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धार्मिक आयोजन नहीं, सांस्कृतिक विरासत है रामलीला
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
Updated Sun, 02 Oct 2016 12:09 AM IST
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ramlila
- फोटो : amar ujala
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152 वर्षों से हो रही रामलीला में नहीं आया कोई बदलाव
दर्शकों में कमी, लेकिन कम नहीं हुआ लोगों का जुड़ाव
लखीमपुर की रामलीला महज एक धार्मिक आयोजन नहीं, 152 वर्ष पुरानी परंपरा है। जिले की महान सांस्कृतिक विरासत है। इस रामलीला से लोगों का जो जुड़ाव आज से 152 साल पहले 1864 में हुआ था, वह आज भी कायम है। यह रामलीला शहर के युवाओं और बच्चों की अभिनय और कला प्रतिभा को दर्शाती है। बिना किसी प्रशिक्षण और पूर्वाभ्यास के वर्ष में एक बार रामलीला के अभिनय को अंजाम देते हैं ये लोग।
मनोरंजन के आधुनिक साधनों के विकास, और रोजी रोटी की जद्दोजहद में भागदौड़ के बीच लोगों में रामलीला का क्रेज भले कम हुआ हो लेकिन जुड़ाव कम नहीं हुआ। भले ही शहर के लोग रामलीला रोज देखने न जाते हों लेकिन उन्हें वर्ष भर इस रामलीला का इंतजार रहता है। आयोजक इसे धार्मिक आयोजन के रूप में करते आ रहे हैं लेकिन वास्तव में यह जिले की सांस्कृतिक विरासत बन चुकी है। यह जिले की सांस्कृतिक पहचान भी है।
लखीमपुर शहर को बसे 200 साल से ज्यादा नहीं हुए है। जबकि यहां डेढ़ दशक से यह रामलीला हो रही है। एक समय वह था जब रामलीला के समय शहर के लोगों के घर मेहमानों से भर जाया करते थे। आयोजक रामलीला की तैयारी में जुटते थे तो शहर के लोग मेहमानों के स्वागत सत्कार की तैयारी में। 152 साल में यहां की रामलीला में कोई व्यवधान नहीं आया। पीढ़ी दर पीढ़ी रामलीला की वहीं परंपरा आज भी कायम है।
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कभी रावण वध के दिन बनते थे दर्जनों मचान
आज से करीब चालीस साल पहले तक रामलीला में भारी भीड़ जुटती थी। अफसरों और अन्य विशिष्टजनों का परिवार आसानी से रावण वध का मंचन देख सकें इसके लिए रामलीला मैदान में दर्जनों की संख्या में मचान बनाए जाते थे। इसके अलावा मेला मैदान के चारों ओर बने घरों की छतों पर दर्शकों की भीड़ जमा हो जाती थी।
रामलीला मैदान से हटकर दूसरी जगह भी होती हैं लीलाएं
12 दिनों तक चलने वाली रामलीला में कुछ लीलाएं ऐसी भी है जो रामलीला मैदान से हटकर दूसरी जगह होती हैं। जैसे पुष्प वाटिका की लीला शहर के गुड़मंडी में, नौका लीला सेठ घाट पर और भरत मिलाप का कार्यक्रम पुरानी गल्ला मंडी में होता है। यह परंपरा भी रामलीला शुरू होने के बाद से ही चली आ रही है। इससे शहर के सभी लोगों के जुड़ाव का दर्शन होता है।
गणेश पूजन और ध्वजारोहण के साथ रामलीला शुरू
