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कड़ी धूप और झुलसाने वाली लू से लोग परेशान
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चिलचिलाती धूप में भी अखबार बना सहारा।
लीड
28एलकेएच 01, 02, 03
कड़ी धूप और झुलसाने वाली लू से लोग परेशान
-अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा, आम जनजीवन रहा अस्तव्यस्त
- जिला प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी, बताया- लू से बचाव के लिए क्या करें, क्या न करें
संवाद न्यूज एजेंसी
लखीमपुर खीरी। तपती धूप और भीषण गर्मी से आम जनजीवन पूरी तरह अस्तव्यस्त है। इंसान ही नहीं पशु पक्षी गर्मी से बिलबिला उठे हैं। सुबह से ही कड़ी धूप होने के साथ लू चलने से लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो रहा है। आसमान में सूरज तप रहा है तो सड़के गर्म तवे की तरह पैरों को झुलसा रही हैं। गर्म हवा के थपेड़ों से शरीर झुलस रहा है। अप्रैल में ही गर्मी अपने प्रचंड रूप में है। आने वाले दिनों में और गर्मी बढ़ने की आशंका है।
आम तौर से मई-जून में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर होता है लेकिन अप्रैल के अंत में बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। बृहस्पतिवार को लू का प्रकोप अन्य दिनों की अपेक्षा कम रहा, लेकिन भीषण गर्मी के कारण लोगों का चैन छिन गया। दोपहर होते-होते सड़कों पर सन्नाटा छा गया, जो जहां था वहीं दुबक कर रह गया। लोग केवल जरूरी काम से ही बाहर निकले। वह भी सूरज के ताप से झुलसने से बचने को चेहरा और सिर कपड़ों से ढककर निकले।
कैप, गमछों और छातों की बिक्री बढ़ी
भीषण गर्मी के कारण कैप, गमछों और छातों की बिक्री बढ़ गई है। गर्मी के कारण लोगों का गला सूख रहा है। इससे पानी, कोल्ड ड्रिंक, पानी वाले फल जैसे संतरा, तरबूज, खीरा, ककड़ी की बिक्री में उछाल आ गया है। पशु पक्षी भी पानी के लिए इधर उधर भटकते नजर आ रहे हैं। बुजुर्गों का कहना है कि अप्रैल में इतनी गर्मी इससे पहले कभी नहीं पड़ी। कड़ी धूप और भीषण गर्मी खुले आसमान के नीचे काम करने वालों पर भारी पड़ रही है।
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जिला प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी
जिला प्रशासन ने भीषण गर्मी को देखते हुए एडवाइजरी जारी की है। इसमें बताया गया है कि इस मौसम में लू लगने का खतरा रहता है। सिरदर्द, कमजोरी लगना, चक्कर आना, गर्मी से अकड़न, शरीर का तापमान ज्यादा बढ़ जाना, जी मिचलाना, त्वचा लाल होना, बेहोशी भ्रम की स्थिति जैसा लगे तो यह हीट वेव/लू के लक्षण हैं।
लू प्रभावित व्यक्ति के उपचार के लिए क्या करें
- सबसे पहले पीड़ित को किसी छायादार पेड़ के नीचे या छायादार स्थान पर ले जाएं।
- गीले कपड़े से उसके चेहरे और शरीर को साफ करें।
- सिर पर सामान्य तापमान का पानी डालें, मुख्य बात पीड़ित के शरीर का तापमान कम करना है।
- पीड़ित को ओआरएस/नींबू शरबत, शिकंजी आदि तरल पेय दें।
- व्यक्ति को निकटतम अस्पताल ले जाएं। गर्मी के स्ट्रोक घातक हो सकते हैं। हार्ट अटैक की स्थिति भी आ सकती है।
लू से बचाव के लिए क्या करें
- तेज धूप मे निकलने से बचें, यदि तेज धूप में निकलना जरूरी है तो निकलते वक्त छाता लगा लें या टोपी पहन लें।
- हल्के रंग के सूती और ढीले कपड़े पहनें, जिससे शरीर ज्यादा से ज्यादा ढका रहे।
- हीट स्ट्रोक से बचने के लिए जरूरी है कि पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर घर से निकलें और समय समय पर पानी पीते रहें
- यात्रा करते समय पानी अपने साथ रखें।
- निर्जलीकरण से बचने के लिए अधिक मात्रा में पानी पिएं, मौसमी फल और आरएस घोल का प्रयाग करें।
-संतुलित और हल्का भोजन नियमित करें।
-बीमार, गर्भवती महिलाओं, किसानों और कामगारों को अत्यधिक सावधानी बरतने की जरूरत है।
-जानवरों को छाया में बांधें और उन्हें पर्याप्त पानी पिलाएं
लू से बचाव के लिए क्या न करें
- अधिक प्रोटीन और बासी, संक्रमित खाद्य एवं पेय पदार्थों का प्रयोग न करें।
- एल्कोहल और चाय, काफी पीने से परहेज करें।
- दोपहर 12 बजे से तीन बजे के बीच सूरज के ताप से बचने का प्रयास करें।
- जानवरों और बच्चों को कभी भी बंद वाहन में अकेला न छोड़ें।
- खाना बनाते समय खिड़कियां और दरवाजे खोल कर रखें और दोपहर में खाना पकाने से बचें।
- सूर्य के ताप से बचने के लिए जहां तक संभव हो घर की निचली मंजिल पर ही रहें।
