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जीएसटी में कुछ और संशोधन किए जाएं, व्यापारियों के साथ आमजन को होगी राहत
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लखीमपुर खीरी। व्यापारियों ने जीएसटी में कुछ और संशोधन किए जाने की आवश्यकता जताई है। इससे व्यापारियों के साथ ही आम लोगों को राहत मिलेगी।
अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में व्यापारियों ने नॉनब्रांडेड नमकीन (दालमोठ) के निर्माण पर अभी लग रही पांच प्रतिशत जीएसटी को खत्म करने की मांग की। जबकि ब्रांडेड नमकीन पर लगने वाली 12 प्रतिशत जीएसटी पर सहमति जताई है। ऐसे ही बेकरी उत्पादों में नॉनब्रांडेड पर पांच प्रतिशत व ब्रांडेड पर 12 प्रतिशत जीएसटी लग रही है, जिसमें वैरिएशन (अलग-अलग प्रकार) को समाप्त कर एकसमान करीब आठ प्रतिशत जीएसटी निर्धारण की मांग की। रेडीमेड कारोबारी भी जीएसटी के दो वैरिएशन के बजाय एकसमान जीएसटी लागू करने के पक्ष में हैं, क्योंकि एक हजार रुपये मूल्य तक रेडीमेड कपड़ों पर पांच प्रतिशत और एक हजार से ऊपर मूल्य के कपड़ों पर 12 प्रतिशत जीएसटी लिया जाता है। इससे पेपरवर्क बढ़ने के साथ ही अन्य तरह की समस्याओं से व्यापारियों को जूझना पड़ता है। ट्रैक्टर समेत कृषि उपकरणों पर भी जीएसटी 12 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत करने की मांग है। व्यापारियों ने ई-वे बिल के रिन्यूवल की सुविधा को आसान बनाने की मांग की है। तीन व पांच साल में रिन्यूवल होने वाले लाइसेंस को आजीवन या निश्चित अवधि जैसे 20 साल तक के लिए जारी करने की मांग की। मंडी के बाहर मैनुफैक्चरिंग इकाईयों पर मंडी शुल्क लागू न हो आदि मांगे व्यापारियों ने उठाई। साथ ही जीएसटी लागू होने के बाद से भ्रष्टाचार में कमी आने की बात भी व्यापारियों ने कही है। संवाद कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल (मिश्रा गुट) के पदाधिकारी संरक्षक सुशील कुमार टंडन, जिला मंत्री उमेश शुक्ला, मनमीत सिंह, योगी सचदेव, राजेंद्र साहू, शिवकुमार तोलानी, राजेंद्र सिंह अजमानी शामिल हुए।
ट्रैक्टर, कृषि उपकरणों व पार्ट्स पर 12 प्रतिशत जीएसटी देना पड़ता है। इससे पहले कृषि उपकरणों व पार्ट्स पर पांच प्रतिशत टैक्स लगता था। जीएसटी बढ़ने से कृषि उपकरणों की लागत व मूल्य बढ़ गया है, जिससे किसानों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। किसानों को सहूलियत देने के उद्देश्य से कृषि संबंधी उपकरणों पर जीएसटी पांच प्रतिशत की जानी आवश्यक है।
- राजेंद्र सिंह अजमानी, ऑटो-पार्ट्स विक्रेता
रेडीमेड कपड़ों पर लगने वाले जीएसटी में वैरिएशन होने से अतिरिक्त पेपर वर्क के रूप में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एक हजार मूल्य तक के रेडीमेड कपड़ों पर पांच प्रतिशत जीएसटी है, जबकि एक हजार से ऊपर मूल्य के कपड़ों पर 12 प्रतिशत जीएसटी है। इसे एकसमान किया जाना उचित होगा, जिससे व्यापारियों को सहूलियत मिलेगी। जनपद के शॉपिंग माल की जीएसटी दूसरे प्रदेशों में काउंट हो रही है, जिससे अन्य कारोबारी विभाग के निशाने पर आते हैं। इसलिए शॉपिंग माल की जीएसटी कलेक्शन की जांच कराई जानी चाहिए।
