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Lakhimpur Kheri News: महाराज लोने सिंह से जुड़ी दुर्लभ पांडुलिपियां की जाएंगी संरक्षित
Sat, 16 May 2026 01:11 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 16 May 2026 01:11 AM IST
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पर्यटन अधिकारी को पांडुलिपियां देते संस्था के कार्यकर्ता। स्रोत: संस्था
गोला गोकर्णनाथ। श्री गोकर्ण शोध, कला एवं संस्कृति संस्थान ने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में पहल करते हुए मितौलगढ़ के मितौली नरेश महाराज लोने सिंह अहबन से जुड़ी चार दुर्लभ पांडुलिपियां जिला पर्यटन विभाग को हस्तांतरित की हैं।
संस्थान के सचिव मिलिंद शुक्ला ने बताया कि संस्थान मंदिरों, मठों, आश्रमों, गुरुकुलों, संस्कृत पाठशालाओं, पुस्तकालयों, संग्रहालयों और निजी संस्थानों में संरक्षित प्राचीन पांडुलिपियों की पहचान और दस्तावेजीकरण का कार्य कर रहा है। इससे जिले की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ डिजिटलीकरण में भी मदद मिलेगी।
दुर्लभ पांडुलिपियों का हस्तांतरण जिला पर्यटन अधिकारी संजय भंडारी को संस्थान के अध्यक्ष विनायक श्रीवास्तव, सचिव मिलिंद शुक्ला, निदेशक विक्रांत सिंह परमार और प्रबंध निदेशक कमलनयन शुक्ल की मौजूदगी में किया गया।
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संस्थान के प्रबंध निदेशक ने बताया कि हस्तांतरित पांडुलिपियों में अध्यात्म रामायण और श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध का क्षेत्रीय भाषा में अनुवाद शामिल है। दो अन्य पांडुलिपियां खगोल और पारंपरिक ज्ञान से संबंधित हैं, जिनका अध्ययन किया जाना बाकी है।
उन्होंने बताया कि ये पांडुलिपियां महाराज लोने सिंह के वर्तमान राजपुरोहित वंशज रामशंकर दीक्षित से प्राप्त हुई हैं। संरक्षण, शोध और दस्तावेजीकरण को ध्यान में रखते हुए इन्हें शासन को सौंपा गया है।
मितौली नरेश महाराज लोने सिंह अहबन ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
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संस्थान के सचिव मिलिंद शुक्ला ने बताया कि संस्थान मंदिरों, मठों, आश्रमों, गुरुकुलों, संस्कृत पाठशालाओं, पुस्तकालयों, संग्रहालयों और निजी संस्थानों में संरक्षित प्राचीन पांडुलिपियों की पहचान और दस्तावेजीकरण का कार्य कर रहा है। इससे जिले की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ डिजिटलीकरण में भी मदद मिलेगी।
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दुर्लभ पांडुलिपियों का हस्तांतरण जिला पर्यटन अधिकारी संजय भंडारी को संस्थान के अध्यक्ष विनायक श्रीवास्तव, सचिव मिलिंद शुक्ला, निदेशक विक्रांत सिंह परमार और प्रबंध निदेशक कमलनयन शुक्ल की मौजूदगी में किया गया।
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संस्थान के प्रबंध निदेशक ने बताया कि हस्तांतरित पांडुलिपियों में अध्यात्म रामायण और श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध का क्षेत्रीय भाषा में अनुवाद शामिल है। दो अन्य पांडुलिपियां खगोल और पारंपरिक ज्ञान से संबंधित हैं, जिनका अध्ययन किया जाना बाकी है।
उन्होंने बताया कि ये पांडुलिपियां महाराज लोने सिंह के वर्तमान राजपुरोहित वंशज रामशंकर दीक्षित से प्राप्त हुई हैं। संरक्षण, शोध और दस्तावेजीकरण को ध्यान में रखते हुए इन्हें शासन को सौंपा गया है।
मितौली नरेश महाराज लोने सिंह अहबन ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।