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खीरीः फर्श पर लिटाकर मरीजों का किया जा रहा इलाज
सार
प्रतीक्षालय में कुछ मरीज पत्थर की बेंचों पर लेटे थे तो कुछ मरीजों को बैठे-बैठे ही डिप लगा दी गई थी। कभी-कभी मरीजों की भीड़ अधिक होने से बेड कम पड़ जाते हैं, लेकिन मरीज का इलाज करना आवश्यक है और प्राथमिकता भी।- डॉ. गणेश, कुंभी पीएचसी प्रभारी07 एलकेएच 31, 32सीएचसी निघासन में भी संसाधनों का अभाव - एक सीएचसी, पांच पीएचसी और 30 उपकेंद्र में स्टाफ का अभावसंवाद न्यूज एजेंसीनिघासन। पतिया और सिंगाही पीएचसी सिर्फ फार्मासिस्ट के सहारे चल रहा है।
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गोला सीएचसी के प्रतीक्षालय में बच्चे को जमीन पर लिटाकर किया जा रहा है इलाज।
विस्तार
बदलते मौसम में सीएचसी में बढ़ी बुखार पीड़ितों की संख्या
अस्पताल के प्रतीक्षालय कक्ष में बेंचों तक पर नहीं बची जगह
गोला गोकर्णनाथ। सीएचसी का हाल सुधरने का नाम नहीं ले रहा। डॉक्टरों और संसाधनों की कमी से जूझते इस अस्पताल में अब जगह की भी कमी हो गई है। प्रतीक्षालय तक में मरीजों को पत्थरों की बेंचों पर बैठाकर, लिटाकर और जगह ना होने पर फर्श पर लिटाकर उनका इलाज किया जा रहा है।
बदलते मौसम में इन दिनों वायरल फीवर का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। इसके साथ ही मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। नगर की सीएचसी में दैनिक ओपीडी का औसत एक हजार के करीब पहुंच गया है। एफआरयू सेंटर होने के नाते यहां नगर और ब्लॉक कुंभी के अतिरिक्त बांकेगंज, बिजुआ, बेहजम ब्लॉक और मैलानी क्षेत्र से भी मरीज आते हैं। यहां महज चार डॉक्टर हैं। वायरल फीवर के प्रकोप के बीच मरीजों की बड़ी संख्या के कारण सीएचसी में पेरासिटामोल की कमी रहती है।
मंगलवार को सीएचसी के इमरजेंसी रूम से लेकर प्रतीक्षालय तक मरीज ही मरीज दिखे। प्रतीक्षालय में कुछ मरीज पत्थर की बेंचों पर लेटे थे तो कुछ मरीजों को बैठे-बैठे ही डिप लगा दी गई थी। वहीं एक बच्चे का इलाज फर्श पर लिटाकर किया जा रहा था। इलाज कर रहे अस्पताल के स्टाफ ने बताया कि जब अस्पताल में जगह ही नहीं है तो आखिर मरीजों को कहां बिठाया या लिटाया जाए।
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सीएचसी में चार डॉक्टरों पर 1000 से अधिक ओपीडी
गोला सीएचसी में नए और पुराने पर्चे मिलाकर दैनिक ओपीडी 1000 से अधिक है, जबकि डॉ. अजय, डॉ. एसडी गोस्वामी, डॉ. अशोक बिहारी सिंह और एक महिला डॉक्टर सहित महज चार चिकित्सक हैं।
इस समय अधिकांश मरीज वायरल फीवर के हैं। कभी-कभी मरीजों की भीड़ अधिक होने से बेड कम पड़ जाते हैं, लेकिन मरीज का इलाज करना आवश्यक है और प्राथमिकता भी।
- डॉ. गणेश, कुंभी पीएचसी प्रभारी
सीएचसी निघासन में भी संसाधनों का अभाव
निघासन। सीएचसी निघासन में पर्याप्त संसाधन न होने के कारण मरीजों का इलाज नहीं हो पा रहा है।
सीएचसी पर जुकाम, बुखार की सामान्य दवाएं तो उपलब्ध हैं, लेकिन जांच के कोई साधन नहीं हैं। एक्सरे मशीन है, लेकिन टेक्नीशियन नहीं है। खून की सामान्य जांच कराने के लिए भी मरीजों को भटकना पड़ता है। दंत चिकित्सक और नेत्र रोग विशेषज्ञ न होने के कारण आंख और दांत के मरीज प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर हैं।
मूड़ा, पतिया, सिंगाही पीएचसी में एमबीबीएस डॉक्टर तक नहीं
सीएचसी में डॉ. पीके रावत, डॉ. अरविंद पटेल, डॉ. मनोज और एमके शुक्ला नियुक्त हैं। इनके अलावा एक महिला चिकित्सक डॉ. शशिप्रभा तैनात हैं। मानक के हिसाब से सात डॉक्टर होने चाहिए, लेकिन सिर्फ पांच डॉक्टर ही काम कर रहे हैं। वहीं, यहां चार के स्थान पर सिर्फ तीन फार्मासिस्ट हैं। मूड़ा, पतिया, सिंगाही पीएचसी में कोई एमबीबीएस डॉक्टर ही नहीं है।
पतिया और सिंगाही पीएचसी सिर्फ फार्मासिस्ट के सहारे चल रहा है। तिकुनिया में डॉक्टर की तैनाती तो है, लेकिन उनके जिले में अटैच होने के कारण वहां सिर्फ फार्मासिस्ट ही है। बेलरायां में डॉक्टर और फार्मासिस्ट दोनों हैं। 30 उपकेंद्र और 11 सीएचओ हैं।
