फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   Special on World Tiger Day: increasing population of tigers, challenges along with happiness

विश्व बाघ दिवस पर विशेष: बाघों की बढ़ रही आबादी, खुशी के साथ चुनौतियां भी

Wed, 29 Jul 2020 12:36 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 29 Jul 2020 12:36 AM IST
विज्ञापन
Special on World Tiger Day: increasing population of tigers, challenges along with happiness
दुधवा के जंगल में बाघिन की गोद में बैठे शावक। (फाइल फोटो) - फोटो : LAKHIMPUR
बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व देश में बाघों के सबसे खूबसूरत और महफूज आशियानों में एक है। यही कारण है कि यहां बाघों की संख्या में साल दर साल बढ़ोतरी हो रही है। बाघ संरक्षण और संवर्धन के प्रयासों के चलते डीटीआर में बाघों की संख्या में 40 से 50 फीसदी इजाफा हुआ है। वर्ष 2014 में यहां 60 बाघ थे, जबकि 2019 की गणना के जो परिणाम आए हैं उसके अनुसार 100 से 110 बाघों के होने का अनुमान है। वहीं पूरे प्रदेश में इन पांच सालों में बाघों की कुल संख्या 90 से बढ़कर 173 पहुंच गई है।
विज्ञापन

दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी संजय पाठक कहते हैं कि बाघों के अनुकूल वातावरण, प्राकृतिक वास, पर्याप्त भोजन और सुरक्षा मिलने से डीटीआर में बाघों की आबादी में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसके साथ ही चुनौतियां भी बढ़ रहीं हैं। अब और अधिक मुस्तैदी से बाघों की सुरक्षा करना भी हमारी जिम्मेदारी है।
विज्ञापन

दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक मनोज सोनकर का कहना है कि दुधवा के जंगल में जिस तेजी से बाघों की संख्या में इजाफा हो रहा है, उससे अफसर और वन कर्मियों की जिम्मेदारी कई गुना अधिक बढ़ रही है। पिछले वर्षों में शिकार आदि पर प्रभावी अंकुश लगाने के साथ ग्रासलैंड, वेटलैंड के लिए उचित प्रबंधन किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

शिकार और वन्यजीव अंग तस्करी एक बड़ी चुनौती
तस्कर यूं तो बाघों के रहने का पूरा पता रखते हैं लेकिन दुधवा टाइगर रिजर्व के नेपाल सीमा पर होने के कारण यह चुनौती ज्यादा बढ़ जाती है। वन्यजीव तस्करों का नेटवर्क सर्वव्यापी है और इसे कुछ सफेदपोश लोगों का समर्थन भी मिला हुआ है। जाहिर है डीटीआर के बाघों के जीवन पर भी खतरे की तलवार लटकी हुई है।

तराई में मानव-बाघ संघर्ष भी है एक बड़ी समस्या
तराई के जंगलों में बाघ और मानवों का टकराव बढ़ रहा है। केंद्र सरकार बाघों को संरक्षित करने के लिए प्रोजेक्ट टाइगर चला रही है। पिछले कुछ सालों में मानव और बाघों के बीच शुरू हुआ संघर्ष बढ़ती आबादी के साथ प्राकृतिक संपदा एवं जंगलों के दोहन और नियोजित विकास बाघों को अपना साम्राज्य छोड़ने के लिए विवश कर रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed