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संसाधनों की कमी से जूझ रहे अस्पताल
अमर उजाला ब्यूूरो/लखीमपुर खीरी।
Updated Thu, 30 Jun 2016 11:40 PM IST
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डॉक्टर्स डे (एक जुलाई)पर विशेष
डॉक्टरों की कमी से रेफर किए जा रहे मरीज
जिला अस्पताल में 26 डॉक्टरों के सापेक्ष 18 की तैनाती
पैरामेडिकल स्टाफ न होने से स्वीपर कर रहे वार्ड ब्वाय का काम
जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, क्योंकि गांवों की सीएचसी-पीएचसी पर विशेषज्ञ डॉक्टरों का टोटा है। वहीं जिला अस्पताल में डॉक्टरों की संख्या निरंतर कम हो रही हैै, जिससे इलाज की उम्मीद में आने वाले मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हालात ये हैैं कि ओपीडी में कई घंटे लाइन लगाकर मरीज और उनके तीमारदार बगैर डॉक्टर की सलाह के वापस चले जाते हैैं, क्योंकि ओपीडी करने वाले डॉक्टरों के पास वार्डों मेें भर्ती मरीजों को देखने की भी जिम्मेदारी है।
जिला अस्पताल में 26 डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैैं, जिसके सापेक्ष 18 की तैनाती है। इसमें भी एक-दो डॉक्टर छुट्टी पर रहते हैैं, जिससे समस्या और भी विकट हो गई है। अधिक वर्क लोड के चलते डॉक्टर भी जरा सा सीरियस मरीज देखकर उसे लखनऊ रेफर करना जरूरी समझते हैं। गरीबों को सस्ता और बेहतर इलाज मिल सके इसके लिए शासन की ओर से तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिससे अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अस्पताल में डॉक्टरों के साथ ही पैरामेडिकल स्टाफ की कमी मरीजों के लिए मुसीबत बनी हुई है। इससे न तो मरीजों को समय से उपचार मिल रहा है और न ही डॉक्टर इन्हें देख पा रहे हैं। वहीं पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के चलते चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियो से इनका काम लिया जा रहा है। मरीजों को नवजीवन देने वाले डॉक्टर इनके कोपभाजन से भी अछूते नहीं हैं। कई बार देर से पहुंचने पर डॉक्टरों को मरीजों और उनके तीमारदारों के रोष का सामना करना पड़ता है। स्टाफ की कमी और मरीजों की संख्या में हो रही बढ़ोतरी के कारण अस्पताल की व्यवस्थाएं बदहाल हो गई हैैं। स्टाफ की कमी के बावजूद जिला अस्पताल में रोजाना एक हजार से 1500 मरीज देखे जा रहे हैं, लेकिन इसमें खानापूर्ति होती है क्योंकि मानक के अनुसार डॉक्टर मरीजों को देखें तो 50 फीसदी मरीजों को बिना दवा लिए लौटना पड़ेगा।
प्राइवेट व्यक्तियों से भी लिया जा रहा काम
जिला अस्पताल में स्टाफ की कमी का ये आलम है कि प्राइवेट व्यक्ति वार्डों में काम कर रहे हैं, जो किसी न किसी डॉक्टर के कृपापात्र होते हैं। इसलिए वार्डों में अक्सर मरीजों और उनके तीमारदारों से वसूली के मामले सामने आते रहते हैं। इस बावत अस्पताल प्रशासन भी चुप्पी साधे हुए है।
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इन विशेषज्ञों की है कमी
विशेषज्ञ स्वीकृत पद तैनाती
हृदय रोग विशेषज्ञ एक 0
त्वचा रोग विशेषज्ञ एक 0
क्षय रोग विशेषज्ञ एक 0
दांत रोग विशेषज्ञ एक 0
रेडियोलाजिस्ट एक 0
जिला अस्पताल में ही नहीं पूरे जिले में डॉक्टरों की कमी है। साथ ही पैरामेडिकल स्टाफ भी कम है। डॉक्टर और स्टाफ की तैनाती के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। उम्मीद है कि जल्द ही इस समस्या से छुटकारा मिल जाएगा। अस्पताल में प्राइवेट कर्मियों के काम करने के बारे में जानकारी करेंगे और यदि बाहरी लोग काम करते मिलेंगे, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ जावेद अहमद, सीएमओ
