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जिले में छह फीसदी बढ़ाया गन्ने का रकबा
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
Updated Sun, 31 Jul 2016 11:37 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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फिर मजबूत हुआ किसानों का गन्ने पर यकीन...फ्लैग
- पिछले वर्ष भुगतान में देरी से घटा था रकबा
- 2.57 लाख हेक्टेअर में हुई गन्ने की बुवाई
पिछले तीन सालों में गन्ना मूल्य भुगतान में हुई देरी से परेशान किसानों ने गन्ने का रकबा कम किया था, लेकिन इस वर्ष गन्ना मूल्य भुगतान में सुधार होने से किसानों का भरोसा मजबूत हुआ है। इसका असर गन्ने के रकबे में देखने को मिला है। हाल में संपन्न हुए गन्ना सर्वेक्षण के नतीजे बताते हैं कि पिछले साल की अपेक्षा गन्ने का रकबा छह फीसदी बढ़ गया है। हालांकि पेड़ी में पांच फीसदी की कमी आई है, तो पौधा में 17 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है।
माना जा रहा है कि चुनावी वर्ष होने के चलते प्रशासन ने भी गन्ना मूल्य भुगतान में तेजी लाने के लिए मिलों पर दबाव बनाए रखा, जिससे एक बार फिर गन्ने की खेती पर किसानों का भरोसा बढ़ा है। बताते चलें कि वर्ष 2015-16 में भुगतान न मिलने से परेशान गन्ना किसानों का गन्ने की खेती से मोहभंग होने लगा था, जिसका असर घटते रकबे के तौर पर देखा गया था। मसलन सैंपल सर्वे पाया गया कि पौधे का एरिया 7222 हेक्टेअर से घटकर 7054 हेक्टेअर रह गया था। कयास यहां तक लगाए जा रहे थे कि गन्ना मूल्य भुगतान की स्थिति खराब रही तो गन्ने का रकबा और घट सकता है। इसके उलट वर्ष 2016-17 में गन्ना मूल्य भुगतान में हुए सुधार से उत्साहित किसानों ने गन्ने की रकबा बढ़ा दिया है। पिछले वर्ष जिले में गन्ने का रकबा 2,42,449 हेक्टेअर था, जो इस वर्ष बढ़कर 2,57,409 हेक्टेअर तक पहुंच गया है। पेड़ी का रकबा पांच फीसदी घटने के बावजूद पौधे में 17 फीसदी इजाफे ने आंकड़ों को बदलकर रख दिया। इससे घट रहे रकबे से चिंतित गन्ना विभाग ने राहत की सांस ली है।
घट गई थी मिलों को गन्ना आपूर्ति
जिले में पिछले वर्ष कम हुए रकबे का असर मिलों की पेराई क्षमता पर भी पड़ा है। नौ चीनी मिलों ने वर्ष 2014-15 में 932.17 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की थी। वर्ष 2015-16 में 810.06 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 122 लाख क्विंटल कम है।
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सीतापुर और हरदोई की मिलों को भी गन्ना आपूर्ति
जिले में नौ चीनी मिलें गन्ने की पेराई करती हैं। इसके अलावा सीतापुर की हरगांव चीनी मिल और हरदोई की लोनी तथा हरियावां चीनी मिल को इस जिले के किसान गन्ना आपूर्ति करते हैं।
गन्ना मूल्य भुगतान में इस वर्ष सुधार होने से गन्ने का रकबा छह फीसदी बढ़ा है। इससे निश्चित ही किसानों में खुशहाली आएगी। इस बार सहफसली खेती के लिए भी किसानों को प्रेरित किया गया है।
- जगदीश चंद्र यादव, जिला गन्ना अधिकारी
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- पिछले वर्ष भुगतान में देरी से घटा था रकबा
- 2.57 लाख हेक्टेअर में हुई गन्ने की बुवाई
पिछले तीन सालों में गन्ना मूल्य भुगतान में हुई देरी से परेशान किसानों ने गन्ने का रकबा कम किया था, लेकिन इस वर्ष गन्ना मूल्य भुगतान में सुधार होने से किसानों का भरोसा मजबूत हुआ है। इसका असर गन्ने के रकबे में देखने को मिला है। हाल में संपन्न हुए गन्ना सर्वेक्षण के नतीजे बताते हैं कि पिछले साल की अपेक्षा गन्ने का रकबा छह फीसदी बढ़ गया है। हालांकि पेड़ी में पांच फीसदी की कमी आई है, तो पौधा में 17 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है।
माना जा रहा है कि चुनावी वर्ष होने के चलते प्रशासन ने भी गन्ना मूल्य भुगतान में तेजी लाने के लिए मिलों पर दबाव बनाए रखा, जिससे एक बार फिर गन्ने की खेती पर किसानों का भरोसा बढ़ा है। बताते चलें कि वर्ष 2015-16 में भुगतान न मिलने से परेशान गन्ना किसानों का गन्ने की खेती से मोहभंग होने लगा था, जिसका असर घटते रकबे के तौर पर देखा गया था। मसलन सैंपल सर्वे पाया गया कि पौधे का एरिया 7222 हेक्टेअर से घटकर 7054 हेक्टेअर रह गया था। कयास यहां तक लगाए जा रहे थे कि गन्ना मूल्य भुगतान की स्थिति खराब रही तो गन्ने का रकबा और घट सकता है। इसके उलट वर्ष 2016-17 में गन्ना मूल्य भुगतान में हुए सुधार से उत्साहित किसानों ने गन्ने की रकबा बढ़ा दिया है। पिछले वर्ष जिले में गन्ने का रकबा 2,42,449 हेक्टेअर था, जो इस वर्ष बढ़कर 2,57,409 हेक्टेअर तक पहुंच गया है। पेड़ी का रकबा पांच फीसदी घटने के बावजूद पौधे में 17 फीसदी इजाफे ने आंकड़ों को बदलकर रख दिया। इससे घट रहे रकबे से चिंतित गन्ना विभाग ने राहत की सांस ली है।
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घट गई थी मिलों को गन्ना आपूर्ति
जिले में पिछले वर्ष कम हुए रकबे का असर मिलों की पेराई क्षमता पर भी पड़ा है। नौ चीनी मिलों ने वर्ष 2014-15 में 932.17 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की थी। वर्ष 2015-16 में 810.06 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 122 लाख क्विंटल कम है।
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सीतापुर और हरदोई की मिलों को भी गन्ना आपूर्ति
जिले में नौ चीनी मिलें गन्ने की पेराई करती हैं। इसके अलावा सीतापुर की हरगांव चीनी मिल और हरदोई की लोनी तथा हरियावां चीनी मिल को इस जिले के किसान गन्ना आपूर्ति करते हैं।
गन्ना मूल्य भुगतान में इस वर्ष सुधार होने से गन्ने का रकबा छह फीसदी बढ़ा है। इससे निश्चित ही किसानों में खुशहाली आएगी। इस बार सहफसली खेती के लिए भी किसानों को प्रेरित किया गया है।
- जगदीश चंद्र यादव, जिला गन्ना अधिकारी