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छोटे-मोटे विवाद आपसी सुलह से सुलझाएं: एडीजे
सिकंद्राबाद
Updated Tue, 20 Jan 2015 07:21 PM IST
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रानी लक्ष्मीबाई कन्या इंटर कॉलेज शहाबुद्दीनपुर में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अपर जिला जज हाजी अशरफ अंसारी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। जबकि सीजीएम राम नरायन विशिष्ट अतिथि थे।
इस मौके पर अपर जिला जज हाजी अशरफ अंसारी ने कहा कि छोटे-छोटे मुकदमों को आपसी सुलह समझौते से निपटाना चाहिए। इससे समय और पैसे की बचत होती है। लोक अदालत के माध्यम से सुलह समझौते के आधार पर मुकदमों का निस्तारण किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि लोक अदालत में निस्तारित मुकदमों के फैंसले अंतिम होते हैं। इनके विरुद्ध कोई अपील नहीं होती है।
सीजीएम रामनरायन ने बताया कि भ्रूण लिंग की जांच कराना कानूनी अपराध है। भ्रूूण लिंग की जांच करने वाले व्यक्ति को तीन वर्ष का कारावास और 15 हजार रुपये का जुर्माना लग सकता है। जांच करवाने और करने वाले डॉक्टर और उसके अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है। उन्होंने यह भी बताया कि यदि किसी पीड़ित पक्षकार को अधिवक्ता करने की क्षमता नहीं है तो पीड़ित को पक्षकार प्राधिकरण से पैरवी के लिए नि:शुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराया जाता है। ताकि कोई गरीब व्यक्ति न्याय से वंचित न रह जाए।
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सिविल जज डीपी सिंह ने कहा कि प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए धारा 156/3 सीआरपीसी के तहत प्रार्थनापत्र दिया जा सकता है। वरिष्ठ अधिवक्ता मोहम्मद सईद ने कहा कि महिलाओं को अराजक तत्वों से निपटने के लिए महिला हेल्पलाइन 1090 का इस्तेमाल करना चाहिए। विद्यालय प्रबंधक संजय शर्मा ने विद्यालय का संक्षिप्त परिचय दिया। संचालन कर रहे संदीप वर्मा ने सभी से विधिक साक्षरता शिविर में बताई गई बातों पर अमल कर इसका लाभ उठाने को कहा।
कार्यक्रम में प्रधानाचार्य सर्वेश कुमार, प्राची वर्मा, प्राची वाजपेयी, हिना खान, महविश अंसारी, सीता कश्यप, अनुपमा सिंह, पूजा वर्मा, गोल्डी वर्मा, गुंजन गुप्ता, शिखा वर्मा, नीतू वर्मा, रेखा सक्सेना, तसमीन खान, सत्येंद्र वर्मा, सुशील वर्मा, अरविंद वर्मा आदि मौजूद रहे।
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इस मौके पर अपर जिला जज हाजी अशरफ अंसारी ने कहा कि छोटे-छोटे मुकदमों को आपसी सुलह समझौते से निपटाना चाहिए। इससे समय और पैसे की बचत होती है। लोक अदालत के माध्यम से सुलह समझौते के आधार पर मुकदमों का निस्तारण किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि लोक अदालत में निस्तारित मुकदमों के फैंसले अंतिम होते हैं। इनके विरुद्ध कोई अपील नहीं होती है।
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सीजीएम रामनरायन ने बताया कि भ्रूण लिंग की जांच कराना कानूनी अपराध है। भ्रूूण लिंग की जांच करने वाले व्यक्ति को तीन वर्ष का कारावास और 15 हजार रुपये का जुर्माना लग सकता है। जांच करवाने और करने वाले डॉक्टर और उसके अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है। उन्होंने यह भी बताया कि यदि किसी पीड़ित पक्षकार को अधिवक्ता करने की क्षमता नहीं है तो पीड़ित को पक्षकार प्राधिकरण से पैरवी के लिए नि:शुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराया जाता है। ताकि कोई गरीब व्यक्ति न्याय से वंचित न रह जाए।
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सिविल जज डीपी सिंह ने कहा कि प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए धारा 156/3 सीआरपीसी के तहत प्रार्थनापत्र दिया जा सकता है। वरिष्ठ अधिवक्ता मोहम्मद सईद ने कहा कि महिलाओं को अराजक तत्वों से निपटने के लिए महिला हेल्पलाइन 1090 का इस्तेमाल करना चाहिए। विद्यालय प्रबंधक संजय शर्मा ने विद्यालय का संक्षिप्त परिचय दिया। संचालन कर रहे संदीप वर्मा ने सभी से विधिक साक्षरता शिविर में बताई गई बातों पर अमल कर इसका लाभ उठाने को कहा।
कार्यक्रम में प्रधानाचार्य सर्वेश कुमार, प्राची वर्मा, प्राची वाजपेयी, हिना खान, महविश अंसारी, सीता कश्यप, अनुपमा सिंह, पूजा वर्मा, गोल्डी वर्मा, गुंजन गुप्ता, शिखा वर्मा, नीतू वर्मा, रेखा सक्सेना, तसमीन खान, सत्येंद्र वर्मा, सुशील वर्मा, अरविंद वर्मा आदि मौजूद रहे।