{"_id":"580f714c4f1c1b994fbc26ee","slug":"shops-these-days-seems-to-be-finally-getting","type":"story","status":"publish","title_hn":"आखिर कैसे इतने दिनों तक लगती रही दुकानें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आखिर कैसे इतने दिनों तक लगती रही दुकानें
अमर उजाला ब्यूरो पलियाकलां।
Updated Tue, 25 Oct 2016 11:30 PM IST
विज्ञापन
dudhwa
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्थानीय पार्क कर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध
समय-समय पर अतिक्रमण को मिला बढ़ावा
गौरीफंटा में जो हुआ उसके लिए स्थानीय पार्क कर्मी भी कम दोषी नहीं है। समय समय पर उनकी कार्यप्रणाली से अवैध अतिक्रमण को बढ़ावा मिला है। सवाल यह है कि जब सीमा पर उनकी तैनाती है तो फिर इतनी बड़ी तादाद में ये दुकानदार कैसे एकत्र हो गए। फड़ लगाते ही हटाया क्यों नहीं गया।
गौरीफंटा मंडी का एक बड़ा हिस्सा जब कई साल पहले सुप्रीमकोर्ट के आदेश पर हटाया गया तब चंद दुकानें ही रह गईं थीं। लेकिन बाद में वहां का स्वरूप बदलता गया। तमाम पक्के निर्माण हो चुुके हैं। फुटपाथ पर दुकानें लगाने वालों की तादाद दिन पर दिन बढ़ती गई। स्थानीय तौर पर पार्क की एक रेंज यहां स्थापित है और उसमें तैनात अधिकारी और कर्मी मंडी भी जाते हैं और अन्य निरीक्षण भी करते हैं। फिर ये स्थिति क्यों आई। आरोप है कि मंडी में फुटपाथ पर दुकानें लगाने वालों से एक-एक हजार रुपये रोज तक किराए के रूप में वसूले जाते हैं। कई बार कार्रवाई हुई और फिर फुटपाथ पर दुकानें सज गईं।
बाजार में अफरातफरी
गौरीफंटा (लखीमपुर खीरी)। गौरीफंटा मंडी में दिन में एक बजे बवाल के बाद चीख-पुकार मच गई । इस दौरान नेपाली ग्राहक खासी तादाद में थे, उनमें अफरा तफरी मच गई। लोग इधर उधर भागते नजर आए।
विज्ञापन
गौरीफंटा हो या फिर बनगवां यहां सभी दुकानें नेपाली ग्राहकों पर निर्भर हैं। लोगों का कहना है कि जब पार्क कर्मियों की टीम मंडी में कार्रवाई के लिए निकली तो उसके साथ पुलिस नहीं थी। माना जा रहा है कि पुलिस साथ होती तो यह घटना बच सकती थी। एसएसबी को भी साथ नहीं लिया गया।
चार को नामजद करते हुए कई लोगोें के खिलाफ तहरीर
इस मामले में पार्क कर्मियों की ओर से चार लोगों को नामजद करते हुए कई लोगों के खिलाफ तहरीर दी गई है। देरशाम तक मुकदमा नहीं लिखा गया था। उधर चर्चा है कि फुटपाथ पर दुकानें लगाने वाले भी पार्क कर्मियों के खिलाफ तहरीर देने की तैयारी में हैं।
हालात पर गौर किया जा रहा है जल्द ही प्रशासन से वार्ता कर इसका समाधान निकाला जाएगा कि अवैध अतिक्रमण न हो। इस मामले में स्थानीय रेंज कर्मियों की ओर से तहरीर पुलिस को दी गई है।
-महावीर कौजलगि, डिप्टी डायरेक्टर दुधवा नेशनल पार्क
विज्ञापन
समय-समय पर अतिक्रमण को मिला बढ़ावा
गौरीफंटा में जो हुआ उसके लिए स्थानीय पार्क कर्मी भी कम दोषी नहीं है। समय समय पर उनकी कार्यप्रणाली से अवैध अतिक्रमण को बढ़ावा मिला है। सवाल यह है कि जब सीमा पर उनकी तैनाती है तो फिर इतनी बड़ी तादाद में ये दुकानदार कैसे एकत्र हो गए। फड़ लगाते ही हटाया क्यों नहीं गया।
गौरीफंटा मंडी का एक बड़ा हिस्सा जब कई साल पहले सुप्रीमकोर्ट के आदेश पर हटाया गया तब चंद दुकानें ही रह गईं थीं। लेकिन बाद में वहां का स्वरूप बदलता गया। तमाम पक्के निर्माण हो चुुके हैं। फुटपाथ पर दुकानें लगाने वालों की तादाद दिन पर दिन बढ़ती गई। स्थानीय तौर पर पार्क की एक रेंज यहां स्थापित है और उसमें तैनात अधिकारी और कर्मी मंडी भी जाते हैं और अन्य निरीक्षण भी करते हैं। फिर ये स्थिति क्यों आई। आरोप है कि मंडी में फुटपाथ पर दुकानें लगाने वालों से एक-एक हजार रुपये रोज तक किराए के रूप में वसूले जाते हैं। कई बार कार्रवाई हुई और फिर फुटपाथ पर दुकानें सज गईं।
विज्ञापन
बाजार में अफरातफरी
गौरीफंटा (लखीमपुर खीरी)। गौरीफंटा मंडी में दिन में एक बजे बवाल के बाद चीख-पुकार मच गई । इस दौरान नेपाली ग्राहक खासी तादाद में थे, उनमें अफरा तफरी मच गई। लोग इधर उधर भागते नजर आए।
विज्ञापन
गौरीफंटा हो या फिर बनगवां यहां सभी दुकानें नेपाली ग्राहकों पर निर्भर हैं। लोगों का कहना है कि जब पार्क कर्मियों की टीम मंडी में कार्रवाई के लिए निकली तो उसके साथ पुलिस नहीं थी। माना जा रहा है कि पुलिस साथ होती तो यह घटना बच सकती थी। एसएसबी को भी साथ नहीं लिया गया।
चार को नामजद करते हुए कई लोगोें के खिलाफ तहरीर
इस मामले में पार्क कर्मियों की ओर से चार लोगों को नामजद करते हुए कई लोगों के खिलाफ तहरीर दी गई है। देरशाम तक मुकदमा नहीं लिखा गया था। उधर चर्चा है कि फुटपाथ पर दुकानें लगाने वाले भी पार्क कर्मियों के खिलाफ तहरीर देने की तैयारी में हैं।
हालात पर गौर किया जा रहा है जल्द ही प्रशासन से वार्ता कर इसका समाधान निकाला जाएगा कि अवैध अतिक्रमण न हो। इस मामले में स्थानीय रेंज कर्मियों की ओर से तहरीर पुलिस को दी गई है।
-महावीर कौजलगि, डिप्टी डायरेक्टर दुधवा नेशनल पार्क