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निघासन कांड: पीड़ित परिजन फैसले से नाखुश, बोले- हाईकोर्ट जाएंगे
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लखीमपुर खीरी। दो सगी बहनों की दुष्कर्म के बाद हत्या के केस में फैसला आने के बाद पीड़ित परिजन ने असंतुष्टि जताई है। भाई ने बताया कि वारदात में शामिल सभी छह लोगों ने उनकी बहन के साथ दरिंदगी की थी, लेकिन अदालत ने सिर्फ सुनील उर्फ छोटू और जुनैद को ही उम्रकैद की सजा सुनाई है। जबकि करीमुद्दीन और आरिफ को कम सजा मिली। परिजनों ने कहा कि सभी छह लोगों को फांसी की सजा होनी चाहिए। वे उच्च न्यायालय में अपील करेंगे।
परिजनों ने कहा कि विवेचना में एससी-एसटी एक्ट की धारा हटाई गई है। सभी आरोपियों से धारा 34 भी हटा दी गई। जबकि, एकराय होकर आपराधिक कृत्य को अंजाम दिया गया है। एससीएसटी एक्ट की धारा हटाने पर परिजनों ने सवाल किया कि वह अनुसूचित जाति के नहीं हैं, तो कौन हैं। परिजनों ने कहा कि वे कोर्ट से गुजारिश करते हैं कि उन्हें बताया जाए- एससी-एसटी की धारा क्यों हटाई गई है। यही मांग है कि सभी छह लोगों को फांसी हो। अब वह हाईकोर्ट का सहारा लेंगे।
स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में फास्ट ट्रैक कोर्ट की तर्ज पर हुई सुनवाई
एडीजे की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने पिछले साल 14 सितंबर 2022 को हुई इस वीभत्स घटना में 10 महीने 27 दिन तक सुनवाई की। 12 अगस्त शुक्रवार को एडीजे राहुल सिंह प्रथम ने कुल गिरफ्तार छह आरोपियों में चार को दोषी सिद्ध किया था। इसमेंं अदालत ने मुख्य रूप से सुनील उर्फ छोटू और जुनैद को दुष्कर्म के बाद हत्या का दोषी पाया, जबकि दो आरिफ और करीमुद्दीन को सबूत छिपाने व शव को लटकाने में मदद का दोषी पाया। करीब 11 महीने तक चली इस सुनवाई में परिजन समेत 15 लोगों की गवाही हुई थी। 24 दस्तावेजी साक्ष्य सौंपे गए थे। 40 वस्तुजनित साक्ष्य सौंपे गए थे। दोनों बहनों की पीएम रिपोर्ट, आयु प्रमाण पत्र, दोनों बहनों के कपड़ों को बतौर साक्ष्य शामिल किया गया। एक साल के अंदर ही निघासन कांड में जल्द सुनवाई पूरी कर पॉक्सो अदालत ने मामले में सजा का एलान किया।
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मां के सामने दोनों बहनों को अगवा कर ले गए थे आरोपी
14 सितंबर 2022 को मां के सामने ही आरोपी अनुसूचित जाति की दोनों बहनों को अपनी बाइक पर बिठाकर अगवा कर ले गए थे और दुष्कर्म के बाद उनकी हत्या कर दी थी। आत्महत्या दिखाने के लिहाज से शव को पेड़ से लटकाकर आरोपी भाग गए थे। पीएम रिपोर्ट में दोनों के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद गला दबाकर हत्या की बात सामने आई थी। पुलिस ने आरिफ, छोटू, करीमुद्दीन और जुनैद समेत छह आरोपियों को मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार किया था। इनमें से दो नाबालिग हैं। छोटू के अलावा अन्य सभी आरोपी मृतका के पड़ोस के गांव के ही थे। मामले में 15 सितंबर को मुकदमा दर्ज करने के 14 दिन के अंदर ही 28 सितंबर को पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की थी।
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परिजनों ने कहा कि विवेचना में एससी-एसटी एक्ट की धारा हटाई गई है। सभी आरोपियों से धारा 34 भी हटा दी गई। जबकि, एकराय होकर आपराधिक कृत्य को अंजाम दिया गया है। एससीएसटी एक्ट की धारा हटाने पर परिजनों ने सवाल किया कि वह अनुसूचित जाति के नहीं हैं, तो कौन हैं। परिजनों ने कहा कि वे कोर्ट से गुजारिश करते हैं कि उन्हें बताया जाए- एससी-एसटी की धारा क्यों हटाई गई है। यही मांग है कि सभी छह लोगों को फांसी हो। अब वह हाईकोर्ट का सहारा लेंगे।
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स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में फास्ट ट्रैक कोर्ट की तर्ज पर हुई सुनवाई
एडीजे की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने पिछले साल 14 सितंबर 2022 को हुई इस वीभत्स घटना में 10 महीने 27 दिन तक सुनवाई की। 12 अगस्त शुक्रवार को एडीजे राहुल सिंह प्रथम ने कुल गिरफ्तार छह आरोपियों में चार को दोषी सिद्ध किया था। इसमेंं अदालत ने मुख्य रूप से सुनील उर्फ छोटू और जुनैद को दुष्कर्म के बाद हत्या का दोषी पाया, जबकि दो आरिफ और करीमुद्दीन को सबूत छिपाने व शव को लटकाने में मदद का दोषी पाया। करीब 11 महीने तक चली इस सुनवाई में परिजन समेत 15 लोगों की गवाही हुई थी। 24 दस्तावेजी साक्ष्य सौंपे गए थे। 40 वस्तुजनित साक्ष्य सौंपे गए थे। दोनों बहनों की पीएम रिपोर्ट, आयु प्रमाण पत्र, दोनों बहनों के कपड़ों को बतौर साक्ष्य शामिल किया गया। एक साल के अंदर ही निघासन कांड में जल्द सुनवाई पूरी कर पॉक्सो अदालत ने मामले में सजा का एलान किया।
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मां के सामने दोनों बहनों को अगवा कर ले गए थे आरोपी
14 सितंबर 2022 को मां के सामने ही आरोपी अनुसूचित जाति की दोनों बहनों को अपनी बाइक पर बिठाकर अगवा कर ले गए थे और दुष्कर्म के बाद उनकी हत्या कर दी थी। आत्महत्या दिखाने के लिहाज से शव को पेड़ से लटकाकर आरोपी भाग गए थे। पीएम रिपोर्ट में दोनों के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद गला दबाकर हत्या की बात सामने आई थी। पुलिस ने आरिफ, छोटू, करीमुद्दीन और जुनैद समेत छह आरोपियों को मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार किया था। इनमें से दो नाबालिग हैं। छोटू के अलावा अन्य सभी आरोपी मृतका के पड़ोस के गांव के ही थे। मामले में 15 सितंबर को मुकदमा दर्ज करने के 14 दिन के अंदर ही 28 सितंबर को पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की थी।