सीएचसी में पहले 20 बेड थे। अब शासन से 30 और बेड को मंजूरी मिल गई है। अस्पताल के पीछे 20 बेड का अस्पताल बनने जा रहा है। इसके बनने के बाद 50 बेडों का अस्पताल और बनाया जाएगा। स्टाफ के लिए शासन को पत्र लिखा गया है।
- पीके रावत, सीएचसी अधीक्षक
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अस्पताल के प्रतीक्षालय कक्ष में बेंचों तक पर नहीं बची जगह
गोला गोकर्णनाथ। सीएचसी का हाल सुधरने का नाम नहीं ले रहा। डॉक्टरों और संसाधनों की कमी से जूझते इस अस्पताल में अब जगह की भी कमी हो गई है। प्रतीक्षालय तक में मरीजों को पत्थरों की बेंचों पर बैठाकर, लिटाकर और जगह ना होने पर फर्श पर लिटाकर उनका इलाज किया जा रहा है।
बदलते मौसम में इन दिनों वायरल फीवर का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। इसके साथ ही मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। नगर की सीएचसी में दैनिक ओपीडी का औसत एक हजार के करीब पहुंच गया है। एफआरयू सेंटर होने के नाते यहां नगर और ब्लॉक कुंभी के अतिरिक्त बांकेगंज, बिजुआ, बेहजम ब्लॉक और मैलानी क्षेत्र से भी मरीज आते हैं। यहां महज चार डॉक्टर हैं। वायरल फीवर के प्रकोप के बीच मरीजों की बड़ी संख्या के कारण सीएचसी में पेरासिटामोल की कमी रहती है।
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मंगलवार को सीएचसी के इमरजेंसी रूम से लेकर प्रतीक्षालय तक मरीज ही मरीज दिखे। प्रतीक्षालय में कुछ मरीज पत्थर की बेंचों पर लेटे थे तो कुछ मरीजों को बैठे-बैठे ही डिप लगा दी गई थी। वहीं एक बच्चे का इलाज फर्श पर लिटाकर किया जा रहा था। इलाज कर रहे अस्पताल के स्टाफ ने बताया कि जब अस्पताल में जगह ही नहीं है तो आखिर मरीजों को कहां बिठाया या लिटाया जाए।
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सीएचसी में चार डॉक्टरों पर 1000 से अधिक ओपीडी
गोला सीएचसी में नए और पुराने पर्चे मिलाकर दैनिक ओपीडी 1000 से अधिक है, जबकि डॉ. अजय, डॉ. एसडी गोस्वामी, डॉ. अशोक बिहारी सिंह और एक महिला डॉक्टर सहित महज चार चिकित्सक हैं।
इस समय अधिकांश मरीज वायरल फीवर के हैं। कभी-कभी मरीजों की भीड़ अधिक होने से बेड कम पड़ जाते हैं, लेकिन मरीज का इलाज करना आवश्यक है और प्राथमिकता भी।
- डॉ. गणेश, कुंभी पीएचसी प्रभारी
सीएचसी निघासन में भी संसाधनों का अभाव
निघासन। सीएचसी निघासन में पर्याप्त संसाधन न होने के कारण मरीजों का इलाज नहीं हो पा रहा है।
सीएचसी पर जुकाम, बुखार की सामान्य दवाएं तो उपलब्ध हैं, लेकिन जांच के कोई साधन नहीं हैं। एक्सरे मशीन है, लेकिन टेक्नीशियन नहीं है। खून की सामान्य जांच कराने के लिए भी मरीजों को भटकना पड़ता है। दंत चिकित्सक और नेत्र रोग विशेषज्ञ न होने के कारण आंख और दांत के मरीज प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर हैं।
मूड़ा, पतिया, सिंगाही पीएचसी में एमबीबीएस डॉक्टर तक नहीं
सीएचसी में डॉ. पीके रावत, डॉ. अरविंद पटेल, डॉ. मनोज और एमके शुक्ला नियुक्त हैं। इनके अलावा एक महिला चिकित्सक डॉ. शशिप्रभा तैनात हैं। मानक के हिसाब से सात डॉक्टर होने चाहिए, लेकिन सिर्फ पांच डॉक्टर ही काम कर रहे हैं। वहीं, यहां चार के स्थान पर सिर्फ तीन फार्मासिस्ट हैं। मूड़ा, पतिया, सिंगाही पीएचसी में कोई एमबीबीएस डॉक्टर ही नहीं है।
पतिया और सिंगाही पीएचसी सिर्फ फार्मासिस्ट के सहारे चल रहा है। तिकुनिया में डॉक्टर की तैनाती तो है, लेकिन उनके जिले में अटैच होने के कारण वहां सिर्फ फार्मासिस्ट ही है। बेलरायां में डॉक्टर और फार्मासिस्ट दोनों हैं। 30 उपकेंद्र और 11 सीएचओ हैं।
सीएचसी में पहले 20 बेड थे। अब शासन से 30 और बेड को मंजूरी मिल गई है। अस्पताल के पीछे 20 बेड का अस्पताल बनने जा रहा है। इसके बनने के बाद 50 बेडों का अस्पताल और बनाया जाएगा। स्टाफ के लिए शासन को पत्र लिखा गया है।
- पीके रावत, सीएचसी अधीक्षक