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- राजेंद्र साहू, रेडीमेड विक्रेेता
नमकीन (दालमोठ) मैनुफैक्चरिंग इकाइयों में बनने वाली नॉन ब्रांडेड नमकीन पर पांच प्रतिशत और ब्रांडेड नमकीन पर 12 प्रतिशत जीएसटी लग रहा है। जबकि नॉन ब्रांडेड नमकीन का उपभोग गरीब जनता करती है और आवश्यक खाद्य पदार्थ की श्रेणी में है। इसलिए नॉनब्रांडेड नमकीन पर जीएसटी नहीं लगाया जाना चाहिए।
- शिवकुमार तोलानी, नमकीन निर्माता
बेकरी उत्पादों में नॉनब्रांड पर पांच प्रतिशत और ब्रांडेड उत्पाद पर 12 प्रतिशत जीएसटी लग रहा है। दो अलग-अलग वैरिएशन होने के कारण जीएसटी चोरी की संभावना बढ़ जाती है, जिससे सरकार के राजस्व की क्षति होती है। इसलिए बेकरी उत्पादों पर भी एक समान जीएसटी व्यवस्था लागू की जानी आवश्यक है। साथ ही दूसरे शहर भेजे जाने वाले बेकरी माल को दूसरे जनपदों में खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा रोके जाने की मांग उठाई।
- योगी सचदेव, बेकरी उत्पाद निर्माता
व्यापारियों की समस्याओं व सुझावों पर त्वरित कार्रवाई की जाती है। जीएसटी संबंधित समस्याओं के निराकरण के लिए हेल्प डेस्क की स्थापना की गई है। विशेष सुझावों को जीएसटी काउंसलिंग के पास भेजने की व्यवस्था है। यदि कोई समस्या है तो उसका निराकरण कराया जाएगा।
- केके वर्मा, डिप्टी कमिश्नर, वाणिज्य कर विभाग
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अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में व्यापारियों ने नॉनब्रांडेड नमकीन (दालमोठ) के निर्माण पर अभी लग रही पांच प्रतिशत जीएसटी को खत्म करने की मांग की। जबकि ब्रांडेड नमकीन पर लगने वाली 12 प्रतिशत जीएसटी पर सहमति जताई है। ऐसे ही बेकरी उत्पादों में नॉनब्रांडेड पर पांच प्रतिशत व ब्रांडेड पर 12 प्रतिशत जीएसटी लग रही है, जिसमें वैरिएशन (अलग-अलग प्रकार) को समाप्त कर एकसमान करीब आठ प्रतिशत जीएसटी निर्धारण की मांग की। रेडीमेड कारोबारी भी जीएसटी के दो वैरिएशन के बजाय एकसमान जीएसटी लागू करने के पक्ष में हैं, क्योंकि एक हजार रुपये मूल्य तक रेडीमेड कपड़ों पर पांच प्रतिशत और एक हजार से ऊपर मूल्य के कपड़ों पर 12 प्रतिशत जीएसटी लिया जाता है। इससे पेपरवर्क बढ़ने के साथ ही अन्य तरह की समस्याओं से व्यापारियों को जूझना पड़ता है। ट्रैक्टर समेत कृषि उपकरणों पर भी जीएसटी 12 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत करने की मांग है। व्यापारियों ने ई-वे बिल के रिन्यूवल की सुविधा को आसान बनाने की मांग की है। तीन व पांच साल में रिन्यूवल होने वाले लाइसेंस को आजीवन या निश्चित अवधि जैसे 20 साल तक के लिए जारी करने की मांग की। मंडी के बाहर मैनुफैक्चरिंग इकाईयों पर मंडी शुल्क लागू न हो आदि मांगे व्यापारियों ने उठाई। साथ ही जीएसटी लागू होने के बाद से भ्रष्टाचार में कमी आने की बात भी व्यापारियों ने कही है। संवाद कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल (मिश्रा गुट) के पदाधिकारी संरक्षक सुशील कुमार टंडन, जिला मंत्री उमेश शुक्ला, मनमीत सिंह, योगी सचदेव, राजेंद्र साहू, शिवकुमार तोलानी, राजेंद्र सिंह अजमानी शामिल हुए।
