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खीरीः नदियां निगल रहीं हरियाली, कटान की जद में जंगल
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धौरहरा क्षेत्र में जंगल का कटान करती शारदा।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अगस्त और सितंबर में घाघरा, शारदा और मोहाना नदियों में आई बाढ़ से नष्ट हो चुके हैं लगाए गए नए पौधे
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लखीमपुर खीरी। कुप्रबंधन की वजह से धरती को हरा भरा रखने में मदद करने वाली नदियां ही जिले में हरियाली को निगल रही हैं। वहीं अब शारदा, घाघरा और मोहाना नदियों के कटान से सैकड़ों पेड़ों के नदियों में समाने का खतरा पैदा हो गया है।
अगस्त और सितंबर में घाघरा, शारदा और मोहाना नदियों में आई बाढ़ से दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन के एक बड़े हिस्से में पानी भर गया था। यह पानी लंबे अरसे तक जंगल में भरा रहा, जिससे जंगल के सैकड़ों पेड़ तो सूखे ही ग्राउंड फ्लोरा पूरी तरह सड़कर बर्बाद हो चुका है। अब जलस्तर घटने के साथ ही नदियों ने कटान भी तेजी से शुरू कर दिया है। धौरहरा, उत्तर निघासन, दक्षिण निघासन, मझगईं और संपूर्णानगर रेंज के जंगल का बड़ा हिस्सा कटान की जद में आ गया है।
धौरहरा रेंज में करीब 7850 हेक्टेयर क्षेत्रफल मेें जंगल है। इसमें से अधिकांश जंगल नदी के किनारे हैं और छोटे छोटे टुकड़ों में है। नदियां हर साल कटान करते हुए अपना रास्ता बदल देती हैं। नदियों के बदले रुख के चलते घाघरा नदी गौढ़ी मिलिक, गनापुर, कैरातीपुरवा में अब तक 25 से 30 हेक्टेयर जंगल काट चुकी है, जबकि दक्षिण निघासन के ददरौल, सोनाकलां और अदलाबाद में शारदा नदी जंगल का कटान कर रही है। इसी तरह पलिया, मझगईं और संपूर्णानगर रेंज के टाटरगंज में शारदा नदी तो बेलापरसुआ में मोहाना नदी तेजी से जंगल को निगलती जा रही है। पलिया रेंज में कई जगह सुहेली नदी भी जंगल को नुकसान पहुंचा रही है।
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वन विभाग के जो जंगल कटान की जद में हैं, वह जंगल, शीशम, खैर और गुटैल के हैं। शीशम के पेड़ों का इमारती इस्तेमाल होने के कारण इसकी लकड़ी काफी कीमती मानी जाती है। वहीं खैर का व्यवसायिक उपयोग होने के कारण इसका अपना अलग महत्व है। नदियां केवल इस साल ही नहीं तकरीबन हर साल बाढ़ और कटान से वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचाती हैं। वन विभाग इस नुकसान की भरपाई पौधरोपण करके करता है, लेकिन बाढ़ कटान से यह पौधरोपण भी सुरक्षित नहीं है। शारदा और घाघरा नदियों की धारा बदलने से जंगल नदियों में समा रहे हैं।
अगस्त और सितंबर में घाघरा, शारदा और मोहाना नदियों में आई बाढ़ से दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन के एक बड़े हिस्से में पानी भर गया था। यह पानी लंबे अरसे तक जंगल में भरा रहा, जिससे जंगल के सैकड़ों पेड़ तो सूखे ही ग्राउंड फ्लोरा पूरी तरह सड़कर बर्बाद हो चुका है। अब जलस्तर घटने के साथ ही नदियों ने कटान भी तेजी से शुरू कर दिया है। धौरहरा, उत्तर निघासन, दक्षिण निघासन, मझगईं और संपूर्णानगर रेंज के जंगल का बड़ा हिस्सा कटान की जद में आ गया है।
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धौरहरा रेंज में करीब 7850 हेक्टेयर क्षेत्रफल मेें जंगल है। इसमें से अधिकांश जंगल नदी के किनारे हैं और छोटे छोटे टुकड़ों में है। नदियां हर साल कटान करते हुए अपना रास्ता बदल देती हैं। नदियों के बदले रुख के चलते घाघरा नदी गौढ़ी मिलिक, गनापुर, कैरातीपुरवा में अब तक 25 से 30 हेक्टेयर जंगल काट चुकी है, जबकि दक्षिण निघासन के ददरौल, सोनाकलां और अदलाबाद में शारदा नदी जंगल का कटान कर रही है। इसी तरह पलिया, मझगईं और संपूर्णानगर रेंज के टाटरगंज में शारदा नदी तो बेलापरसुआ में मोहाना नदी तेजी से जंगल को निगलती जा रही है। पलिया रेंज में कई जगह सुहेली नदी भी जंगल को नुकसान पहुंचा रही है।
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वन विभाग के जो जंगल कटान की जद में हैं, वह जंगल, शीशम, खैर और गुटैल के हैं। शीशम के पेड़ों का इमारती इस्तेमाल होने के कारण इसकी लकड़ी काफी कीमती मानी जाती है। वहीं खैर का व्यवसायिक उपयोग होने के कारण इसका अपना अलग महत्व है। नदियां केवल इस साल ही नहीं तकरीबन हर साल बाढ़ और कटान से वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचाती हैं। वन विभाग इस नुकसान की भरपाई पौधरोपण करके करता है, लेकिन बाढ़ कटान से यह पौधरोपण भी सुरक्षित नहीं है। शारदा और घाघरा नदियों की धारा बदलने से जंगल नदियों में समा रहे हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन के धौरहरा, दक्षिण निघासन, उत्तर निघासन, मझगईं, पलिया और संपूर्णानगर में शारदा, घाघरा और मोहाना नदियां कटान कर रही हैं। इस कटान में हरे भरे पेड़ नदी में समा रहे हैं। अब तक वन संपदा के हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। कटान रुकने के बाद ही नुकसान का सही अनुमान लगाया जा सकता है। - डॉ. अनिल पटेल, उपनिदेशक दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन