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मोहाना में समाने जा रहा एतिहासिक गुरुद्वारा भी
अमर उजाला ब्यूरो तिकुनियां।
Updated Tue, 23 Aug 2016 10:29 PM IST
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कटान
- फोटो : अमर उजाला
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- गांव जनकपुर की ओर तेजी से बढ़ रही मोहाना
- खेतों के कटान से कर्ज अदायगी को लेकर बढ़ी चिंता
नेपाल सीमा पर स्थित मोहाना नदी द्वारा जनकपुर में किया जा रहा कटान थमने का नाम नही ले रहा है। नदी का रुख ग्राम जनकपुर और ऐतिहासिक कौड़ियाला गुरुद्वारा की ओर होने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन ने अभी तक कोई बंदोबस्त नहीं किया है।
बार्डर पर बह रही मोहाना नदी में नेपाल की करनाली नदी का पानी दोबारा आना शुरू हो गया है। जिससे नदी के कटान की गति तेज हो गई है। किसानों की धान और गन्ने की फसल नदी में समाती जा रही है। गांव के किसान चुन्ना, कमलेश, महेश, जगदंबा, नीरज ने बताया कि बड़ी मेहनत से कर्ज लेकर फसल लगाई थी। अब नदी में खेत कट रहा है। जिससे कर्ज की अदायगी को लेकर उनकी चिंता बढ़ने लगी है। किसान अपनी फसल को काटकर चारे के रूप में पशुओं को खिला रहे हैं। किसानों ने बताया कि प्रशासन को कटान की सूचना दी जा चुकी है, इसके बाद भी कटान रोकने का कोई बंदोबस्त नहीं किया गया है। उधर, नदी का रुख कौड़ियाला गुरुद्वारा की ओर हो जाने से सिक्ख समाज में चिंता बढ़ गई है। गुरुद्वारे के कारसेवक ज्ञानी गुरुभेज सिंह ने बताया कि कटान को रोकने के लिए सिख समाज के लोग डीएम से मिलने शीघ्र लखीमपुर जाएंगे।
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- खेतों के कटान से कर्ज अदायगी को लेकर बढ़ी चिंता
नेपाल सीमा पर स्थित मोहाना नदी द्वारा जनकपुर में किया जा रहा कटान थमने का नाम नही ले रहा है। नदी का रुख ग्राम जनकपुर और ऐतिहासिक कौड़ियाला गुरुद्वारा की ओर होने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन ने अभी तक कोई बंदोबस्त नहीं किया है।
बार्डर पर बह रही मोहाना नदी में नेपाल की करनाली नदी का पानी दोबारा आना शुरू हो गया है। जिससे नदी के कटान की गति तेज हो गई है। किसानों की धान और गन्ने की फसल नदी में समाती जा रही है। गांव के किसान चुन्ना, कमलेश, महेश, जगदंबा, नीरज ने बताया कि बड़ी मेहनत से कर्ज लेकर फसल लगाई थी। अब नदी में खेत कट रहा है। जिससे कर्ज की अदायगी को लेकर उनकी चिंता बढ़ने लगी है। किसान अपनी फसल को काटकर चारे के रूप में पशुओं को खिला रहे हैं। किसानों ने बताया कि प्रशासन को कटान की सूचना दी जा चुकी है, इसके बाद भी कटान रोकने का कोई बंदोबस्त नहीं किया गया है। उधर, नदी का रुख कौड़ियाला गुरुद्वारा की ओर हो जाने से सिक्ख समाज में चिंता बढ़ गई है। गुरुद्वारे के कारसेवक ज्ञानी गुरुभेज सिंह ने बताया कि कटान को रोकने के लिए सिख समाज के लोग डीएम से मिलने शीघ्र लखीमपुर जाएंगे।
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