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Lakhimpur Kheri News: मौसमी सब्जियों के उत्पादन से आत्मनिर्भर बन रहे कैदी
Thu, 12 Feb 2026 11:11 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 12 Feb 2026 11:11 PM IST
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जिला कारागार में सब्जियों की देखरेख करते बंदी। स्रोत : जिला कारागार प्रशासन
अंकुर श्रीवास्तव
लखीमपुर खीरी। करीब ढाई एकड़ की जमीन पर मौसमी सब्जियों का उत्पादन करके जिला जेल के कैदी आत्मनिर्भर हो रहे हैं। सब्जियों की देखरेख के लिए कुछ बंदियों को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। बंदी मेहनत कर मौसमी सब्जियां उगा रहे हैं। सब्जियों की पैदावार होने से बंदियों को खाने में ताजी और अच्छी सब्जियां मिल रही हैं।
लखीमपुर की जिला जेल 12.14 एकड़ में फैली हुई है। यहां पर 30 बैरकें बंदियों के लिए हैं। बंदी और कैदियों के लिए हरी सब्जियां खाने में मिले इसको लेकर ढाई एकड़ जमीन पर खेती की जा रही है। बंदी इसी भूमि पर पसंदीदा मौसमी सब्जियां उगा रहे हैं। बंदी सब्जियों की देखरेख और फसल पर मेहनत करके दैनिक कमाई भी कर रहे हैं।
खेती के कार्य में लगे बंदियों को दिया जाता है मेहनताना
जेल अधीक्षक पीडी सलौनिया ने बताया कि जेल के करीब 150 बंदी सब्जी उत्पादन के अलावा अन्य विभिन्न तरह के कार्यों में अपनी रुचि ले रहे हैं। इसके बदले उन्हें पारिश्रमिक भी दिया जाता है। वहीं सब्जी उत्पादन के काम में 50 से 60 बंदी लगाए गए हैं, जो बोआई से लेकर निराई गुड़ाई और देखभाल करते हैं। जेल के बंदी मूली, पालक, फूलगोभी, पत्तागोभी, टमाटर, धनिया आदि की फसल तैयार करते हैं। कहा कि कुशल श्रमिक को 81, अर्धकुशल को 60 व अन्य को 50 रुपये प्रतिदिन मजदूरी मिलती है।
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आलू उत्पादन में अभी भी सीतापुर जेल पर निर्भर है खीरी जेल
शासन से ओर से सीतापुर जेल में लखीमपुर जिले के नाम तीन एकड़ जमीन रिजर्व है, इसपर आलू का उत्पादन किया जाता है। बजिला कारागार खीरी में जगह की कमी के चलते आलू की फसल तैयार नहीं हो पा रही है। इसके चलते पड़ोसी जिला सीतापुर की जिला कारागार प्रशासन की मदद ली जा रही है। जेल प्रशासन के मुताबिक गत वर्ष करीब 240 क्विंटल आलू पैदा हुआ था, जिसे कोल्ड स्टोरेज में रखवाया गया था, इससे पूरे साल आलू वहीं से आता रहा।
जिला कारागार में निरुद्ध कैदी-बंदी
महिला बंदी-34
पुरुष बंदी-793
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लखीमपुर खीरी। करीब ढाई एकड़ की जमीन पर मौसमी सब्जियों का उत्पादन करके जिला जेल के कैदी आत्मनिर्भर हो रहे हैं। सब्जियों की देखरेख के लिए कुछ बंदियों को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। बंदी मेहनत कर मौसमी सब्जियां उगा रहे हैं। सब्जियों की पैदावार होने से बंदियों को खाने में ताजी और अच्छी सब्जियां मिल रही हैं।
लखीमपुर की जिला जेल 12.14 एकड़ में फैली हुई है। यहां पर 30 बैरकें बंदियों के लिए हैं। बंदी और कैदियों के लिए हरी सब्जियां खाने में मिले इसको लेकर ढाई एकड़ जमीन पर खेती की जा रही है। बंदी इसी भूमि पर पसंदीदा मौसमी सब्जियां उगा रहे हैं। बंदी सब्जियों की देखरेख और फसल पर मेहनत करके दैनिक कमाई भी कर रहे हैं।
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खेती के कार्य में लगे बंदियों को दिया जाता है मेहनताना
जेल अधीक्षक पीडी सलौनिया ने बताया कि जेल के करीब 150 बंदी सब्जी उत्पादन के अलावा अन्य विभिन्न तरह के कार्यों में अपनी रुचि ले रहे हैं। इसके बदले उन्हें पारिश्रमिक भी दिया जाता है। वहीं सब्जी उत्पादन के काम में 50 से 60 बंदी लगाए गए हैं, जो बोआई से लेकर निराई गुड़ाई और देखभाल करते हैं। जेल के बंदी मूली, पालक, फूलगोभी, पत्तागोभी, टमाटर, धनिया आदि की फसल तैयार करते हैं। कहा कि कुशल श्रमिक को 81, अर्धकुशल को 60 व अन्य को 50 रुपये प्रतिदिन मजदूरी मिलती है।
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आलू उत्पादन में अभी भी सीतापुर जेल पर निर्भर है खीरी जेल
शासन से ओर से सीतापुर जेल में लखीमपुर जिले के नाम तीन एकड़ जमीन रिजर्व है, इसपर आलू का उत्पादन किया जाता है। बजिला कारागार खीरी में जगह की कमी के चलते आलू की फसल तैयार नहीं हो पा रही है। इसके चलते पड़ोसी जिला सीतापुर की जिला कारागार प्रशासन की मदद ली जा रही है। जेल प्रशासन के मुताबिक गत वर्ष करीब 240 क्विंटल आलू पैदा हुआ था, जिसे कोल्ड स्टोरेज में रखवाया गया था, इससे पूरे साल आलू वहीं से आता रहा।
जिला कारागार में निरुद्ध कैदी-बंदी
महिला बंदी-34
पुरुष बंदी-793