{"_id":"576947f34f1c1bb50ab4843a","slug":"negligence-of-officers-heavily-on-rural-development","type":"story","status":"publish","title_hn":"अफसरों की लापरवाही गांवों के विकास पर भारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अफसरों की लापरवाही गांवों के विकास पर भारी
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Tue, 21 Jun 2016 10:07 PM IST
विज्ञापन
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
14वें वित्त की कार्ययोजनाओं का नहीं हुआ अनुमोदन
साफ्टवेयर प्लान प्लस पर क्रियान्वयन में हो रही देरी
ग्राम पंचायतों के गठन के छह माह बीत चुके हैं, लेकिन अभी गांवों में विकास का पहिया घूम नहीं सका है। 14वें वित्त की कार्ययोजनाओं का अनुमोदन नहीं हो सका है। ब्लाक से डीपीआरओ कार्यालय के बीच ही कार्ययोजनाओं की फाइलें अटकी हैैं। जबकि डीएम के अनुमोदन के पश्चात ही गांवों में 14वें वित्त की धनराशि से विकास कार्यों की शुरुआत का रास्ता साफ हो सकेगा। हालांकि कार्यों की शुरुआत से पहले एक्शन साफ्ट और प्लान प्लस साफ्टवेयर पर कार्यों की आईडी जनरेट करने के अलावा कार्ययोजना अपलोड करना होगा, जिसके लिए अभी कार्य शुरू नहीं हो सका है।
केंद्र सरकार की ओर से लागू किए गए नए मसौदे के मुताबिक 14वें वित्त आयोग से प्राप्त धनराशि का व्यय करने से पहले ग्राम पंचायत विकास योजना तैयार की जाएगी। ग्राम पंचायतों की ओर से तैयार कार्ययोजना को ब्लाक पर एडीओ पंचायत संकलित कर डीएम से अनुमोदन प्राप्त करेंगे। इसके बाद एक्शन साफ्ट और प्लान प्लस साफ्टवेयर पर कार्यों की आईडी जनरेट करने के अलावा कार्ययोजना अपलोड करना अनिवार्य हैै। इसके बाद ही गांवों में पेयजल सुविधा, स्वच्छता, सेप्टिक प्रबंधन, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, बाढ़ के पानी की निकासी, सामुदायिक संपत्तियों के रख-रखाव, सड़क एवं फुटपाथ के रख-रखाव, स्ट्रीट लाइट आदि कार्यों पर धनराशि व्यय की जा सकती हैै। छह माह पहले नवगठित ग्राम पंचायतों में 14वें वित्त आयोग की धनराशि का उपभोग नहीं हो पा रहा है। पहले तो कार्ययोजना बनाने में लापरवाही बरती गई, जिसके बाद आला अधिकारियों के निर्देश भी बेअसर हो गए हैं। काफी मशक्कत केे बाद ग्राम पंचायतों से कार्ययोजनाएं ब्लाक स्तर पर एडीओ पंचायत ने संकलित कर डीपीआरओ कार्यालय भेज दिया है, लेकिन डीएम से अनुमोदन नहीं कराया जा सका है। इसके अलावा अन्य प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए विभागीय तंत्र तैयार नहीं हो सका है। मसलन प्लान प्लस साफ्टेवयर पर कार्ययोजना अपलोड कर वर्क आईडी जनरेट की जानी हैं, लेकिन इस कार्य के लिए आवश्यक संसाधन नहीं जुटाए गए हैं।
ब्लाकों पर नहीं हो सकी तैयारी
ब्लाक स्तर पर एडीओ पंचायत के नियंत्रण में एक एकाउंटेंट, एक कंप्यूटर आपरेटर और दो अवर अभियंता की तैनाती सेवा प्रदाता संस्था के माध्यम से मानदेय पर की जानी थी। अभी तक इस दिशा में कोई तैयारी नहीं की गई हैै। सिर्फ जिले पर जिला परियोजना प्रबंधक की तैनाती की गई है। लिहाजा ब्लाकों पर कार्ययोजना को अपलोड करने और आईडी जनरेट करने में संसाधनों की कमी आड़े आएगी। सूत्रों की माने तो विभागीय अफसर गांवों में तैनात सफाई कर्मियों से कंप्यूटर आपरेटर का कार्य लेने पर विचार कर रहे हैं।