लखीमपुर खीरी। गणेश पूजन और ध्वजारोहण के साथ जिले की ऐतिहासिक रामलीला शनिवार को शुरू हो गई। सुबह मथुरा भवन में गणेश पूजा के साथ रामलीला के पात्रों की पूजा अर्चना गया प्रसाद सेठ ट्रस्ट के सरवराकर विपुल सेठ समेत परिवार के सदस्यों ने की। यहां रामलीला शारदीय नवरात्र के पहले दिन से शुरू होकर 12 दिनों तक चलती है।
दोपहर बाद मथुरा भवन से देवी-देवताओं की सवारी शहर में निकाली गई। यह सवारियां शहर में भ्रमण करती हुई रामलीला मैदान पहुंचीं। मेला मैदान में भूमि पूजन और ध्वजारोहण के साथ रामलीला का शुभारंभ हुआ। रात में मथुरा भवन में धार्मिक नाटक का मंचन किया गया। रामलीला में दो अक्तूबर को राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के जन्म की लीला होगी।
ध्वजारोहण के साथ श्रीरामलीला मेला शुरू
मोहम्मदी। नगर पालिका परिषद के तत्वावधान में मेला श्रीरामलीला का शुभारंभ ध्वजारोहण, गणेश जी की मूर्ति की स्थापना तथा हवन पूजन के साथ शुरू हुआ।
पालिकाध्यक्ष श्रीमती दुर्गा मेहरोत्रा की अध्यक्षता में संपन्न धार्मिक अनुष्ठान में ईओ अवधेश बाजपेई, पूर्व अध्यक्ष नपाप संदीप मेहरोत्रा, सदस्य राम सिंह, मानस त्रिवेदी, शिशिर गुप्ता, सुशीला वर्मा, योगेश श्रीवास्तव, गौरव दीक्षित, सर्वेश, अमित राठौर, निशारानी, रामदेवी, विनीता मिश्रा, रामनाथ, राधेश्याम यादव, रूपा सक्सेना, डॉ भूपेंद्र सिंह, अरुण आजाद, मोहम्मद सरताज, नासिर, मारूफ के अलावा अवर अभियंता सुरेश मिश्रा, नपाप कर्मचारी सुशील रस्तोगी, के एल कुशवाहा, आनंद प्रकाश सहित तमाम नागरिक मौजूद रहे। कल दो अक्तूबर को शंकर पार्वती विवाह की शोभा यात्रा निकाली जाएगी।
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दर्शकों में कमी, लेकिन कम नहीं हुआ लोगों का जुड़ाव
लखीमपुर की रामलीला महज एक धार्मिक आयोजन नहीं, 152 वर्ष पुरानी परंपरा है। जिले की महान सांस्कृतिक विरासत है। इस रामलीला से लोगों का जो जुड़ाव आज से 152 साल पहले 1864 में हुआ था, वह आज भी कायम है। यह रामलीला शहर के युवाओं और बच्चों की अभिनय और कला प्रतिभा को दर्शाती है। बिना किसी प्रशिक्षण और पूर्वाभ्यास के वर्ष में एक बार रामलीला के अभिनय को अंजाम देते हैं ये लोग।
मनोरंजन के आधुनिक साधनों के विकास, और रोजी रोटी की जद्दोजहद में भागदौड़ के बीच लोगों में रामलीला का क्रेज भले कम हुआ हो लेकिन जुड़ाव कम नहीं हुआ। भले ही शहर के लोग रामलीला रोज देखने न जाते हों लेकिन उन्हें वर्ष भर इस रामलीला का इंतजार रहता है। आयोजक इसे धार्मिक आयोजन के रूप में करते आ रहे हैं लेकिन वास्तव में यह जिले की सांस्कृतिक विरासत बन चुकी है। यह जिले की सांस्कृतिक पहचान भी है।
