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Lakhimpur Kheri News: 154 घंटे 16 मिनट 33 सेकंड पर ठहरा छोटी काशी का काव्य कुंभ
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शांभवी को विश्व रिकॉर्ड का प्रमाण पत्र देते द बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड के जज समीर सिंह। संवाद
गोला गोकर्णनाथ। कपिलश फाउंडेशन के बैनर तले चल रहा छोटी काशी काव्य कुंभ विश्व रिकॉर्ड बनाकर मंगलवार की रात 10:00 बजे संपन्न गया। कवियों और आयोजकों ने विश्व रिकॉर्ड बनने पर खुशी जताई।
छोटी काशी में एक अक्टूबर की रात 10:00 बजे तक लगातार 154 घंटे 16 मिनट 33 सेकेंड तक चलने वाले सबसे लंबे कवि सम्मेलन और मुशायरे के विश्व कीर्तिमान ने 2021 में बनाए गए लगभग 128 घंटों के अपने ही विश्व रिकॉर्ड को तोड़ दिया। इस कवि सम्मेलन में देश भर के 14 राज्यों के 678 कवि, कवयित्रियों ने प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम में कुलपति अरुणेश मिश्र, कार्यक्रम संरक्षक विनय तिवारी, विजय शुक्ल रिंकू, आनंद त्रिवेदी, प्रह्लाद पटेल, ज्ञान स्वरूप शुक्ल, डॉ. वीबी धुरिया, नानक चंद वर्मा, कार्यक्रम संयोजक यतीश चंद्र शुक्ल, श्रीकांत तिवारी कांत आदि ने व्यवस्थाएं संभालीं।
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इन नियमों का पालन करते हुए बना रिकॉर्ड
द गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और द बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ऑनलाइन माध्यम से निगरानी करते रहे। अंतिम दिन निर्णायकों ने प्रमाणपत्र दिए। नियमानुसार प्रत्येक कवि को काव्य पाठ के लिए न्यूनतम पांच मिनट और अधिकतम 20 मिनट का समय दिया गया। प्रत्येक पाली में दो संचालक नियुक्त हुए। जिन्होंने नियमों के अंदर रहते हुए कवियों से काव्य पाठ कराया।
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शांभवी बनीं सबसे कम उम्र की कवयित्री
नोएडा के जीडी गोयनका स्कूल की कक्षा सात की ग्यारह वर्षीय छात्रा शांभवी ने इस विश्व रिकॉर्ड आयोजन में अपनी तीन कविताओं का पाठ किया। शांभवी ने शिक्षकों और चिड़िया पर कविताएं सुनाईं, जिन्हें श्रोताओं की खूब प्रशंसा मिली।
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छोटी काशी में एक अक्टूबर की रात 10:00 बजे तक लगातार 154 घंटे 16 मिनट 33 सेकेंड तक चलने वाले सबसे लंबे कवि सम्मेलन और मुशायरे के विश्व कीर्तिमान ने 2021 में बनाए गए लगभग 128 घंटों के अपने ही विश्व रिकॉर्ड को तोड़ दिया। इस कवि सम्मेलन में देश भर के 14 राज्यों के 678 कवि, कवयित्रियों ने प्रतिभाग किया।
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कार्यक्रम में कुलपति अरुणेश मिश्र, कार्यक्रम संरक्षक विनय तिवारी, विजय शुक्ल रिंकू, आनंद त्रिवेदी, प्रह्लाद पटेल, ज्ञान स्वरूप शुक्ल, डॉ. वीबी धुरिया, नानक चंद वर्मा, कार्यक्रम संयोजक यतीश चंद्र शुक्ल, श्रीकांत तिवारी कांत आदि ने व्यवस्थाएं संभालीं।
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इन नियमों का पालन करते हुए बना रिकॉर्ड
द गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और द बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ऑनलाइन माध्यम से निगरानी करते रहे। अंतिम दिन निर्णायकों ने प्रमाणपत्र दिए। नियमानुसार प्रत्येक कवि को काव्य पाठ के लिए न्यूनतम पांच मिनट और अधिकतम 20 मिनट का समय दिया गया। प्रत्येक पाली में दो संचालक नियुक्त हुए। जिन्होंने नियमों के अंदर रहते हुए कवियों से काव्य पाठ कराया।
शांभवी बनीं सबसे कम उम्र की कवयित्री
नोएडा के जीडी गोयनका स्कूल की कक्षा सात की ग्यारह वर्षीय छात्रा शांभवी ने इस विश्व रिकॉर्ड आयोजन में अपनी तीन कविताओं का पाठ किया। शांभवी ने शिक्षकों और चिड़िया पर कविताएं सुनाईं, जिन्हें श्रोताओं की खूब प्रशंसा मिली।