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Lakhimpur Kheri News: 11,780 करोड़ की परियोजनाएं, समयसीमा बीतने के बाद 36 अब भी अधूरी
Tue, 15 Sep 2026 11:39 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Tue, 15 Sep 2026 11:39 PM IST
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शहर स्थित मेडिकल कॉलेज भवन। संवाद
लखीमपुर खीरी। जिले में 11,780.27 करोड़ रुपये की लागत वाली 1,755 निर्माण परियोजनाओं में 36 कार्य तय समय सीमा बीतने के बाद भी अधूरे हैं। 603 कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि 1,116 अभी निर्माणाधीन हैं और इनकी समय सीमा बाकी है।
परियोजनाओं के लिए 6,870.78 करोड़ रुपये जारी हो चुके हैं, जिसमें से 6,343.88 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद 36 परियोजनाओं का समय पर पूरा न होना संबंधित कार्यदायी संस्थाओं और विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
कहीं बजट की कमी तो कहीं काम में अवरोध और लापरवाही से विकास कार्यों की रफ्तार धीमी है। बजट की वजह से देरी वाली परियोजनाओं की समय सीमा बढ़ाई गई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 920 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इन्हें मार्च, 2026 तक पूरा किया जाना था, लेकिन पर्याप्त बजट न मिलने से समय सीमा बढ़ाकर 2028 कर दी गई है। इनमें 171 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और 749 निर्माणाधीन हैं। इन परियोजनाओं के लिए 1,638 करोड़ रुपये मिले हैं, जिसमें से 1,611 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।
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69 करोड़ का शिव मंदिर कॉरिडोर छह माह बाद भी पूरा नहीं
गोला शिव मंदिर कॉरिडोर को वर्ष 2022 में मंजूरी मिली थी। वर्ष 2024 में निर्माण शुरू हुआ। 69.15 करोड़ रुपये की लागत वाले इस कॉरिडोर को मार्च, 2026 तक पूरा किया जाना था, लेकिन छह माह बाद भी काम पूरा नहीं हुआ है। विभाग के अनुसार, 75 से 80 प्रतिशत निर्माण पूरा हो चुका है और फिनिशिंग का काम चल रहा है।
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406 करोड़ की योजनाओं में 15 कार्यों की समयसीमा पार
ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की 406.26 करोड़ रुपये की 133 परियोजनाओं में 25 पूरी हो चुकी हैं, जबकि 93 निर्माणाधीन हैं। 15 परियोजनाएं तय समय सीमा के बाद भी अधूरी हैं। इन परियोजनाओं के लिए 168.99 करोड़ रुपये मिले हैं और 168.63 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इनमें खेल परिसर और भवन निर्माण समेत अन्य कार्य शामिल हैं।
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19.5 करोड़ का 12 मंजिला ट्रांजिट हॉस्टल दो साल बाद भी नहीं बना
पुलिस लाइन में 19.5 करोड़ रुपये की लागत से 12 मंजिला आवासीय भवन बनाया जा रहा है। इसमें पुलिसकर्मियों के लिए 96 फ्लैट वाले दो भवन हैं। फरवरी, 2023 तक काम पूरा होना था। बाद में समय सीमा बढ़ाकर जून, 2024 की गई, लेकिन सितंबर, 2026 तक भी निर्माण पूरा नहीं हुआ है। इससे पुलिसकर्मियों को आवास मिलने में देरी हो रही है। विभाग का कहना है कि काम पूरा करने के लिए और समय लग सकता है।
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जिले में यह काम भी होने बाकी
जिले में सात कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों का निर्माण कराया जा रहा है। इनमें चार अधूरे हैं। गोला-मोहम्मदी बाइपास पर ओवरब्रिज को करीब डेढ़ वर्ष पहले मंजूरी मिली थी। बजट में देरी के कारण काम शुरू नहीं हो सका। अब निर्माण शुरू हुआ है। लालपुर में 14 करोड़ रुपये से स्टेडियम का उच्चीकरण कराया जा रहा है, लेकिन काम अधूरा है। राजकीय इंटर कॉलेज मैदान, लखीमपुर में चार करोड़ रुपये की लागत से इनडोर स्टेडियम का निर्माण भी चल रहा है। इसका करीब 25 प्रतिशत काम ही पूरा हुआ है।
