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‘साक्षर को राक्षस बनाती है संस्कार विहीन शिक्षा’
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Tue, 17 Jan 2017 10:52 PM IST
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गोष्ठी
- फोटो : अमर उजाला
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युवा चेतना पखवाड़ा के तहत डायट में हुई गोष्ठी
युवा चेतना पखवाड़े के तहत मंगलवार को डायट में एक गोष्ठी हुई, जिसकी अध्यक्षता प्राचार्य उमेश शुक्ला ने की। उन्होंने छात्रों को स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय बताया।
स्वामी विवेकानंद जयंती से युवा चेतना पखवाड़ा मनाया जा रहा है। पखवाड़े के तहत मंगलवार को राजापुर स्थित डायट में गोष्ठी हुई, जिसमें इतिहास संकलन विभाग के राजेश दीक्षित ने छात्रों को स्वामी विवेकानंद की शिक्षा और संस्कार संबंधी विचारों पर गहन चर्चा की। उन्होंने कहा कि युवाओं के चिंतन की दिशा ही देश की दशा और समाज की भावी अवस्था निर्धारित करती है। प्राचार्य ने कहा कि संस्कार विहीन शिक्षा साक्षर को राक्षस बना देती है और मूर्खों की मूर्खता से ज्यादा शिक्षित लोगों की स्वार्थपरता समाज के लिए घातक है। कहा कि हमारी शिक्षा स्वाति नक्षत्र की बूंद है और लोक कल्याण एवं लोक मंगल की दिव्य भावना उस सीप के समान है, जिसके समन्वय से हमारी प्रतिभा मोती का रूप धारण करती है। इस दौरान डायट के शिक्षक- शिक्षिकाएं और बीटीसी के छात्र मौजूद रहे।
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युवा चेतना पखवाड़े के तहत मंगलवार को डायट में एक गोष्ठी हुई, जिसकी अध्यक्षता प्राचार्य उमेश शुक्ला ने की। उन्होंने छात्रों को स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय बताया।
स्वामी विवेकानंद जयंती से युवा चेतना पखवाड़ा मनाया जा रहा है। पखवाड़े के तहत मंगलवार को राजापुर स्थित डायट में गोष्ठी हुई, जिसमें इतिहास संकलन विभाग के राजेश दीक्षित ने छात्रों को स्वामी विवेकानंद की शिक्षा और संस्कार संबंधी विचारों पर गहन चर्चा की। उन्होंने कहा कि युवाओं के चिंतन की दिशा ही देश की दशा और समाज की भावी अवस्था निर्धारित करती है। प्राचार्य ने कहा कि संस्कार विहीन शिक्षा साक्षर को राक्षस बना देती है और मूर्खों की मूर्खता से ज्यादा शिक्षित लोगों की स्वार्थपरता समाज के लिए घातक है। कहा कि हमारी शिक्षा स्वाति नक्षत्र की बूंद है और लोक कल्याण एवं लोक मंगल की दिव्य भावना उस सीप के समान है, जिसके समन्वय से हमारी प्रतिभा मोती का रूप धारण करती है। इस दौरान डायट के शिक्षक- शिक्षिकाएं और बीटीसी के छात्र मौजूद रहे।
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