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बेमौसम बारिश और बाढ़ से धान के उत्पादन को लगा तगड़ा झटका

Thu, 28 Oct 2021 02:17 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 28 Oct 2021 02:17 AM IST
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Paddy production suffered a major setback due to unseasonal rains and floods
राजकीय कृषि बीज फार्म का निरीक्षण करते जिला कृषि अधिकारी अरविंद चौधरी।
सरकारी फार्म में धान की क्रॉप कटिंग में 50 से 60 प्रतिशत तक आई गिरावट
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धान की गुणवत्ता भी हुई खराब, दाने पड़े काले, किसान को लागत के पड़े लाले
लखीमपुर खीरी। अक्तूबर में बेमौसम बारिश से आई भयानक बाढ़ से पहली बार जनपद में बड़े पैमाने पर धान की फसल को नुकसान हुआ है, जिसके नतीजे भी सामने आने लगे हैं। जिला कृषि अधिकारी अरविंद चौधरी ने बुधवार को संपूर्णानगर स्थित राजकीय कृषि बीज फार्म में धान की क्रॉप कटिंग कराई तो अनुमानित औसत उत्पादकता 32 क्विंटल प्रति हेक्टेअर की तुलना में 15 क्विंटल धान ही निकला है। जो बाढ़ से कम प्रभावित था, उसमें भी 18 क्विंटल धान प्राप्त हो सका है। इससे धान बुवाई की कुल लागत निकलना भी मुश्किल है।
जनपद में इस वर्ष करीब दो लाख हेक्टेअर क्षेत्रफल में धान की बुवाई किसानों ने की थी। मानसून सीजन में अच्छी बारिश होने से सितंबर 2021 तक धान की फसल अच्छी थी और कृषि विभाग ने भी 32 क्विंटल प्रति हेक्टेअर की दर से धान का औसत उत्पादन होने की उम्मीद जताई थी। अक्तूबर के दूसरे पखवाड़े में अचानक हुई बेमौसम घनघोर बारिश ने ऐसा कहर बरपाया कि पलिया, निघासन, धौरहरा, लखीमपुर और गोला तहसील क्षेत्रों में बाढ़ आई और धान की फसल को अपनी आगोश में समेट लिया। इससे हजारों की किसानों की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई तो वहीं जिन खेतों में धान की फसल पककर कटने के लिए तैयार खड़ी थी वह भी बाढ़ के पानी में डूबकर आधे से कम रह गई। गुणवत्ता भी खराब हुई और दाने भी बदरंग व काले पड़ चुके हैं। सिर्फ 2521 किसानों के फसल बीमा से आच्छादित होने के कारण अब हजारों किसानों को आपदा राहत विभाग से ही मदद मिलने की उम्मीद है, लेकिन इसके लिए कराया जा रहा सर्वे कार्य भी बेहद सुस्त है। इससे किसी तहसील में सर्वे कार्य पूरा होना तो दूर अभी प्रारंभ नहीं हो सका है। लिहाजा किसानों में उहापोह की स्थिति बनी हुई है, क्योंकि फसलों को हुए भारी नुकसान से इनकी दिवाली फीकी रहने वाली है। जो धान बचा भी है, तो उसकी गुणवत्ता इस कदर खराब हो चुकी है कि उसका एमएसपी से आधा रेट मिलना मुश्किल हो रहा है। तो वहीं क्रय केंद्रों पर ऐसे धान को देखते ही रिजेक्ट कर दिया जाता है। (संवाद)
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सरकारी फार्म का यह हाल तो आम किसान निश्चित बेहाल
कृषि विभाग का संपूर्णानगर स्थित राजकीय कृषि बीज फार्म 44.73 हेक्टेअर में फैला है, जिसमें बोई जाने वाली फसलों को बीज संवर्धन के तौर पर तैयार किया जाता है। इसके लिए संतुलित खादों के अलावा अधिकारियों की निगरानी रहती है। बावजूद इसके बाढ़ के पानी से धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा और उत्पादकता आधे से भी कम रह गई है। ऐसे में आम किसानों की फसलों को हुए नुकसान का सहज आकलन किया जा सकता है।
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अक्तूबर में हुई बेमौसम बारिश से धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसमें हजारों हेक्टेअर फसल पूरी तरह 100 प्रतिशत नष्ट हुई है। राजकीय कृषि बीज फार्म में धान की क्राप कटिंग कराई गई है, जिसमें अनुमानित औसत उत्पादकता 32 क्विंटल प्रति हेक्टेअर के सापेक्ष 14 से 15 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ है। इससे लागत निकलना मुश्किल है।

- अरविंद चौधरी, जिला कृषि अधिकारी
अभी भी बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में काफी पानी भरा हुआ है, जिससे सर्वे कार्य कराने में दिक्कतें आ रही हैं। बाढ़ पीड़ितों को राहत पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है, जिसके बाद सर्वे कार्य कराया जाएगा। तहसीलों से मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर शासन से आर्थिक सहायता मांगी जाएगी।
- संजय कुमार सिंह, एडीएम
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