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Lakhimpur Kheri News: राजा बने राम, अयोध्या सा सजा गोला गोकर्णनाथ
Fri, 23 Oct 2026 11:49 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Fri, 23 Oct 2026 11:49 PM IST
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गोला में श्री राम राजगद्दी कार्यक्रम में झांकी का पूजन करते श्रद्धालु। संवाद
गोला गोकर्णनाथ। श्रीरामलीला के समापन पर बृहस्पतिवार रात गोला में अयोध्या जैसा नजारा दिखा। मोहम्मदी मार्ग विद्युत झालरों से जगमगा उठा। भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक और राजगद्दी उत्सव में श्रद्धालु उमड़े। जयकारों से मार्ग गूंज उठा।
खुटार मार्ग के पास स्थित प्राचीन श्रीरामलीला मंदिर से श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और सीता जी के स्वरूप रथ पर सवार होकर निकले। रथ के आगे हनुमान जी के स्वरूप चल रहे थे। सदर चौराहे पर आरती उतारकर उनका स्वागत किया गया। इसके बाद रथ मोहम्मदी मार्ग पहुंचा, जहां श्रद्धालुओं ने खड़ाऊ पूजन किया।
मंच पर भरत, शत्रुघ्न और तीनों माताओं ने श्रीराम, लक्ष्मण और सीता का स्वागत किया। श्रीरामलीला समिति के पदाधिकारियों और नगरवासियों ने आरती उतारी। इसके बाद श्रीराम और सीता को वल्कल वस्त्रों के स्थान पर राजसी वस्त्र धारण कराए गए। वेद मंत्रोच्चार के बीच दोनों को राजगद्दी पर विराजमान कराकर राज्याभिषेक किया गया।
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राज्याभिषेक कराने वाले सुशील चंद्र गुप्ता और उनके भाई सतीश चंद्र गुप्ता ने परिवार सहित भगवान श्रीराम और माता सीता को मालाएं पहनाईं, तिलक लगाया और आरती की। राजगद्दी उत्सव के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए।
इस मौके पर जनार्दन गिरि, नगर पालिका अध्यक्ष विजय शुक्ला रिंकू, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष मीनाक्षी अग्रवाल, पंकज गुप्ता, राजेश आनंद मिन्नी, आनंद सोनी और राकेश तिवारी मौजूद रहे।
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हनुमान ने जलाई सोने की लंका, रामलीला में हुआ मंचन
मोहम्मदी। मेला श्रीरामलीला मैदान में सीता खोज और लंका दहन की लीला का मंचन किया गया। राम-सुग्रीव मित्रता के बाद बालि वध दिखाया गया। इसके बाद हनुमान सीता की खोज में समुद्र पार कर लंका पहुंचे। वहां उनकी भेंट त्रिजटा से हुई। लंका में प्रवेश के बाद हनुमान विभीषण के घर पहुंचे, जहां ‘श्रीराम’ लिखा था। अशोक वाटिका में सीता से भेंट के बाद उनकी आज्ञा से हनुमान ने फल खाए। इस दौरान राक्षसों से युद्ध हुआ। हनुमान को ब्रह्म शक्ति से बांधकर रावण के दरबार में लाया गया। पूंछ में आग लगाए जाने पर हनुमान ने पूरी लंका जला दी। संवाद
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खुटार मार्ग के पास स्थित प्राचीन श्रीरामलीला मंदिर से श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और सीता जी के स्वरूप रथ पर सवार होकर निकले। रथ के आगे हनुमान जी के स्वरूप चल रहे थे। सदर चौराहे पर आरती उतारकर उनका स्वागत किया गया। इसके बाद रथ मोहम्मदी मार्ग पहुंचा, जहां श्रद्धालुओं ने खड़ाऊ पूजन किया।
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मंच पर भरत, शत्रुघ्न और तीनों माताओं ने श्रीराम, लक्ष्मण और सीता का स्वागत किया। श्रीरामलीला समिति के पदाधिकारियों और नगरवासियों ने आरती उतारी। इसके बाद श्रीराम और सीता को वल्कल वस्त्रों के स्थान पर राजसी वस्त्र धारण कराए गए। वेद मंत्रोच्चार के बीच दोनों को राजगद्दी पर विराजमान कराकर राज्याभिषेक किया गया।
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राज्याभिषेक कराने वाले सुशील चंद्र गुप्ता और उनके भाई सतीश चंद्र गुप्ता ने परिवार सहित भगवान श्रीराम और माता सीता को मालाएं पहनाईं, तिलक लगाया और आरती की। राजगद्दी उत्सव के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए।
इस मौके पर जनार्दन गिरि, नगर पालिका अध्यक्ष विजय शुक्ला रिंकू, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष मीनाक्षी अग्रवाल, पंकज गुप्ता, राजेश आनंद मिन्नी, आनंद सोनी और राकेश तिवारी मौजूद रहे।
हनुमान ने जलाई सोने की लंका, रामलीला में हुआ मंचन
मोहम्मदी। मेला श्रीरामलीला मैदान में सीता खोज और लंका दहन की लीला का मंचन किया गया। राम-सुग्रीव मित्रता के बाद बालि वध दिखाया गया। इसके बाद हनुमान सीता की खोज में समुद्र पार कर लंका पहुंचे। वहां उनकी भेंट त्रिजटा से हुई। लंका में प्रवेश के बाद हनुमान विभीषण के घर पहुंचे, जहां ‘श्रीराम’ लिखा था। अशोक वाटिका में सीता से भेंट के बाद उनकी आज्ञा से हनुमान ने फल खाए। इस दौरान राक्षसों से युद्ध हुआ। हनुमान को ब्रह्म शक्ति से बांधकर रावण के दरबार में लाया गया। पूंछ में आग लगाए जाने पर हनुमान ने पूरी लंका जला दी। संवाद

गोला में श्री राम राजगद्दी कार्यक्रम में झांकी का पूजन करते श्रद्धालु। संवाद