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Lakhimpur Kheri News: नोटिस ने कराया चुनाव बहिष्कार... 800 में से सिर्फ 22 वोट पड़े

Fri, 07 Jun 2024 03:34 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 07 Jun 2024 03:34 AM IST
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Notice led to election boycott... only 22 votes out of 800 were cast
महेश प्रसाद
लखीमपुर खीरी। गांव खाली करने के वन विभाग के नोटिस से नाराज लोगों ने धौरहरा लोकसभा चुनाव में मतदान का बहिष्कार कर दिया। यहां के बूथ नं 360 और 361 पर 800 वोटों में से महज 22 वोट पड़े थे। इसका खुलासा मतगणना की रिपोर्ट से हुआ है। ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार का एलान कई माह पहले किया था, लेकिन जिला प्रशासन उन्हें मनाने में विफल साबित रहा।
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फुसही गौढ़ी गांव के ग्रामीणों के मुताबिक, 22 वोट प्रशासन ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, शिक्षामित्रों और कोटेदार से डलवाए थे। यहां करीब 218 परिवारों के 800 मतदाताओं ने पूरी तरह चुनाव बहिष्कार किया था। चुनाव बहिष्कार का मुख्य कारण 2022 में वन विभाग की ओर से गांव उजाड़ने के लिए जारी किया गया नोटिस है। वन विभाग लगातार सुप्रीम कोर्ट का हवाला देकर यहां के ग्रामीणों को बेदखल करना चाहता है। इसी वजह से ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार कर गुस्से का इजहार किया।
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आजादी के पहले से ही बसे हैं कटान पीड़ित
धौरहरा तहसील क्षेत्र का फुसही गौढ़ी गांव आजादी के पहले से आबाद है। यहां के निवासियों के पूर्वज नदी कटान से विस्थापित हैं। य लोग पड़ोसी जिले बहराइच, पीलीभीत से आकर 1947 में बस गए थे। गांव में सरकार ने इन्हें बुनियादी सुविधाओं के नाम पर स्कूल, बिजली आदि भी दिए। 2022 में अचानक सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर वन विभाग ने अपनी जमीन बताकर गांव खाली कराने का नोटिस जारी कर दिया। ग्रामीणों ने 13 जून 22 को तत्कालीन धौरहरा एसडीएम धीरेंद्र कुमार सिंह को गांव बचाने की गुहार लगाते हुए प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन एसडीएम ने हाथ खड़े कर दिए थे। वन विभाग ने धारा 20 का हवाला देते हुए 218 ग्रामीणों को नोटिस जारी कर गांव में मुनादी कराकर गांव खाली कराने का आदेश जारी किया था। गांव के स्कूल में भी बेदखली का नोटिस चस्पा किया गया था।
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उजाड़ने पर तुला वन विभाग... इसलिए किया बहिष्कार

मेरी उम्र 75 साल की हो गई है। इसी गांव में पैदा हुए मेरे पिता-माता को सरकार ने यहां बसाया था। तबसे रह रहे हैं। अब वन विभाग इस जमीन को अपनी बताकर हमें उजाड़ने पर तुला है। कोई नहीं सुन रहा, इसलिए चुनाव बहिष्कार किया। - महेश प्रसाद
78 वर्ष उम्र हो गई है। हमारे पिता को मल्लापुर स्टेट के राजा ने बसाया था। तबसे हम लोग गांव में रह रहे हैं। अब वन विभाग हमारे गांव को अपनी जमीन बताकर हमें उजाड़ना चाहता है। चुनाव बहिष्कार सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने की कोशिश था। - रामेश्वर दयाल
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मैं अपने पिता के साथ 1950 में गांव आया था, तब से यहीं रह रहा हूं। अब वन विभाग उजाड़ रहा है। ऐसे में हम कहां जाएं। हम सभी को कहीं रहने की जगह तो दी जाए। फिर गांव उजाड़ दीजिए। पर कोई नहीं सुन रहा, इसलिए चुनाव बहिष्कार किया। - राम जनम

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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वन भूमि चिह्नित की गई है। फुसही गौढ़ी गांव वन विभाग की भूमि पर आबाद है। सभी को वर्ष 2022 में नोटिस जारी किया गया था, अब क्या स्थिति है, जानकारी नहीं ।
- नृपेंद्र चतुर्वेदी, क्षेत्रीय वनाधिकारी धौरहरा

महेश प्रसाद

महेश प्रसाद

महेश प्रसाद

महेश प्रसाद

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