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Lakhimpur Kheri News: परियोजना बहने का नहीं लिया संज्ञान, अब बंबू क्रेट भी घाघरा नदी में समाए

Wed, 04 Sep 2024 03:53 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 04 Sep 2024 03:53 AM IST
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No cognizance was taken of the project getting washed away, now even bamboo crates have submerged in Ghaghra river
घाघरा नदी में समा रहे बंबू क्रेट   संवाद
धौरहरा। क्षेत्र के माथुरपुर और अन्य गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए पौने छह करोड़ की लागत से बनी परियोजना के घाघरा नदी में बह जाने के बावजूद विभाग की ओर से अब तक कोई संज्ञान नहीं लिया गया है। जांच की बात कहकर अधिकारी पल्ला झाड़ रहे हैं। अब कटान स्थलों पर लगे बंबू क्रेट और कटान रोधी बोरियां भी घाघरा नदी में समाने लगी हैं।
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माथुरपुर गांव को बाढ़ से बचाने के लिए वर्ष 2021-22 में पौने छह करोड़ की लागत से बाढ़ खंड के ठेकेदारों ने 780 मीटर लंबा बांध घाघरा नदी के तट पर बनाया था। यह बांध पहली बारिश में ही नदी में समा गया था। ग्रामीणों के मुताबिक, नदी बांध के करीब पांच सौ मीटर भू-भाग का कटान कर गांव को जद में ले चुकी है। इस मामले में विभाग की ओर से अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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माथुरपुर गांव नदी की जद में आने पर डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने अधिशासी अभियंता बांध खंड के अधिकारियों की फटकार लगाकर तेजी से काम करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद तीन दिन तक बाढ़ खंड ने छह जेसीबी और कई मजदूर लगाकर कटान रोधी कार्य कराया, जिसका परिणाम दिखा और कटान भी कम हो गया। हालांकि तीसरे दिन नदी की धार बढ़ने से अब कटानरोधी बंबू क्रेट सहित रेत की बोरियां नदी में समाने लगी हैं। अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड अजय कुमार ने बताया कि नदी की तेज धार में बंबू क्रेट बह रहे हैं। टीम बचाव कार्य में जुटी है।
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परियोजना ही नहीं बची तो गांव कैसे बचेगा

जब बांध बन रहा था, तब लगा था कि सरकार गांव को नदी की जद में जाने से बचा लेगी, लेकिन बांध के ही नदी में समा जाने से यह उम्मीद भी खत्म हो गई। अब गांव फिर नदी की जद में है। अब हम सब कैसे बचेंगे। बांध निर्माण की जांच हो, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। - सोहनलाल, कटान पीड़ित, माथुरपुर



नदी को घर की ओर बढ़ता देख आंखों से नींद गायब हो गई है। डर लगा रहता है कि कब घर नदी में समा जाए। यदि बांध सही बना होता तो नदी कटान नहीं करती और अब यह बचाव कार्य भी नहीं करना पड़ता। अधिकारियों के औपचारिकता निभाने के कारण ही करोड़ों रुपये पर पानी फिर गया। - कमलादेवी, माथुरपुर



नदी में खेत कट चुके हैं। अब घर भी कटने वाला है। सरकारी अफसर आते हैं और गांव को कटान से बचा लेने का आश्वासन देते हैं। इससे कुछ उम्मीद बंधती है, पर नदी का कटान देख फिर मन घबराने लगता है। बांध पहले बना था, यदि सही बना होता तो शायद गांव बच जाता। - राम दुलारी, माथुरपुर



विधायक बोले- मानकों का नहीं रखा गया ध्यान
माथुरपुर परियोजना का बांध बनाने में जरूर लापरवाही हुई है। यदि मानकों का ध्यान रखा जाता तो शायद बांध नहीं कटता। कार्यदायी संस्था और ठेकेदार पर कार्रवाई होनी चाहिए। मुख्यमंत्री को इस संबंध में अवगत कराएंगे। - विनोद शंकर अवस्थी, विधायक धौरहरा


अभी ठेकेदार को भुगतान नहीं हुआ है। लापरवाही किस स्तर पर हुई। उसकी जांच चल रही है। ठेकेदार पर फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं हुई है। - अजय कुमार, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड शारदा नगर

घाघरा नदी में समा रहे बंबू क्रेट   संवाद

घाघरा नदी में समा रहे बंबू क्रेट   संवाद

घाघरा नदी में समा रहे बंबू क्रेट   संवाद

घाघरा नदी में समा रहे बंबू क्रेट   संवाद

घाघरा नदी में समा रहे बंबू क्रेट   संवाद

घाघरा नदी में समा रहे बंबू क्रेट   संवाद

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