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ना ली डीएम से अनुमति, ना कराया टेंडर, लगा लिया वाहन
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Fri, 16 Jun 2017 11:39 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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डैम ने डीपीएम के भ्रष्टाचार की सीएमओ से की शिकायत
डीपीएम पर अनुबंध मूल्य से ज्यादा बिल देने करने का आरोप
जिला लेखा प्रबंधक ने डीएम की अनुमति और टेंडर प्रक्रिया अपनाए बगैर डीपीएम यू कार्यालय से वाहन का अनुबंध करने एवं वाहन किराया भुगतान के लिए अनुबंध मूल्य से ज्यादा के बिल पेश करने का आरोप जिला कार्यक्रम प्रबंधक पर लगाया है और इसकी शिकायत विभागीय अधिकारियों सहित डीएम से की है। हालांकि सीएमओ इसे दोनों का आपसी विवाद बता रहे हैं।
डैम (जिला लेखा प्रबंधक) सतपाल सिंह ने शिकायती में पत्र लिखा है कि डीपीएम यू कार्यालय में जिस वाहन को लगाया गया है, उसके अनुबंध की अनुमति ना तो डीएम से ली गई और न ही कोई टेंडर प्रक्रिया कराई गई। जबकि वाहन का अनुबंध डीएम की अनुमति के बाद टेंडर प्रक्रिया से होना चाहिए था। आरोप है कि डीपीएम (जिला कार्यक्रम प्रबंधक) मनीष बिसारिया ने मनमानी करके एक तो वाहन का अनुबंध कर लिया और अब भुगतान के लिए अनुबंध मूल्य से ज्यादा के बिल पेश कर रहे हैं। डैम ने डीपीएम द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार की शिकायत वाहन बिल और लॉग बुक के साथ अधिकारियों से की है। वहीं डीपीएम मनीष बिसारिया ने इस मामले में बोलने से इंकार करते हुए कहा कि कोई मामला नहीं हैं और सारे आरोप गलत हैं।
सात सौ किलोमीटर ज्यादा का पेश किया बिल
डैम ने बताया कि डीपीएम ने अप्रैल माह को जो बिल पेश किया है वह 2240 किलोमीटर का है जबकि वाहन मात्र 1562 किलोमीटर ही चला है। इसी प्रकार दिसंबर 2016 का बिल 2233 किलोमीटर का पेश किया गया है जबकि वाहन सिर्फ 2061 किलोमीटर ही चला था।
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कुछ दिन के लिए आना बताकर कर लिया गाड़ी का अनुबंध
डैम ने बताया कि डीपीएम ने डीएचएस और टेंडर प्रक्रिया के बगैर वाहन संख्या यूपी 31टी 6247 की जगह यूपी 31 टी 6850 को लगा लिया और जब उनसे इस संबंध में पूछा तो डीपीएम ने कहा कि गाड़ी कुछ दिनों के लिए आई है, फिर चेंज हो जाएगी।
एसीएमओ ने जांच करने से किया मना
सीएमओ ने शिकायत को संज्ञान में लेते हुए इसकी जांच के लिए एसीएमओ एनएचएच डॉ. मातादीन को सौंपी है, लेकिन उनका कहना है कि मामला लेखा है इसलिए वह इसकी जांच करने में असमर्थ हैं। एसीएमओ का कहना है कि जांच ना करने के बारे में सीएमओ को भी बता दिया है।
दिशा निर्देशों को ताक पर रखकर डीपीएम कार्य कर रहे हैं, वाहन कम चलते हैं और बिल ज्यादा के बनाकर पेश करते हैं। भुगतान ना करने पर मुख्यमंत्री से शिकायत कराने की धमकी देते हैं।
सतपाल सिंह, जिला लेखा प्रबंधक
भ्रष्टाचार का कोई मामला नहीं है, डैम और डीपीएम आपस झगड़ रहे हैं और एक दूसरे के खिलाफ शिकायत कर रहें हैं। हालांकि दोनों के शिकायती पत्रों की जांच एसीएमओ एनएचएम को सौंपी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई होगी।
