{"_id":"7d0585bb9c74ff273f11f638e68f9c7c","slug":"payment-bajaj-group-behind-us-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"भुगतान में बजाज ग्रुप की मिलें पीछे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भुगतान में बजाज ग्रुप की मिलें पीछे
लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 04 Feb 2015 06:40 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिछले साल का बकाया भुगतान का मामला हो या फिर चालू सत्र का, छह मिलें नियमित भुगतान नहीं कर रहीं हैं। वहीं प्रशासन ने भी कोई सबक नहीं लिया है। छह मिलों पर करीब 343 करोड़ (14 दिन से पूर्व) बकाया है, जिसमें बजाज ग्रुप की तीन मिलों पर सबसे ज्यादा 286 करोड़ रुपये की देनदारी है। यह आंकड़े हालात बयां करने के लिए काफी हैं कि इस बार भी किसानों को भुगतान के लिए जूझना पड़ सकता है।
बता दें कि जिले में नौ चीनी मिलें संचालित हैं, जिनमें दो सहकारी चीनी मिलें हैं। गन्ना एक्ट के मुताबिक गन्ना खरीद की तिथि से 14 दिन के अंदर किसानों को भुगतान करना अनिवार्य है, लेकिन इसके पालन में सिर्फ तीन चीनी मिलें अजवापुर, कुंभी और गुलरिया का सिस्टम अभी ठीक-ठाक चल रहा है। लिहाजा इन पर बकाया नहीं है। वहीं छह मिलें भुगतान के मामले में गन्ना एक्ट का पालन नहीं कर रहीं हैं। खासकर बजाज ग्रुप की तीन मिलें गोला, पलिया और खंभारखेड़ा भुगतान के मामले में काफी पीछे हैं। गोला मिल पर किसानों का 102 करोड़ (एक अरब) बकाया हो चुका है, क्योंकि 11 दिसंबर 2014 के बाद हुई गन्ना खरीद का भुगतान नहीं किया गया है। पलिया मिल पर 96 करोड़ बकाया है, जिसने सात दिसंबर 2014 के बाद भुगतान नहीं किया है। इसी तरह 88 करोड़ बकाए के साथ खंभारखेड़ा तीसरे नंबर पर है, उसने भी छह दिसंबर के बाद हुई खरीद का गन्ना मूल्य भुगतान नहीं किया है। बताते चलें कि पिछले पेराई सत्र का बकाया भुगतान करने में गोला मिल सबसे पीछे रही, जिसने जनवरी 2015 में भुगतान किया। इसके अलावा ऐरा मिल पर 16 करोड़ बाकी है। सहकारी क्षेत्र की बेलरायां पर 21 करोड़ और संपूर्णानगर मिल पर 20 करोड़ बकाया है। इनमें ऐरा ने आठ जनवरी तक और बेलरायां, संपूर्णानगर ने 31 दिसंबर 2014 तक खरीदे गन्ने का भुगतान किया है।
जिला गन्ना अधिकारी जगदीश चंद्र यादव ने बताया कि गोला, पलिया और खंभारखेड़ा मिलों की भुगतान की स्थिति चिंताजनक है, जिसकी बराबर मानीटरिंग की जा रही है। जल्द ही स्थिति में सुधार न हुआ तो चीनी बिक्री को नियंत्रण में लेकर किसानों का भुगतान कराया जाएगा। फिलहाल बजाज ग्रुप के अध्यासी लोन स्वीकृत होने पर भुगतान की बात कह रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
बता दें कि जिले में नौ चीनी मिलें संचालित हैं, जिनमें दो सहकारी चीनी मिलें हैं। गन्ना एक्ट के मुताबिक गन्ना खरीद की तिथि से 14 दिन के अंदर किसानों को भुगतान करना अनिवार्य है, लेकिन इसके पालन में सिर्फ तीन चीनी मिलें अजवापुर, कुंभी और गुलरिया का सिस्टम अभी ठीक-ठाक चल रहा है। लिहाजा इन पर बकाया नहीं है। वहीं छह मिलें भुगतान के मामले में गन्ना एक्ट का पालन नहीं कर रहीं हैं। खासकर बजाज ग्रुप की तीन मिलें गोला, पलिया और खंभारखेड़ा भुगतान के मामले में काफी पीछे हैं। गोला मिल पर किसानों का 102 करोड़ (एक अरब) बकाया हो चुका है, क्योंकि 11 दिसंबर 2014 के बाद हुई गन्ना खरीद का भुगतान नहीं किया गया है। पलिया मिल पर 96 करोड़ बकाया है, जिसने सात दिसंबर 2014 के बाद भुगतान नहीं किया है। इसी तरह 88 करोड़ बकाए के साथ खंभारखेड़ा तीसरे नंबर पर है, उसने भी छह दिसंबर के बाद हुई खरीद का गन्ना मूल्य भुगतान नहीं किया है। बताते चलें कि पिछले पेराई सत्र का बकाया भुगतान करने में गोला मिल सबसे पीछे रही, जिसने जनवरी 2015 में भुगतान किया। इसके अलावा ऐरा मिल पर 16 करोड़ बाकी है। सहकारी क्षेत्र की बेलरायां पर 21 करोड़ और संपूर्णानगर मिल पर 20 करोड़ बकाया है। इनमें ऐरा ने आठ जनवरी तक और बेलरायां, संपूर्णानगर ने 31 दिसंबर 2014 तक खरीदे गन्ने का भुगतान किया है।
विज्ञापन
जिला गन्ना अधिकारी जगदीश चंद्र यादव ने बताया कि गोला, पलिया और खंभारखेड़ा मिलों की भुगतान की स्थिति चिंताजनक है, जिसकी बराबर मानीटरिंग की जा रही है। जल्द ही स्थिति में सुधार न हुआ तो चीनी बिक्री को नियंत्रण में लेकर किसानों का भुगतान कराया जाएगा। फिलहाल बजाज ग्रुप के अध्यासी लोन स्वीकृत होने पर भुगतान की बात कह रहे हैं।
विज्ञापन