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दुधवा में बारहसिंघा प्रजाति के हिरनों पर शुरू हुआ वैज्ञानिक शोध

Mon, 25 Apr 2022 11:52 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 25 Apr 2022 11:52 PM IST
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Scientific research started on deer of reindeer species in Dudhwa
दुधवा टाइगर रिजर्व में बारासिंघा हिरन का जोड़ा - फोटो : LAKHIMPUR
लखीमपुर खीरी। भारतीय वन्यजीव संस्थान ने दुधवा टाइगर रिजर्व में बड़ी संख्या में आबाद बारहसिंगा प्रजाति के हिरनों का वैज्ञानिक अध्ययन शुरू किया है। संस्थान की चार सदस्यीय एक टीम ने दुधवा आकर कुछ बारहसिंगा हिरनों के डीएनए सैंपल भी लिए। हालांकि टीम पर्याप्त सैंपल नहीं ले पाई। इसके चलते टीम को वापस जाना पड़ा।
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भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून से शोध कर्ताओं की चार सदस्यीय टीम डॉ. सोहनी शाह के नेतृत्व में एक सप्ताह पहले दुधवा टाइगर रिजर्व पहुंची थी। टीम ने दुधवा की पारिस्थितिकी और बारहसिंगा हिरनों के प्राकृतवास का अध्ययन करने के बाद मैदानी क्षेत्र में मिले बारहसिंगा हिरनों के गिरे हुए सींग से डीएनए सैंपल लिया। बारहसिंगा हिरन प्राय: दलदलीय और जलीय क्षेत्र में ज्यादा रहना पसंद करते हैं। इन जगहों पर इन दिनों पानी भरा होने के कारण वहां से सैंपल लेना संभव नहीं था। इसलिए टीम पांच दिन रुकने के बाद वापस चली गई। डीएनए सैंपलिंग के लिए अनुकूल समय आने पर टीम फिर आकर डीएनए सैंपल लेगी।
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दुधवा टाइगर रिजर्व शारदा नदी के कछार में स्थित है। यहां बड़ी संख्या में बारहसिंगा प्रजाति के हिरन पाए जाते हैं। दुधवा टाइगर रिजर्व की प्रमुख विशेषताओं मेें बारहसिंगा भी शामिल है। यह भी दुधवा टाइगर रिजर्व की विशिष्टता है कि यहां पांच प्रजातियों के हिरन बारहसिंगा, चीतल, पाढ़ा, सांभर, काकड़ एक साथ पाए जाते है। बारहसिंगा हिरन शारदा कछार के गंगा बेसिन में भी बड़ी संख्या में उपलब्ध हैं। भारतीय वन्य जीव संस्थान दोनों वासस्थलों पर पाए जाने वाले बारहसिंगा का डीएनए टेस्ट करके यह पता लगाएगा कि दोनों जगह पाए जाने वाले बारहसिंगा हिरनों का डीएनए समान है या भिन्न है। इसके लिए दानों वासस्थलों के बारहसिंगा हिरनों के डीएनए सैंपल लेकर उनका मिलान किया जाएगा और इसे वैज्ञानिक अध्ययन में शामिल किया जाएगा।
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अध्ययन से नस्ल सुधारने में मिलेगी मदद- बारहसिंगा हिरनों के डीएनए अध्ययन से बारहसिंगा प्रजाति के हिरनों की नस्ल सुधारने और उनका कुनबा बढ़ाने में मदद मिलेगी। दोनों जगहों के बारहसिंगा हिरनों के डीएनए में भिन्नता मिलने पर दोनों वासस्थलों के बारहसिंगा हिरनों में से कुछ को एक दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा। ताकि जो नई नस्ल तैयार हो, वह अधिक स्वस्थ होगी। इससे इनकी आबादी बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
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