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इन बिन बुलाए मेहमानों को चाहिए वोटों की दावत
अशोक निगम लखीमपुर खीरी।
Updated Sat, 04 Feb 2017 11:02 PM IST
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चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
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शादी-ब्याह जैसे मांगलिक कार्यक्रमों में बगैर न्यौते के पहुंच रहे हैं उम्मीदवार
चुनावी मौसम में गम के मौके भी बने नेताओं के जनसंपर्क का जरिया
चुनाव के मौसम में नेताजी जरूरत से ज्यादा सोशल हो गए हैं। कहीं शादी-ब्याह हो या मुंडन संस्कार, आजकल बिना बुलाए भी हर जगह पहुंच रहे हैं। घर के मालिक से आमना-सामना होते ही खीसें निपोरते हुए पहले तो यह शिकवा होता है, ‘हम तो आपको अपना समझते हैं, आपने हमें बुलाया ही नहीं’, फिर यह कहते हुए मतलब की बात पर आ जाते हैं, ‘भई चुनाव में में मत भूल जाना, हम तो तुम्हीं लोगों के भरोसे खड़े हुए हैं।’ गरीब के घर शादी हो तो वोट के एडवांस के तौर पर नेग का लिफाफा भी थमा देते हैं। कहीं-कहीं नेताओं के लाव-लश्कर के साथ पहुंचने से अजीबोगरीब हालात पैदा हो जाते हैं। कार्यक्रम एक तरफ रखे रह जाते हैं, पूरा आयोजन ही उनके जनसंपर्क का माध्यम बन जाता है।
हालत यह है कि विधानसभा चुनाव में उतरे ज्यादातर उम्मीदवारों ने 15 फरवरी तक होने वाले मांगलिक कार्यों का ब्योरा जुटा लिया है। कब किसके घर कितने बजे कार्यक्रम है, इसकी बाकायदा सूची बन गई है। कार्यकर्ताओं को हिदायत है कि उनकी जानकारी में कहीं कोई मांगलिक कार्यक्रम हो तो इसकी सूचना समय से नेता जी को दे दें ताकि वह उसमें शिरकत कर सकें। इसके चलते दिन में क्षेत्र में जनसंपर्क और रात को मांगलिक आयोजनों में शिरकत उम्मीदवारों की दिनचर्या बन गया है। अगर बिरादरी के किसी परिवार में आयोजन हो तो कोई रिश्तेदारी निकालने की कोशिश होती है। गैर बिरादरी के कार्यक्रमों में पुराने संबंध याद दिलाए जाते हैं। दिन के जनसंपर्क से ज्यादा रात को ऐसे कार्यक्रमों में भागेदारी वोट मिलने की ज्यादा पुख्ता गारंटी मानी जा रही है।
नेताजी का ऐसे आना, ये तो झेल ही गए
निघासन विधानसभा क्षेत्र के गांव गौरिया के प्रधान प्रमोद कुमार के यहां दो फरवरी को बेटे का तिलक था। उन्होंने सिर्फ एक ही उम्मीदवार को न्योता दिया था लेकिन कार्यक्रम शुरू हुआ तो एक के बाद एक उम्मीदवारों की झड़ी लग गई। प्रमोद कुमार बताते हैं कि इतने नेताओं के आने की खुशी तो हुई लेकिन उनके स्वागत-सत्कार में ही उलझे रहे। घर के कार्यक्रम पर ध्यान नहीं दे पाए। इसी तरह 31 जनवरी को पलिया विधानसभा क्षेत्र में चंद्रिका पाल के बेटे की शादी में कई प्रत्याशी अपने लाव-लश्कर के साथ पहुंचे तो शादी से ज्यादा चुनावी जनसंपर्क का माहौल बन गया। इसी क्षेत्र में पप्पू सक्सेना की बेटी की शादी का कार्यक्रम भी उम्मीदवारों की मौजूदगी की वजह से चर्चा में बना रहा।
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मतदान तक मांगलिक कार्यो के खूब मुहूर्त
यह संयोग ही है कि विधानसभा चुनाव के दौरान मतदान के दिन तक मांगलिक कार्यों के शुभ मुहूर्त भी खूब हैं। प्रसिद्ध ज्योतिष शास्त्री पंडित रामदेव के मुताबिक पांच फरवरी से 15 फरवरी तक 5, 6, 7, 11, 12 और 13 फरवरी शादियों के लिए शुभ मुहूर्त हैं तो नौ और 15 फरवरी की तिथियां, मुंडन, 8, 12 और 13 फरवरी की तिथियां यज्ञोपवीत संस्कार के लिए शुभ हैं। हालांकि खुशी ही नहीं गम के मौके भी आजकल उम्मीदवारों की निगाह में हैं। आम दिनों में जो नेता आसानी से कहीं नजर आते, वे चुनाव के दिनों में शवयात्राओं के अलावा दसवां, तेरहवीं, शुद्धि हवन और पगड़ी जैसी रस्म में खूब दिखाई दे रहे हैं।