डॉ.जावेद अहमद, सीएमओ
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डीपीएम पर अनुबंध मूल्य से ज्यादा बिल देने करने का आरोप
जिला लेखा प्रबंधक ने डीएम की अनुमति और टेंडर प्रक्रिया अपनाए बगैर डीपीएम यू कार्यालय से वाहन का अनुबंध करने एवं वाहन किराया भुगतान के लिए अनुबंध मूल्य से ज्यादा के बिल पेश करने का आरोप जिला कार्यक्रम प्रबंधक पर लगाया है और इसकी शिकायत विभागीय अधिकारियों सहित डीएम से की है। हालांकि सीएमओ इसे दोनों का आपसी विवाद बता रहे हैं।
डैम (जिला लेखा प्रबंधक) सतपाल सिंह ने शिकायती में पत्र लिखा है कि डीपीएम यू कार्यालय में जिस वाहन को लगाया गया है, उसके अनुबंध की अनुमति ना तो डीएम से ली गई और न ही कोई टेंडर प्रक्रिया कराई गई। जबकि वाहन का अनुबंध डीएम की अनुमति के बाद टेंडर प्रक्रिया से होना चाहिए था। आरोप है कि डीपीएम (जिला कार्यक्रम प्रबंधक) मनीष बिसारिया ने मनमानी करके एक तो वाहन का अनुबंध कर लिया और अब भुगतान के लिए अनुबंध मूल्य से ज्यादा के बिल पेश कर रहे हैं। डैम ने डीपीएम द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार की शिकायत वाहन बिल और लॉग बुक के साथ अधिकारियों से की है। वहीं डीपीएम मनीष बिसारिया ने इस मामले में बोलने से इंकार करते हुए कहा कि कोई मामला नहीं हैं और सारे आरोप गलत हैं।
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सात सौ किलोमीटर ज्यादा का पेश किया बिल
डैम ने बताया कि डीपीएम ने अप्रैल माह को जो बिल पेश किया है वह 2240 किलोमीटर का है जबकि वाहन मात्र 1562 किलोमीटर ही चला है। इसी प्रकार दिसंबर 2016 का बिल 2233 किलोमीटर का पेश किया गया है जबकि वाहन सिर्फ 2061 किलोमीटर ही चला था।
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कुछ दिन के लिए आना बताकर कर लिया गाड़ी का अनुबंध
डैम ने बताया कि डीपीएम ने डीएचएस और टेंडर प्रक्रिया के बगैर वाहन संख्या यूपी 31टी 6247 की जगह यूपी 31 टी 6850 को लगा लिया और जब उनसे इस संबंध में पूछा तो डीपीएम ने कहा कि गाड़ी कुछ दिनों के लिए आई है, फिर चेंज हो जाएगी।
एसीएमओ ने जांच करने से किया मना
सीएमओ ने शिकायत को संज्ञान में लेते हुए इसकी जांच के लिए एसीएमओ एनएचएच डॉ. मातादीन को सौंपी है, लेकिन उनका कहना है कि मामला लेखा है इसलिए वह इसकी जांच करने में असमर्थ हैं। एसीएमओ का कहना है कि जांच ना करने के बारे में सीएमओ को भी बता दिया है।
दिशा निर्देशों को ताक पर रखकर डीपीएम कार्य कर रहे हैं, वाहन कम चलते हैं और बिल ज्यादा के बनाकर पेश करते हैं। भुगतान ना करने पर मुख्यमंत्री से शिकायत कराने की धमकी देते हैं।
सतपाल सिंह, जिला लेखा प्रबंधक
भ्रष्टाचार का कोई मामला नहीं है, डैम और डीपीएम आपस झगड़ रहे हैं और एक दूसरे के खिलाफ शिकायत कर रहें हैं। हालांकि दोनों के शिकायती पत्रों की जांच एसीएमओ एनएचएम को सौंपी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई होगी।
डॉ.जावेद अहमद, सीएमओ