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डॉक्टरों की कमी से रेफर किए जा रहे मरीज
जिला अस्पताल में 26 डॉक्टरों के सापेक्ष 18 की तैनाती
पैरामेडिकल स्टाफ न होने से स्वीपर कर रहे वार्ड ब्वाय का काम
जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, क्योंकि गांवों की सीएचसी-पीएचसी पर विशेषज्ञ डॉक्टरों का टोटा है। वहीं जिला अस्पताल में डॉक्टरों की संख्या निरंतर कम हो रही हैै, जिससे इलाज की उम्मीद में आने वाले मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हालात ये हैैं कि ओपीडी में कई घंटे लाइन लगाकर मरीज और उनके तीमारदार बगैर डॉक्टर की सलाह के वापस चले जाते हैैं, क्योंकि ओपीडी करने वाले डॉक्टरों के पास वार्डों मेें भर्ती मरीजों को देखने की भी जिम्मेदारी है।
जिला अस्पताल में 26 डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैैं, जिसके सापेक्ष 18 की तैनाती है। इसमें भी एक-दो डॉक्टर छुट्टी पर रहते हैैं, जिससे समस्या और भी विकट हो गई है। अधिक वर्क लोड के चलते डॉक्टर भी जरा सा सीरियस मरीज देखकर उसे लखनऊ रेफर करना जरूरी समझते हैं। गरीबों को सस्ता और बेहतर इलाज मिल सके इसके लिए शासन की ओर से तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिससे अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अस्पताल में डॉक्टरों के साथ ही पैरामेडिकल स्टाफ की कमी मरीजों के लिए मुसीबत बनी हुई है। इससे न तो मरीजों को समय से उपचार मिल रहा है और न ही डॉक्टर इन्हें देख पा रहे हैं। वहीं पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के चलते चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियो से इनका काम लिया जा रहा है। मरीजों को नवजीवन देने वाले डॉक्टर इनके कोपभाजन से भी अछूते नहीं हैं। कई बार देर से पहुंचने पर डॉक्टरों को मरीजों और उनके तीमारदारों के रोष का सामना करना पड़ता है। स्टाफ की कमी और मरीजों की संख्या में हो रही बढ़ोतरी के कारण अस्पताल की व्यवस्थाएं बदहाल हो गई हैैं। स्टाफ की कमी के बावजूद जिला अस्पताल में रोजाना एक हजार से 1500 मरीज देखे जा रहे हैं, लेकिन इसमें खानापूर्ति होती है क्योंकि मानक के अनुसार डॉक्टर मरीजों को देखें तो 50 फीसदी मरीजों को बिना दवा लिए लौटना पड़ेगा।
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प्राइवेट व्यक्तियों से भी लिया जा रहा काम
जिला अस्पताल में स्टाफ की कमी का ये आलम है कि प्राइवेट व्यक्ति वार्डों में काम कर रहे हैं, जो किसी न किसी डॉक्टर के कृपापात्र होते हैं। इसलिए वार्डों में अक्सर मरीजों और उनके तीमारदारों से वसूली के मामले सामने आते रहते हैं। इस बावत अस्पताल प्रशासन भी चुप्पी साधे हुए है।
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इन विशेषज्ञों की है कमी
विशेषज्ञ स्वीकृत पद तैनाती
हृदय रोग विशेषज्ञ एक 0
त्वचा रोग विशेषज्ञ एक 0
क्षय रोग विशेषज्ञ एक 0
दांत रोग विशेषज्ञ एक 0
रेडियोलाजिस्ट एक 0
जिला अस्पताल में ही नहीं पूरे जिले में डॉक्टरों की कमी है। साथ ही पैरामेडिकल स्टाफ भी कम है। डॉक्टर और स्टाफ की तैनाती के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। उम्मीद है कि जल्द ही इस समस्या से छुटकारा मिल जाएगा। अस्पताल में प्राइवेट कर्मियों के काम करने के बारे में जानकारी करेंगे और यदि बाहरी लोग काम करते मिलेंगे, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ जावेद अहमद, सीएमओ