छा गया। होनहार बेटी की मौत से माता-पिता समेत परिवार और इलाके के लोग काफी दुखी हैं।
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कोतवाली के गांव सिंहोना के किसान जसवीर सिंह ढिल्लो की 20 वर्षीय बेटी खुशनीत कौर पढ़ाई करने 27 दिसंबर को कनाडा के टोरंटो गई थी। जहां वह ब्रंप्टन कॉलेज में बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रही थी। परिवार वालों का कहना है कि बिटिया ने डिप्रेशन में आ जाने के चलते छह फरवरी को खुदकुशी कर ली थी। 
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कनाडा पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा था। परजिनों ने बताया कि छात्रा इंटरनेशनल स्टडी वीजा लेकर कनाडा गई थी। बिटिया अपनी मौसी की लड़की के साथ रह रही थी। पिता जसवीर सिंह ढिल्लों ने बताया कि कनाडा में मन ना लगने पर बिटिया डिप्रेशन में चली गई थी, जिसकी कनाडा के डॉक्टर ने जांच में पुष्टि की है। 
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इसी डिप्रेशन के चलते उसने आत्महत्या कर ली। मृतका के परिजनों ने शव को भारत मंगाने की गुहार लगाई थी, जिसपर कनाडा के सिख परिवारों ने फंड इकठ्ठा कर मृतका के शव को भारत में उनके घर पहुंचाने की व्यवस्था की थी। घटना के 18वें दिन खुशनीत कौर का शव उनके घर पहुंचा जहां उसका दाह संस्कार कर दिया गया।

 

बिटिया के नौकरी के सपने हुए राख, परिजनों में शोक

पिता जसवीर सिंह ढिल्लों बताते हैं की पढ़ने लिखने में काफी तेज होने के चलते बिटिया खुशनीत कौर ऊंचे ख्वाब देख रही थी। आत्मनिर्भर बनकर वह देश की सेवा करना चाहती थी। बेरोजगारी को लेकर बच्चे भाग रहे हैं। कनाडा सिख समाज के लोगों ने बताया कि बॉर्डर इलाके के तमाम सिख परिवारों के पढ़ने लिखने में मेधावी बच्चे नौकरी या बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई के लिए कनाडा जाते हैं। कनाडा में तमाम सिख परिवार रोजी रोजगार से जुड़े हैं।
 
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