ट्रैक्टर, कृषि उपकरणों व पार्ट्स पर 12 प्रतिशत जीएसटी देना पड़ता है। इससे पहले कृषि उपकरणों व पार्ट्स पर पांच प्रतिशत टैक्स लगता था। जीएसटी बढ़ने से कृषि उपकरणों की लागत व मूल्य बढ़ गया है, जिससे किसानों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। किसानों को सहूलियत देने के उद्देश्य से कृषि संबंधी उपकरणों पर जीएसटी पांच प्रतिशत की जानी आवश्यक है।
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- राजेंद्र सिंह अजमानी, ऑटो-पार्ट्स विक्रेता
रेडीमेड कपड़ों पर लगने वाले जीएसटी में वैरिएशन होने से अतिरिक्त पेपर वर्क के रूप में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एक हजार मूल्य तक के रेडीमेड कपड़ों पर पांच प्रतिशत जीएसटी है, जबकि एक हजार से ऊपर मूल्य के कपड़ों पर 12 प्रतिशत जीएसटी है। इसे एकसमान किया जाना उचित होगा, जिससे व्यापारियों को सहूलियत मिलेगी। जनपद के शॉपिंग माल की जीएसटी दूसरे प्रदेशों में काउंट हो रही है, जिससे अन्य कारोबारी विभाग के निशाने पर आते हैं। इसलिए शॉपिंग माल की जीएसटी कलेक्शन की जांच कराई जानी चाहिए।
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- राजेंद्र साहू, रेडीमेड विक्रेेता
नमकीन (दालमोठ) मैनुफैक्चरिंग इकाइयों में बनने वाली नॉन ब्रांडेड नमकीन पर पांच प्रतिशत और ब्रांडेड नमकीन पर 12 प्रतिशत जीएसटी लग रहा है। जबकि नॉन ब्रांडेड नमकीन का उपभोग गरीब जनता करती है और आवश्यक खाद्य पदार्थ की श्रेणी में है। इसलिए नॉनब्रांडेड नमकीन पर जीएसटी नहीं लगाया जाना चाहिए।
- शिवकुमार तोलानी, नमकीन निर्माता
बेकरी उत्पादों में नॉनब्रांड पर पांच प्रतिशत और ब्रांडेड उत्पाद पर 12 प्रतिशत जीएसटी लग रहा है। दो अलग-अलग वैरिएशन होने के कारण जीएसटी चोरी की संभावना बढ़ जाती है, जिससे सरकार के राजस्व की क्षति होती है। इसलिए बेकरी उत्पादों पर भी एक समान जीएसटी व्यवस्था लागू की जानी आवश्यक है। साथ ही दूसरे शहर भेजे जाने वाले बेकरी माल को दूसरे जनपदों में खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा रोके जाने की मांग उठाई।
- योगी सचदेव, बेकरी उत्पाद निर्माता
व्यापारियों की समस्याओं व सुझावों पर त्वरित कार्रवाई की जाती है। जीएसटी संबंधित समस्याओं के निराकरण के लिए हेल्प डेस्क की स्थापना की गई है। विशेष सुझावों को जीएसटी काउंसलिंग के पास भेजने की व्यवस्था है। यदि कोई समस्या है तो उसका निराकरण कराया जाएगा।
- केके वर्मा, डिप्टी कमिश्नर, वाणिज्य कर विभाग