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चुनावी मौसम में गम के मौके भी बने नेताओं के जनसंपर्क का जरिया
चुनाव के मौसम में नेताजी जरूरत से ज्यादा सोशल हो गए हैं। कहीं शादी-ब्याह हो या मुंडन संस्कार, आजकल बिना बुलाए भी हर जगह पहुंच रहे हैं। घर के मालिक से आमना-सामना होते ही खीसें निपोरते हुए पहले तो यह शिकवा होता है, ‘हम तो आपको अपना समझते हैं, आपने हमें बुलाया ही नहीं’, फिर यह कहते हुए मतलब की बात पर आ जाते हैं, ‘भई चुनाव में में मत भूल जाना, हम तो तुम्हीं लोगों के भरोसे खड़े हुए हैं।’ गरीब के घर शादी हो तो वोट के एडवांस के तौर पर नेग का लिफाफा भी थमा देते हैं। कहीं-कहीं नेताओं के लाव-लश्कर के साथ पहुंचने से अजीबोगरीब हालात पैदा हो जाते हैं। कार्यक्रम एक तरफ रखे रह जाते हैं, पूरा आयोजन ही उनके जनसंपर्क का माध्यम बन जाता है।
हालत यह है कि विधानसभा चुनाव में उतरे ज्यादातर उम्मीदवारों ने 15 फरवरी तक होने वाले मांगलिक कार्यों का ब्योरा जुटा लिया है। कब किसके घर कितने बजे कार्यक्रम है, इसकी बाकायदा सूची बन गई है। कार्यकर्ताओं को हिदायत है कि उनकी जानकारी में कहीं कोई मांगलिक कार्यक्रम हो तो इसकी सूचना समय से नेता जी को दे दें ताकि वह उसमें शिरकत कर सकें। इसके चलते दिन में क्षेत्र में जनसंपर्क और रात को मांगलिक आयोजनों में शिरकत उम्मीदवारों की दिनचर्या बन गया है। अगर बिरादरी के किसी परिवार में आयोजन हो तो कोई रिश्तेदारी निकालने की कोशिश होती है। गैर बिरादरी के कार्यक्रमों में पुराने संबंध याद दिलाए जाते हैं। दिन के जनसंपर्क से ज्यादा रात को ऐसे कार्यक्रमों में भागेदारी वोट मिलने की ज्यादा पुख्ता गारंटी मानी जा रही है।
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नेताजी का ऐसे आना, ये तो झेल ही गए
निघासन विधानसभा क्षेत्र के गांव गौरिया के प्रधान प्रमोद कुमार के यहां दो फरवरी को बेटे का तिलक था। उन्होंने सिर्फ एक ही उम्मीदवार को न्योता दिया था लेकिन कार्यक्रम शुरू हुआ तो एक के बाद एक उम्मीदवारों की झड़ी लग गई। प्रमोद कुमार बताते हैं कि इतने नेताओं के आने की खुशी तो हुई लेकिन उनके स्वागत-सत्कार में ही उलझे रहे। घर के कार्यक्रम पर ध्यान नहीं दे पाए। इसी तरह 31 जनवरी को पलिया विधानसभा क्षेत्र में चंद्रिका पाल के बेटे की शादी में कई प्रत्याशी अपने लाव-लश्कर के साथ पहुंचे तो शादी से ज्यादा चुनावी जनसंपर्क का माहौल बन गया। इसी क्षेत्र में पप्पू सक्सेना की बेटी की शादी का कार्यक्रम भी उम्मीदवारों की मौजूदगी की वजह से चर्चा में बना रहा।
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मतदान तक मांगलिक कार्यो के खूब मुहूर्त
यह संयोग ही है कि विधानसभा चुनाव के दौरान मतदान के दिन तक मांगलिक कार्यों के शुभ मुहूर्त भी खूब हैं। प्रसिद्ध ज्योतिष शास्त्री पंडित रामदेव के मुताबिक पांच फरवरी से 15 फरवरी तक 5, 6, 7, 11, 12 और 13 फरवरी शादियों के लिए शुभ मुहूर्त हैं तो नौ और 15 फरवरी की तिथियां, मुंडन, 8, 12 और 13 फरवरी की तिथियां यज्ञोपवीत संस्कार के लिए शुभ हैं। हालांकि खुशी ही नहीं गम के मौके भी आजकल उम्मीदवारों की निगाह में हैं। आम दिनों में जो नेता आसानी से कहीं नजर आते, वे चुनाव के दिनों में शवयात्राओं के अलावा दसवां, तेरहवीं, शुद्धि हवन और पगड़ी जैसी रस्म में खूब दिखाई दे रहे हैं।