विज्ञापन
ब्लाकों से कार्ययोजना संकलित होकर देर से मिली हैं, जिन्हें जल्द ही अनुमोदन के लिए डीएम के पास भेजा जाएगा। कंप्यूटर आपरेटर की नियुक्ति पर शासन स्तर से अभी रोक लगी हुई है।
-सुधीर कुमार श्रीवास्तव, डीपीआरओ
विज्ञापन
साफ्टवेयर प्लान प्लस पर क्रियान्वयन में हो रही देरी
ग्राम पंचायतों के गठन के छह माह बीत चुके हैं, लेकिन अभी गांवों में विकास का पहिया घूम नहीं सका है। 14वें वित्त की कार्ययोजनाओं का अनुमोदन नहीं हो सका है। ब्लाक से डीपीआरओ कार्यालय के बीच ही कार्ययोजनाओं की फाइलें अटकी हैैं। जबकि डीएम के अनुमोदन के पश्चात ही गांवों में 14वें वित्त की धनराशि से विकास कार्यों की शुरुआत का रास्ता साफ हो सकेगा। हालांकि कार्यों की शुरुआत से पहले एक्शन साफ्ट और प्लान प्लस साफ्टवेयर पर कार्यों की आईडी जनरेट करने के अलावा कार्ययोजना अपलोड करना होगा, जिसके लिए अभी कार्य शुरू नहीं हो सका है।
केंद्र सरकार की ओर से लागू किए गए नए मसौदे के मुताबिक 14वें वित्त आयोग से प्राप्त धनराशि का व्यय करने से पहले ग्राम पंचायत विकास योजना तैयार की जाएगी। ग्राम पंचायतों की ओर से तैयार कार्ययोजना को ब्लाक पर एडीओ पंचायत संकलित कर डीएम से अनुमोदन प्राप्त करेंगे। इसके बाद एक्शन साफ्ट और प्लान प्लस साफ्टवेयर पर कार्यों की आईडी जनरेट करने के अलावा कार्ययोजना अपलोड करना अनिवार्य हैै। इसके बाद ही गांवों में पेयजल सुविधा, स्वच्छता, सेप्टिक प्रबंधन, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, बाढ़ के पानी की निकासी, सामुदायिक संपत्तियों के रख-रखाव, सड़क एवं फुटपाथ के रख-रखाव, स्ट्रीट लाइट आदि कार्यों पर धनराशि व्यय की जा सकती हैै। छह माह पहले नवगठित ग्राम पंचायतों में 14वें वित्त आयोग की धनराशि का उपभोग नहीं हो पा रहा है। पहले तो कार्ययोजना बनाने में लापरवाही बरती गई, जिसके बाद आला अधिकारियों के निर्देश भी बेअसर हो गए हैं। काफी मशक्कत केे बाद ग्राम पंचायतों से कार्ययोजनाएं ब्लाक स्तर पर एडीओ पंचायत ने संकलित कर डीपीआरओ कार्यालय भेज दिया है, लेकिन डीएम से अनुमोदन नहीं कराया जा सका है। इसके अलावा अन्य प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए विभागीय तंत्र तैयार नहीं हो सका है। मसलन प्लान प्लस साफ्टेवयर पर कार्ययोजना अपलोड कर वर्क आईडी जनरेट की जानी हैं, लेकिन इस कार्य के लिए आवश्यक संसाधन नहीं जुटाए गए हैं।
विज्ञापन
ब्लाकों पर नहीं हो सकी तैयारी
ब्लाक स्तर पर एडीओ पंचायत के नियंत्रण में एक एकाउंटेंट, एक कंप्यूटर आपरेटर और दो अवर अभियंता की तैनाती सेवा प्रदाता संस्था के माध्यम से मानदेय पर की जानी थी। अभी तक इस दिशा में कोई तैयारी नहीं की गई हैै। सिर्फ जिले पर जिला परियोजना प्रबंधक की तैनाती की गई है। लिहाजा ब्लाकों पर कार्ययोजना को अपलोड करने और आईडी जनरेट करने में संसाधनों की कमी आड़े आएगी। सूत्रों की माने तो विभागीय अफसर गांवों में तैनात सफाई कर्मियों से कंप्यूटर आपरेटर का कार्य लेने पर विचार कर रहे हैं।
विज्ञापन
ब्लाकों से कार्ययोजना संकलित होकर देर से मिली हैं, जिन्हें जल्द ही अनुमोदन के लिए डीएम के पास भेजा जाएगा। कंप्यूटर आपरेटर की नियुक्ति पर शासन स्तर से अभी रोक लगी हुई है।
-सुधीर कुमार श्रीवास्तव, डीपीआरओ