- दोपहर के समय बाहर होने पर अत्यधिक श्रम वाले कार्यों से बचें।
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28एलकेएच 01, 02, 03
कड़ी धूप और झुलसाने वाली लू से लोग परेशान
-अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा, आम जनजीवन रहा अस्तव्यस्त
- जिला प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी, बताया- लू से बचाव के लिए क्या करें, क्या न करें
संवाद न्यूज एजेंसी
लखीमपुर खीरी। तपती धूप और भीषण गर्मी से आम जनजीवन पूरी तरह अस्तव्यस्त है। इंसान ही नहीं पशु पक्षी गर्मी से बिलबिला उठे हैं। सुबह से ही कड़ी धूप होने के साथ लू चलने से लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो रहा है। आसमान में सूरज तप रहा है तो सड़के गर्म तवे की तरह पैरों को झुलसा रही हैं। गर्म हवा के थपेड़ों से शरीर झुलस रहा है। अप्रैल में ही गर्मी अपने प्रचंड रूप में है। आने वाले दिनों में और गर्मी बढ़ने की आशंका है।
आम तौर से मई-जून में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर होता है लेकिन अप्रैल के अंत में बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। बृहस्पतिवार को लू का प्रकोप अन्य दिनों की अपेक्षा कम रहा, लेकिन भीषण गर्मी के कारण लोगों का चैन छिन गया। दोपहर होते-होते सड़कों पर सन्नाटा छा गया, जो जहां था वहीं दुबक कर रह गया। लोग केवल जरूरी काम से ही बाहर निकले। वह भी सूरज के ताप से झुलसने से बचने को चेहरा और सिर कपड़ों से ढककर निकले।
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कैप, गमछों और छातों की बिक्री बढ़ी
भीषण गर्मी के कारण कैप, गमछों और छातों की बिक्री बढ़ गई है। गर्मी के कारण लोगों का गला सूख रहा है। इससे पानी, कोल्ड ड्रिंक, पानी वाले फल जैसे संतरा, तरबूज, खीरा, ककड़ी की बिक्री में उछाल आ गया है। पशु पक्षी भी पानी के लिए इधर उधर भटकते नजर आ रहे हैं। बुजुर्गों का कहना है कि अप्रैल में इतनी गर्मी इससे पहले कभी नहीं पड़ी। कड़ी धूप और भीषण गर्मी खुले आसमान के नीचे काम करने वालों पर भारी पड़ रही है।
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जिला प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी
जिला प्रशासन ने भीषण गर्मी को देखते हुए एडवाइजरी जारी की है। इसमें बताया गया है कि इस मौसम में लू लगने का खतरा रहता है। सिरदर्द, कमजोरी लगना, चक्कर आना, गर्मी से अकड़न, शरीर का तापमान ज्यादा बढ़ जाना, जी मिचलाना, त्वचा लाल होना, बेहोशी भ्रम की स्थिति जैसा लगे तो यह हीट वेव/लू के लक्षण हैं।
लू प्रभावित व्यक्ति के उपचार के लिए क्या करें
- सबसे पहले पीड़ित को किसी छायादार पेड़ के नीचे या छायादार स्थान पर ले जाएं।
- गीले कपड़े से उसके चेहरे और शरीर को साफ करें।
- सिर पर सामान्य तापमान का पानी डालें, मुख्य बात पीड़ित के शरीर का तापमान कम करना है।
- पीड़ित को ओआरएस/नींबू शरबत, शिकंजी आदि तरल पेय दें।
- व्यक्ति को निकटतम अस्पताल ले जाएं। गर्मी के स्ट्रोक घातक हो सकते हैं। हार्ट अटैक की स्थिति भी आ सकती है।
लू से बचाव के लिए क्या करें
- तेज धूप मे निकलने से बचें, यदि तेज धूप में निकलना जरूरी है तो निकलते वक्त छाता लगा लें या टोपी पहन लें।
- हल्के रंग के सूती और ढीले कपड़े पहनें, जिससे शरीर ज्यादा से ज्यादा ढका रहे।
- हीट स्ट्रोक से बचने के लिए जरूरी है कि पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर घर से निकलें और समय समय पर पानी पीते रहें
- यात्रा करते समय पानी अपने साथ रखें।
- निर्जलीकरण से बचने के लिए अधिक मात्रा में पानी पिएं, मौसमी फल और आरएस घोल का प्रयाग करें।
-संतुलित और हल्का भोजन नियमित करें।
-बीमार, गर्भवती महिलाओं, किसानों और कामगारों को अत्यधिक सावधानी बरतने की जरूरत है।
-जानवरों को छाया में बांधें और उन्हें पर्याप्त पानी पिलाएं
लू से बचाव के लिए क्या न करें
- अधिक प्रोटीन और बासी, संक्रमित खाद्य एवं पेय पदार्थों का प्रयोग न करें।
- एल्कोहल और चाय, काफी पीने से परहेज करें।
- दोपहर 12 बजे से तीन बजे के बीच सूरज के ताप से बचने का प्रयास करें।
- जानवरों और बच्चों को कभी भी बंद वाहन में अकेला न छोड़ें।
- खाना बनाते समय खिड़कियां और दरवाजे खोल कर रखें और दोपहर में खाना पकाने से बचें।
- सूर्य के ताप से बचने के लिए जहां तक संभव हो घर की निचली मंजिल पर ही रहें।
- दोपहर के समय बाहर होने पर अत्यधिक श्रम वाले कार्यों से बचें।