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अतिक्रमण और प्रदूषण से कराह रही उल्ल नदी
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उल्ल नदी में कपड़े धोते लोग।
अमर उजाला अभियान का लोगों का लगेगा
09 एलकेएच 21, 22
अतिक्रमण और प्रदूषण से कराह रही उल्ल नदी
- शहर के निकट नदी में पर्यटन की संभावनाएं मार रही हिलोरें
संवाद न्यूज एजेंसी
महेवागंज। इंसानी चूक और शासन प्रशासन की अनदेखी के चलते जिले में नदियों की दुर्दशा हो रही है। शहर से सटकर बहने वाली उल्ल नदी भी प्रदूषण और अतिक्रमण की मार से कराह रही है। पीलीभीत से निकली उल्ल नदी जंगली जीवों के गले भी तर करती है।
शहर के पास उत्तर में बह रही नदी अतिक्रमण से सिकुड़ गई है। लखीमपुर में उल्ल नदी को कूड़ादान बना दिया गया है। उल्ल नदी में जलकुंभी और सिल्ट जमा है। रोजाना नदी में बड़ी पैमाने पर कपड़े धोए जाने से पानी में हानिकारक रसायन घुल रहा है। इससे पानी इतना गंदा और जहरीला हो गया है कि पीना तो दूर आचमन लायक भी नहीं है। मछलियां और पर्यावरण के अनुकूल जलीय जीव पनप नहीं पा रहे हैं। स्वयं सेवी संस्थाओं के लोग कभी-कभार साफ सफाई कर औपचारिकता निभा देते हैं। कभी सदानीरा बहने वाली नदी में गर्मी के दिनों में पानी बहुत कम रह जाता है। नदी की दुर्दशा से पर्यावरण प्रेमियों में काफी रोष है।
उल्ल नदी समेटे है पर्यटन की अपार संभावनाएं
बड़े शहरों में स्थित नदियां और इनके किनारे सैर सपाटे का केंद्र बने हैं। पार्क के रूप में बच्चे मोटरबोट और फाउंटेन का आनंद लेते हैं। उल्ल नदी भी अपने अंतर में पर्यटन की तमाम संभावनाओं को समेटे है। महेवागंज के अमकोटा, कुल्हौरी, सिंगारपुर, सिकंदरपुर, बनवारीपुर, बालूडीह के किनारों से होकर नदी शहर में सेठघाट और रामघाट के किनारे बहती है। अन्य शहरों की तरह उल्ल नदी और इसके किनारों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की संभावना लोगों के मन में हिलोर ले रही हैं। उल्ल नदी की साफ सफाई कर शहर के निकट इसके किनारे एक खूबसूरत पिकनिक स्पाट विकसित किया जा सकता है। जहां हरा भरा पार्क पार्क बनाया जा सकता है और नदी में मोटर बोट और पैडस्टल बोट डाली जा सकती हैं। इससे शहर और आसपास के लोग हरियाली का आनंद उठाने के साथ नौका विहार का भी आनंद ले सकते हैं।
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09 एलकेएच 21, 22
अतिक्रमण और प्रदूषण से कराह रही उल्ल नदी
- शहर के निकट नदी में पर्यटन की संभावनाएं मार रही हिलोरें
संवाद न्यूज एजेंसी
महेवागंज। इंसानी चूक और शासन प्रशासन की अनदेखी के चलते जिले में नदियों की दुर्दशा हो रही है। शहर से सटकर बहने वाली उल्ल नदी भी प्रदूषण और अतिक्रमण की मार से कराह रही है। पीलीभीत से निकली उल्ल नदी जंगली जीवों के गले भी तर करती है।
शहर के पास उत्तर में बह रही नदी अतिक्रमण से सिकुड़ गई है। लखीमपुर में उल्ल नदी को कूड़ादान बना दिया गया है। उल्ल नदी में जलकुंभी और सिल्ट जमा है। रोजाना नदी में बड़ी पैमाने पर कपड़े धोए जाने से पानी में हानिकारक रसायन घुल रहा है। इससे पानी इतना गंदा और जहरीला हो गया है कि पीना तो दूर आचमन लायक भी नहीं है। मछलियां और पर्यावरण के अनुकूल जलीय जीव पनप नहीं पा रहे हैं। स्वयं सेवी संस्थाओं के लोग कभी-कभार साफ सफाई कर औपचारिकता निभा देते हैं। कभी सदानीरा बहने वाली नदी में गर्मी के दिनों में पानी बहुत कम रह जाता है। नदी की दुर्दशा से पर्यावरण प्रेमियों में काफी रोष है।
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उल्ल नदी समेटे है पर्यटन की अपार संभावनाएं
बड़े शहरों में स्थित नदियां और इनके किनारे सैर सपाटे का केंद्र बने हैं। पार्क के रूप में बच्चे मोटरबोट और फाउंटेन का आनंद लेते हैं। उल्ल नदी भी अपने अंतर में पर्यटन की तमाम संभावनाओं को समेटे है। महेवागंज के अमकोटा, कुल्हौरी, सिंगारपुर, सिकंदरपुर, बनवारीपुर, बालूडीह के किनारों से होकर नदी शहर में सेठघाट और रामघाट के किनारे बहती है। अन्य शहरों की तरह उल्ल नदी और इसके किनारों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की संभावना लोगों के मन में हिलोर ले रही हैं। उल्ल नदी की साफ सफाई कर शहर के निकट इसके किनारे एक खूबसूरत पिकनिक स्पाट विकसित किया जा सकता है। जहां हरा भरा पार्क पार्क बनाया जा सकता है और नदी में मोटर बोट और पैडस्टल बोट डाली जा सकती हैं। इससे शहर और आसपास के लोग हरियाली का आनंद उठाने के साथ नौका विहार का भी आनंद ले सकते हैं।
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