{"_id":"b5616f1da3aa959e7159e12c8855ab7a","slug":"relyatri-fortnight-the-name-of-the-hotel-facade-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रेलयात्री पखवाड़ा, सुविधाओं के नाम पर छलावा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रेलयात्री पखवाड़ा, सुविधाओं के नाम पर छलावा
लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 30 May 2015 05:46 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रेलवे प्रशासन 26 मई से लेकर नौ जून के बीच रेलयात्री पखवाड़ा मना रहा है, लेकिन यह सिर्फ सुविधाओं के नाम पर छलावा मात्र ही है। लखीमपुर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को राहत मिलने की जगह उन्हें सिर्फ दिक्कतों का ही सामना करना पड़ रहा है। टिकट खरीदने से लेकर ट्रेन में बैठने तक यात्री परेशानी उठाते हैं। रेलवे अपने यात्रियों को न तो समय से टिकट दे पा रहा है और न ही भीषण गर्मी में उनके लिए ठंडे पानी की व्यवस्था ठीक से कर पा रहा है। स्वच्छता अभियान का असर रेलवे स्टेशन पर दिखाई नहीं दे रहा है। ट्रेनों की लेटलतीफी जैसी सूचनाएं भी बड़ी मुश्किल से ही यात्रियों को मिल पा रही हैं, क्योंकि यहां पूछताछ काउंटर कभी खुलता ही नहीं है। रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के बैठने की व्यवस्था नाकाफी है। बेंच और टिनशेड यात्रियों की क्षमता से काफी कम है। जिससे उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
सीनियर डीसीएम पूर्वोत्तर रेलवे, आशीष भाटिया ने बताया कि रेलयात्री पखवाड़ा के अंतर्गत विजिटर बुक के जरिए यात्रियों से उनकी समस्याएं और सुझाव मांगे जा रहे हैं। लखीमपुर में जो भी समस्याएं हैं, उनका निराकरण किया जाएगा। इसके लिए रेलवे प्रशासन तेजी से प्रयास कर रहा है। जल्द ही हम भी लखीमपुर खीरी का दौरा कर दिक्कतों को दूर कराएंगे।
टिकट के लिए लगानी पड़ती है लंबी लाइन
लखीमपुर स्टेशन पर सेंक्च्युरी एक्सप्रेस पकड़ने के लिए रोजाना सुबह पांच बजे से ही टिकट के लिए लोगों की लाइन लग जाती है। रोजाना यहां औसतन तीन से चार हजार टिकट बिकते हैं, लेकिन इन टिकटों को लेने के लिए यात्रियों को आधे-पौन घंटे तक लंबी लाइन लगानी पड़ रही। ट्रेन छूटने के बाद टिकट का निरस्तीकरण भी नहीं हो पाता है।
कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा रेलवे स्टेशन
रेलवे के पास कर्मचारियों की कमी हो गई है। खासकर छोटी लाइन के लखीमपुर रेलवे स्टेशन पर कर्मचारियों की काफी कमी है। चार टिकट कलेक्टरों के सापेक्ष लंबे समय तक एक ही टिकट कलेक्टर कार्य करता रहा, अभी हाल में दूसरा टिकट कलेक्टर तैनात हुआ है। बुकिंग में 12 कर्मचारी हैं, लेकिन दो-तीन कर्मचारियों के छुट्टी पर चले जाने के बाद टिकट वितरण का कार्य बुरी तरह प्रभावित होता है।
विज्ञापन
कैंटीन तक नहीं, खुले खाद्य पदार्थ खाने को मजबूर
लखीमपुर रेलवे स्टेशन पर कैंटीन बंद हुए चार साल से अधिक समय गुजर चुका है, लेकिन अब तक प्लेटफार्म पर यात्रियों के लिए कैंटीन नहीं खुल सकी है। मजबूरन यात्रियों को स्टेशन पर ठेलों पर बिक रहे खुले खाद्य पदार्थों को खाना पड़ रहा है। जिनकी क्वालिटी भी ठीक नहीं रहती।
