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पराली जलाने वाले किसान सैटेलाइट के रडार पर
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लखीमपुर खीरी। खेतों में पराली समेत अन्य फसलों के अवशेष जलाने वाले किसान होशियार हो जाएं, क्योंकि उन पर सेटेलाइट से नजर रखी जा रही है। इससे पराली जलाने वाले किसानों को विभागीय कार्रवाई से बचना मुश्किल होगा। एक से 12 अक्तूबर 2019 तक सेटेलाइट ने खीरी में 29 स्थानों पर पराली जलाने के मामले पकड़े हैं। जबकि पड़ोसी जिला पीलीभीत में सबसे अधिक 50, शाहजहांपुर में 29 और बरेली में सात मामले पकड़े गए हैं।
फसल अवशेष पराली के खेतों में जलाने से प्रदूषण फैलने और खेतों के जैविक घटक के नष्ट होने के चलते एनजीटी ने प्रतिबंध लगाया है। इस आदेश का अनुपालन कराने के लिए डीएम ने सचल दल बनाए हैं, जो पराली जलाने के मामलों में कार्रवाई करेगा। साथ ही किसानों को भी पराली न जलाने के लिए कहा गया है। सरकार ने पराली जलाने वालों पर 15 हजार रुपये तक जुर्माना और सरकारी योजना के लाभ से वंचित करने के आदेश दिए हैं। इसके बावजूद कुछ किसान पराली को खेत में ही जला देते हैैं। हालांकि अभी तक पांच किसानों पर कार्रवाई की जा चुकी है। सेटेलाइट रिपोर्ट के मुताबिक पूरे प्रदेश में 199 स्थानों पर पराली जलाने की घटनाएं हुई हैं। यह रिपोर्ट 12 दिन की है। इसके बाद की रिपोर्ट आने वाली है, जिसके बाद पता चलेगा कि पराली जलाने के लिए गठित सचल दल ने कितना काम किया।
खीरी में पिछले साल के मुकाबले पराली जलाने के मामले बढ़ गए हैं। वर्ष 2016 में 48, 2017 में 57, 2018 में 21 और 2019 में 29 मामले पराली जलाने के पकड़े गए। अभी दूसरी रिपोर्ट आनी बाकी है, जिससे संख्या दोगुनी तक पहुंच सकती है।
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पराली जलाने के मामलों में अब तक पांच किसानों पर एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। गोष्ठी, बैठकों के माध्यम से किसानों को जागरूक किया जा रहा है। दो एकड़ से कम क्षेत्रफल में अवशेष जलाने पर 2500 रुपये, दो से पांच एकड़ तक पांच हजार रुपये और पांच एकड़ से अधिक क्षेत्रफल होने पर 15 हजार रुपये जुर्माना का प्रावधान है।
- डॉ. इंद्रेषु कुमार गौतम, जिला कृषि रक्षा अधिकारी
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फसल अवशेष पराली के खेतों में जलाने से प्रदूषण फैलने और खेतों के जैविक घटक के नष्ट होने के चलते एनजीटी ने प्रतिबंध लगाया है। इस आदेश का अनुपालन कराने के लिए डीएम ने सचल दल बनाए हैं, जो पराली जलाने के मामलों में कार्रवाई करेगा। साथ ही किसानों को भी पराली न जलाने के लिए कहा गया है। सरकार ने पराली जलाने वालों पर 15 हजार रुपये तक जुर्माना और सरकारी योजना के लाभ से वंचित करने के आदेश दिए हैं। इसके बावजूद कुछ किसान पराली को खेत में ही जला देते हैैं। हालांकि अभी तक पांच किसानों पर कार्रवाई की जा चुकी है। सेटेलाइट रिपोर्ट के मुताबिक पूरे प्रदेश में 199 स्थानों पर पराली जलाने की घटनाएं हुई हैं। यह रिपोर्ट 12 दिन की है। इसके बाद की रिपोर्ट आने वाली है, जिसके बाद पता चलेगा कि पराली जलाने के लिए गठित सचल दल ने कितना काम किया।
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खीरी में पिछले साल के मुकाबले पराली जलाने के मामले बढ़ गए हैं। वर्ष 2016 में 48, 2017 में 57, 2018 में 21 और 2019 में 29 मामले पराली जलाने के पकड़े गए। अभी दूसरी रिपोर्ट आनी बाकी है, जिससे संख्या दोगुनी तक पहुंच सकती है।
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पराली जलाने के मामलों में अब तक पांच किसानों पर एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। गोष्ठी, बैठकों के माध्यम से किसानों को जागरूक किया जा रहा है। दो एकड़ से कम क्षेत्रफल में अवशेष जलाने पर 2500 रुपये, दो से पांच एकड़ तक पांच हजार रुपये और पांच एकड़ से अधिक क्षेत्रफल होने पर 15 हजार रुपये जुर्माना का प्रावधान है।
- डॉ. इंद्रेषु कुमार गौतम, जिला कृषि रक्षा अधिकारी