एलआरपी चौराहा से इंदिरा गांधी मनोरंजन पार्क तक 10 किलोमीटर सड़क के चौड़ीकरण के लिए करीब 33 करोड़ रुपये का बजट है। बिजली शिफ्टिंग में देरी के कारण काम अटका है। लखीमपुर डिपो के नए भवन का निर्माण करीब 2.75 करोड़ रुपये की लागत से कराया जा रहा है। इसका काम भी बेहद धीमी गति से चल रहा है।
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परियोजनाओं के लिए 6,870.78 करोड़ रुपये जारी हो चुके हैं, जिसमें से 6,343.88 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद 36 परियोजनाओं का समय पर पूरा न होना संबंधित कार्यदायी संस्थाओं और विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
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कहीं बजट की कमी तो कहीं काम में अवरोध और लापरवाही से विकास कार्यों की रफ्तार धीमी है। बजट की वजह से देरी वाली परियोजनाओं की समय सीमा बढ़ाई गई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 920 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इन्हें मार्च, 2026 तक पूरा किया जाना था, लेकिन पर्याप्त बजट न मिलने से समय सीमा बढ़ाकर 2028 कर दी गई है। इनमें 171 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और 749 निर्माणाधीन हैं। इन परियोजनाओं के लिए 1,638 करोड़ रुपये मिले हैं, जिसमें से 1,611 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।
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69 करोड़ का शिव मंदिर कॉरिडोर छह माह बाद भी पूरा नहीं
गोला शिव मंदिर कॉरिडोर को वर्ष 2022 में मंजूरी मिली थी। वर्ष 2024 में निर्माण शुरू हुआ। 69.15 करोड़ रुपये की लागत वाले इस कॉरिडोर को मार्च, 2026 तक पूरा किया जाना था, लेकिन छह माह बाद भी काम पूरा नहीं हुआ है। विभाग के अनुसार, 75 से 80 प्रतिशत निर्माण पूरा हो चुका है और फिनिशिंग का काम चल रहा है।
406 करोड़ की योजनाओं में 15 कार्यों की समयसीमा पार
ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की 406.26 करोड़ रुपये की 133 परियोजनाओं में 25 पूरी हो चुकी हैं, जबकि 93 निर्माणाधीन हैं। 15 परियोजनाएं तय समय सीमा के बाद भी अधूरी हैं। इन परियोजनाओं के लिए 168.99 करोड़ रुपये मिले हैं और 168.63 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इनमें खेल परिसर और भवन निर्माण समेत अन्य कार्य शामिल हैं।
19.5 करोड़ का 12 मंजिला ट्रांजिट हॉस्टल दो साल बाद भी नहीं बना
पुलिस लाइन में 19.5 करोड़ रुपये की लागत से 12 मंजिला आवासीय भवन बनाया जा रहा है। इसमें पुलिसकर्मियों के लिए 96 फ्लैट वाले दो भवन हैं। फरवरी, 2023 तक काम पूरा होना था। बाद में समय सीमा बढ़ाकर जून, 2024 की गई, लेकिन सितंबर, 2026 तक भी निर्माण पूरा नहीं हुआ है। इससे पुलिसकर्मियों को आवास मिलने में देरी हो रही है। विभाग का कहना है कि काम पूरा करने के लिए और समय लग सकता है।
जिले में यह काम भी होने बाकी
जिले में सात कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों का निर्माण कराया जा रहा है। इनमें चार अधूरे हैं। गोला-मोहम्मदी बाइपास पर ओवरब्रिज को करीब डेढ़ वर्ष पहले मंजूरी मिली थी। बजट में देरी के कारण काम शुरू नहीं हो सका। अब निर्माण शुरू हुआ है। लालपुर में 14 करोड़ रुपये से स्टेडियम का उच्चीकरण कराया जा रहा है, लेकिन काम अधूरा है। राजकीय इंटर कॉलेज मैदान, लखीमपुर में चार करोड़ रुपये की लागत से इनडोर स्टेडियम का निर्माण भी चल रहा है। इसका करीब 25 प्रतिशत काम ही पूरा हुआ है।
एलआरपी चौराहा से इंदिरा गांधी मनोरंजन पार्क तक 10 किलोमीटर सड़क के चौड़ीकरण के लिए करीब 33 करोड़ रुपये का बजट है। बिजली शिफ्टिंग में देरी के कारण काम अटका है। लखीमपुर डिपो के नए भवन का निर्माण करीब 2.75 करोड़ रुपये की लागत से कराया जा रहा है। इसका काम भी बेहद धीमी गति से चल रहा है।

शहर स्थित मेडिकल कॉलेज भवन। संवाद