चार दिनों में आई सौ से अधिक शिकायतें
लखीमपुर रेलवे स्टेशन पर रेलयात्री पखवाड़ा के तहत यात्रियों की समस्याएं और उनके सुझाव विजिटर बुक में दर्ज किए जा रहे हैं। इनमें मूलभूत सुविधाओं की शिकायतें सबसे ज्यादा हैं। मसलन स्टेशन पर ठंडा पानी नहीं मिलता। बैठने के लिए पर्याप्त बेंच नहीं है। ट्रेनों में लगे पंखे काफी धीमी गति से चलते हैं और प्रकाश की दिक्कत है। ऐशबाग से बरेली तक चलने वाली 52244 पैसेंजर ट्रेन और ऐशबाग से तिकुनियां तक चलने वाली 52240 पैसेंजर ट्रेन काफी देर से आती है। आरक्षण खिड़की पर पंखा नहीं लगा है। ट्रेनों में सुरक्षाकर्मी नहीं होते हैं। महिला डिब्बों में पुरुषों का कब्जा रहता है। प्लेटफार्म पर गंदगी की भरमार है।
विज्ञापन
सीनियर डीसीएम पूर्वोत्तर रेलवे, आशीष भाटिया ने बताया कि रेलयात्री पखवाड़ा के अंतर्गत विजिटर बुक के जरिए यात्रियों से उनकी समस्याएं और सुझाव मांगे जा रहे हैं। लखीमपुर में जो भी समस्याएं हैं, उनका निराकरण किया जाएगा। इसके लिए रेलवे प्रशासन तेजी से प्रयास कर रहा है। जल्द ही हम भी लखीमपुर खीरी का दौरा कर दिक्कतों को दूर कराएंगे।
टिकट के लिए लगानी पड़ती है लंबी लाइन
लखीमपुर स्टेशन पर सेंक्च्युरी एक्सप्रेस पकड़ने के लिए रोजाना सुबह पांच बजे से ही टिकट के लिए लोगों की लाइन लग जाती है। रोजाना यहां औसतन तीन से चार हजार टिकट बिकते हैं, लेकिन इन टिकटों को लेने के लिए यात्रियों को आधे-पौन घंटे तक लंबी लाइन लगानी पड़ रही। ट्रेन छूटने के बाद टिकट का निरस्तीकरण भी नहीं हो पाता है।
विज्ञापन
कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा रेलवे स्टेशन
रेलवे के पास कर्मचारियों की कमी हो गई है। खासकर छोटी लाइन के लखीमपुर रेलवे स्टेशन पर कर्मचारियों की काफी कमी है। चार टिकट कलेक्टरों के सापेक्ष लंबे समय तक एक ही टिकट कलेक्टर कार्य करता रहा, अभी हाल में दूसरा टिकट कलेक्टर तैनात हुआ है। बुकिंग में 12 कर्मचारी हैं, लेकिन दो-तीन कर्मचारियों के छुट्टी पर चले जाने के बाद टिकट वितरण का कार्य बुरी तरह प्रभावित होता है।
विज्ञापन
कैंटीन तक नहीं, खुले खाद्य पदार्थ खाने को मजबूर
लखीमपुर रेलवे स्टेशन पर कैंटीन बंद हुए चार साल से अधिक समय गुजर चुका है, लेकिन अब तक प्लेटफार्म पर यात्रियों के लिए कैंटीन नहीं खुल सकी है। मजबूरन यात्रियों को स्टेशन पर ठेलों पर बिक रहे खुले खाद्य पदार्थों को खाना पड़ रहा है। जिनकी क्वालिटी भी ठीक नहीं रहती।
चार दिनों में आई सौ से अधिक शिकायतें
लखीमपुर रेलवे स्टेशन पर रेलयात्री पखवाड़ा के तहत यात्रियों की समस्याएं और उनके सुझाव विजिटर बुक में दर्ज किए जा रहे हैं। इनमें मूलभूत सुविधाओं की शिकायतें सबसे ज्यादा हैं। मसलन स्टेशन पर ठंडा पानी नहीं मिलता। बैठने के लिए पर्याप्त बेंच नहीं है। ट्रेनों में लगे पंखे काफी धीमी गति से चलते हैं और प्रकाश की दिक्कत है। ऐशबाग से बरेली तक चलने वाली 52244 पैसेंजर ट्रेन और ऐशबाग से तिकुनियां तक चलने वाली 52240 पैसेंजर ट्रेन काफी देर से आती है। आरक्षण खिड़की पर पंखा नहीं लगा है। ट्रेनों में सुरक्षाकर्मी नहीं होते हैं। महिला डिब्बों में पुरुषों का कब्जा रहता है। प्लेटफार्म पर गंदगी की भरमार है।