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धौरहरा विधानसभा क्षेत्र में धौरहरा कस्बा ही शामिल नहीं
सुशील गुप्ता ईसानगर।
Updated Fri, 10 Feb 2017 10:38 PM IST
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- पिछले परिसीमन में धौरहरा के साथ हुआ अजब-गजब मजाक
धौरहरा को यहां के जनप्रतिनिधियों ने तो छला ही परिसीमन में भी उसके साथ अजीबोगरीब मजाक हुआ है। शायद धौरहरा पहला और देश का एकलौता विधानसभा क्षेत्र ऐसा होगा कि जिस कस्बे के नाम से क्षेत्र का नामकरण हुआ वह कस्बा ही उस क्षेत्र में शामिल नहीं है। यह जानकर ताज्जुब होगा कि धौरहरा कस्बा विधानसभा क्षेत्र धौरहरा में न होकर निघासन विधानसभा क्षेत्र और खीरी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। जबकि धौरहरा नाम से अलग से लोकसभा क्षेत्र भी है।
वर्ष 1951 में जब पहला विधानसभा चुनाव हुआ था तब धौरहरा विधानसभा क्षेत्र निघासन कम लखीमपुर नार्थ विधानसभा क्षेत्र में शामिल था। तब इस क्षेत्र में दो सीटें हुआ करती थीं। राजनीतिक पार्टियां इस क्षेत्र से उम्मीदवार उतारते थे। इसमें एक सामान्य और एक आरक्षित सीट थी। दोनों का चुनाव निशान एक था, लेकिन सुरक्षित सीट का चुनाव निशान एक घेरे में बना होता था। मतदाता भी एक साथ दो वोट डाल कर दो उम्मीदवार चुनते थे।
वर्ष 1957 में पहली बार धौरहरा नाम से विधानसभा क्षेत्र बना। तब से 2009 तक इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ। 2009 के लोकसभा चुनाव के पहले जब परिसीमन हुआ तो धौरहरा विधानसभा क्षेत्र और धौरहरा लोकसभा क्षेत्र से धौरहरा ही गायब हो गया। जैसे निघासन से अलग होकर धौरहरा तहसील बनी उसी तरह निघासन कम लखीमपुर नार्थ से अलग होकर धौरहरा विधानसभा क्षेत्र बना था।
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लोकसभा और विधानसभा धौरहरा क्षेत्र के बीचों बीच पड़ने वाले इस कस्बे को वोटर चुनाव के समय अक्सर भ्रमित हो जाते हैं। धौरहरा के कस्बे के अलग-थलग पड़ जाने के कारण इसके विकास पर भी बुरा असर पड़ा है। कस्बे के लोगों ने धौरहरा कस्बे को विधानसभा क्षेत्र धौरहरा लोकसभा क्षेत्र धौरहरा में शामिल करने के लिए कई बार आंदोलन भी किए, लेकिन इस ओर निर्वाचन आयोग ने कोई कार्रवाई नहीं की। इससे धौरहरा के कस्बे के लोगों में गहरी नाराजगी भी है।
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धौरहरा को यहां के जनप्रतिनिधियों ने तो छला ही परिसीमन में भी उसके साथ अजीबोगरीब मजाक हुआ है। शायद धौरहरा पहला और देश का एकलौता विधानसभा क्षेत्र ऐसा होगा कि जिस कस्बे के नाम से क्षेत्र का नामकरण हुआ वह कस्बा ही उस क्षेत्र में शामिल नहीं है। यह जानकर ताज्जुब होगा कि धौरहरा कस्बा विधानसभा क्षेत्र धौरहरा में न होकर निघासन विधानसभा क्षेत्र और खीरी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। जबकि धौरहरा नाम से अलग से लोकसभा क्षेत्र भी है।
वर्ष 1951 में जब पहला विधानसभा चुनाव हुआ था तब धौरहरा विधानसभा क्षेत्र निघासन कम लखीमपुर नार्थ विधानसभा क्षेत्र में शामिल था। तब इस क्षेत्र में दो सीटें हुआ करती थीं। राजनीतिक पार्टियां इस क्षेत्र से उम्मीदवार उतारते थे। इसमें एक सामान्य और एक आरक्षित सीट थी। दोनों का चुनाव निशान एक था, लेकिन सुरक्षित सीट का चुनाव निशान एक घेरे में बना होता था। मतदाता भी एक साथ दो वोट डाल कर दो उम्मीदवार चुनते थे।
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वर्ष 1957 में पहली बार धौरहरा नाम से विधानसभा क्षेत्र बना। तब से 2009 तक इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ। 2009 के लोकसभा चुनाव के पहले जब परिसीमन हुआ तो धौरहरा विधानसभा क्षेत्र और धौरहरा लोकसभा क्षेत्र से धौरहरा ही गायब हो गया। जैसे निघासन से अलग होकर धौरहरा तहसील बनी उसी तरह निघासन कम लखीमपुर नार्थ से अलग होकर धौरहरा विधानसभा क्षेत्र बना था।
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लोकसभा और विधानसभा धौरहरा क्षेत्र के बीचों बीच पड़ने वाले इस कस्बे को वोटर चुनाव के समय अक्सर भ्रमित हो जाते हैं। धौरहरा के कस्बे के अलग-थलग पड़ जाने के कारण इसके विकास पर भी बुरा असर पड़ा है। कस्बे के लोगों ने धौरहरा कस्बे को विधानसभा क्षेत्र धौरहरा लोकसभा क्षेत्र धौरहरा में शामिल करने के लिए कई बार आंदोलन भी किए, लेकिन इस ओर निर्वाचन आयोग ने कोई कार्रवाई नहीं की। इससे धौरहरा के कस्बे के लोगों में गहरी नाराजगी भी है।