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ऐसे तो वर्षों लग जाएंगे ‘खाद्य सुरक्षा’ लागू होने में
लखीमपुर खीरी
Updated Fri, 03 Jul 2015 07:06 PM IST
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खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू करने के लिए पात्र गृहस्थियों के चयन का काम बेहद धीमी रफ्तार से चल रहा है। यदि यही रफ्तार रही तो इसे पूरा होने में एक साल से भी अधिक का समय लग सकता है। शहरी क्षेत्र में अभी तक महज 30.20 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्र में 17.09 प्रतिशत ही काम हो पाया है। जबकि खाद्य एवं रसद विभाग ने पात्र गृहस्थियों के चयन की समय सीमा 10 जुलाई तक ही तय की थी।
खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 को लागू करने के लिए पात्र गृहस्थियों के चयन का काम शुरू हुए करीब छह माह बीत चुका है। इन छह महीनों में एक चौथाई काम भी पूरा नहीं हो पाया है। शहरी क्षेत्र की 149 राशन की दुकानों में से 68 दुकानों के सत्यापन का काम पूरा हो चुका है। 45 दुकानों की सूची बनकर तैयार है। यह महज 30.20 फीसदी है। ग्रामीण क्षेत्र की हालत और भी खराब है।
ग्रामीण क्षेत्र की कुल 1239 राशन की दुकानों में से 389 दुकानों का सत्यापन पूरा हो चुका है। 210 दुकानों की सूची बनकर तैयार है जो केवल 17.09 फीसदी है। उधर खाद्य एवं रसद विभाग ने खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत पात्र गृहस्थियों के चयन की समय सीमा 10 जुलाई निर्धारित की थी। इस समय सीमा में तो काम पूरा हो पाना असंभव है। यदि इसी रफ्तार से काम हुआ तो अगले एक साल में भी यह काम पूरा हो पाना मुश्किल है।
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और तो और पिछले दो साल से चल रहा एंड टू एंड कंप्यूटराइजेशन का काम भी अब तक पूरा नहीं हो पाया है। अंत्योदय योजना के डेटा फीडिंग का काम तो शत प्रतिशत पूरा हो चुका है। बीपीएल कार्डों में नगर क्षेत्र का काम 100 प्रतिशत हो चुका है। जबकि जिले भर में कुल मिलाकर यह 99.30 फीसदी पर ही अटका हुआ है। धौरहरा ईसानगर और रमियाबेहड़ में 91 फीसदी पर काम लटक कर रह गया है। बेहजम, लखीमपुर और नकहा में 92 फीसदी के करीब पहुंच पाया है।
एपीएल राशनकार्डों के एंड टू एंड कंप्यूटराइजेशन का काम अभी 67.92 फीसदी पूरा हो पाया है। जिले के कुल 576266 एपीएल राशनकार्डों में से 403755 के डेटा अपलोड हो चुके हैं। इनमें 39384 राशनकार्ड ही वैलिड पाए गए, 12371 राशनकार्ड वोटर आईडी के अभाव के कारण या मेल न खाने के कारण अनवैलिड हो गए है। इनके सुधार की प्रक्रिया जारी है।
डीएसओ डॉ. राकेश तिवारी ने बताया कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत पात्र गृहस्थियों के चयन के लिए आवेदनपत्र संकलन करने को पिछले दिनों शहरी क्षेत्र में शिविर भी लगाए गए थे। ऑनलाइन सूची तैयार करने के लिए ब्लाकों में कंप्यूटर लगा दिए गए है। उन्हें इंटरनेट से भी जोड़ा जा रहा है। सेवा प्रदाताओं के जरिए डेटा इंट्री आपरेटर रखे जा रहे हैं ताकि काम में गति आ सके।
जिला पूर्ति अधिकारी डॉ. राकेश तिवारी ने बताया कि स्थानीय स्तर पर कर्मचारियों की कमी के कारण काम की गति धीमी है। जिले के 4.30 लाख लोगों ने एनएफएसए के तहत ऑनलाइन आवेदन किया है। इनका प्रिंट निकालकर सूची तैयार की जानी है। इसके लिए अब तक कोई बजट नहीं आया है।
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खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 को लागू करने के लिए पात्र गृहस्थियों के चयन का काम शुरू हुए करीब छह माह बीत चुका है। इन छह महीनों में एक चौथाई काम भी पूरा नहीं हो पाया है। शहरी क्षेत्र की 149 राशन की दुकानों में से 68 दुकानों के सत्यापन का काम पूरा हो चुका है। 45 दुकानों की सूची बनकर तैयार है। यह महज 30.20 फीसदी है। ग्रामीण क्षेत्र की हालत और भी खराब है।
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ग्रामीण क्षेत्र की कुल 1239 राशन की दुकानों में से 389 दुकानों का सत्यापन पूरा हो चुका है। 210 दुकानों की सूची बनकर तैयार है जो केवल 17.09 फीसदी है। उधर खाद्य एवं रसद विभाग ने खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत पात्र गृहस्थियों के चयन की समय सीमा 10 जुलाई निर्धारित की थी। इस समय सीमा में तो काम पूरा हो पाना असंभव है। यदि इसी रफ्तार से काम हुआ तो अगले एक साल में भी यह काम पूरा हो पाना मुश्किल है।
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और तो और पिछले दो साल से चल रहा एंड टू एंड कंप्यूटराइजेशन का काम भी अब तक पूरा नहीं हो पाया है। अंत्योदय योजना के डेटा फीडिंग का काम तो शत प्रतिशत पूरा हो चुका है। बीपीएल कार्डों में नगर क्षेत्र का काम 100 प्रतिशत हो चुका है। जबकि जिले भर में कुल मिलाकर यह 99.30 फीसदी पर ही अटका हुआ है। धौरहरा ईसानगर और रमियाबेहड़ में 91 फीसदी पर काम लटक कर रह गया है। बेहजम, लखीमपुर और नकहा में 92 फीसदी के करीब पहुंच पाया है।
एपीएल राशनकार्डों के एंड टू एंड कंप्यूटराइजेशन का काम अभी 67.92 फीसदी पूरा हो पाया है। जिले के कुल 576266 एपीएल राशनकार्डों में से 403755 के डेटा अपलोड हो चुके हैं। इनमें 39384 राशनकार्ड ही वैलिड पाए गए, 12371 राशनकार्ड वोटर आईडी के अभाव के कारण या मेल न खाने के कारण अनवैलिड हो गए है। इनके सुधार की प्रक्रिया जारी है।
डीएसओ डॉ. राकेश तिवारी ने बताया कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत पात्र गृहस्थियों के चयन के लिए आवेदनपत्र संकलन करने को पिछले दिनों शहरी क्षेत्र में शिविर भी लगाए गए थे। ऑनलाइन सूची तैयार करने के लिए ब्लाकों में कंप्यूटर लगा दिए गए है। उन्हें इंटरनेट से भी जोड़ा जा रहा है। सेवा प्रदाताओं के जरिए डेटा इंट्री आपरेटर रखे जा रहे हैं ताकि काम में गति आ सके।
जिला पूर्ति अधिकारी डॉ. राकेश तिवारी ने बताया कि स्थानीय स्तर पर कर्मचारियों की कमी के कारण काम की गति धीमी है। जिले के 4.30 लाख लोगों ने एनएफएसए के तहत ऑनलाइन आवेदन किया है। इनका प्रिंट निकालकर सूची तैयार की जानी है। इसके लिए अब तक कोई बजट नहीं आया है।