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लखीमपुर शहर को बसे 200 साल से ज्यादा नहीं हुए है। जबकि यहां डेढ़ दशक से यह रामलीला हो रही है। एक समय वह था जब रामलीला के समय शहर के लोगों के घर मेहमानों से भर जाया करते थे। आयोजक रामलीला की तैयारी में जुटते थे तो शहर के लोग मेहमानों के स्वागत सत्कार की तैयारी में। 152 साल में यहां की रामलीला में कोई व्यवधान नहीं आया। पीढ़ी दर पीढ़ी रामलीला की वहीं परंपरा आज भी कायम है।
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कभी रावण वध के दिन बनते थे दर्जनों मचान
आज से करीब चालीस साल पहले तक रामलीला में भारी भीड़ जुटती थी। अफसरों और अन्य विशिष्टजनों का परिवार आसानी से रावण वध का मंचन देख सकें इसके लिए रामलीला मैदान में दर्जनों की संख्या में मचान बनाए जाते थे। इसके अलावा मेला मैदान के चारों ओर बने घरों की छतों पर दर्शकों की भीड़ जमा हो जाती थी।
रामलीला मैदान से हटकर दूसरी जगह भी होती हैं लीलाएं
12 दिनों तक चलने वाली रामलीला में कुछ लीलाएं ऐसी भी है जो रामलीला मैदान से हटकर दूसरी जगह होती हैं। जैसे पुष्प वाटिका की लीला शहर के गुड़मंडी में, नौका लीला सेठ घाट पर और भरत मिलाप का कार्यक्रम पुरानी गल्ला मंडी में होता है। यह परंपरा भी रामलीला शुरू होने के बाद से ही चली आ रही है। इससे शहर के सभी लोगों के जुड़ाव का दर्शन होता है।
गणेश पूजन और ध्वजारोहण के साथ रामलीला शुरू
लखीमपुर खीरी। गणेश पूजन और ध्वजारोहण के साथ जिले की ऐतिहासिक रामलीला शनिवार को शुरू हो गई। सुबह मथुरा भवन में गणेश पूजा के साथ रामलीला के पात्रों की पूजा अर्चना गया प्रसाद सेठ ट्रस्ट के सरवराकर विपुल सेठ समेत परिवार के सदस्यों ने की। यहां रामलीला शारदीय नवरात्र के पहले दिन से शुरू होकर 12 दिनों तक चलती है।
दोपहर बाद मथुरा भवन से देवी-देवताओं की सवारी शहर में निकाली गई। यह सवारियां शहर में भ्रमण करती हुई रामलीला मैदान पहुंचीं। मेला मैदान में भूमि पूजन और ध्वजारोहण के साथ रामलीला का शुभारंभ हुआ। रात में मथुरा भवन में धार्मिक नाटक का मंचन किया गया। रामलीला में दो अक्तूबर को राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के जन्म की लीला होगी।
ध्वजारोहण के साथ श्रीरामलीला मेला शुरू
मोहम्मदी। नगर पालिका परिषद के तत्वावधान में मेला श्रीरामलीला का शुभारंभ ध्वजारोहण, गणेश जी की मूर्ति की स्थापना तथा हवन पूजन के साथ शुरू हुआ।
पालिकाध्यक्ष श्रीमती दुर्गा मेहरोत्रा की अध्यक्षता में संपन्न धार्मिक अनुष्ठान में ईओ अवधेश बाजपेई, पूर्व अध्यक्ष नपाप संदीप मेहरोत्रा, सदस्य राम सिंह, मानस त्रिवेदी, शिशिर गुप्ता, सुशीला वर्मा, योगेश श्रीवास्तव, गौरव दीक्षित, सर्वेश, अमित राठौर, निशारानी, रामदेवी, विनीता मिश्रा, रामनाथ, राधेश्याम यादव, रूपा सक्सेना, डॉ भूपेंद्र सिंह, अरुण आजाद, मोहम्मद सरताज, नासिर, मारूफ के अलावा अवर अभियंता सुरेश मिश्रा, नपाप कर्मचारी सुशील रस्तोगी, के एल कुशवाहा, आनंद प्रकाश सहित तमाम नागरिक मौजूद रहे। कल दो अक्तूबर को शंकर पार्वती विवाह की शोभा यात्रा निकाली जाएगी।