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आदर्श तालाब ही नहीं दस्तावेज भी गुम

Fri, 08 May 2015 07:16 PM IST
लखीमपुर खीरी
लखीमपुर खीरी Updated Fri, 08 May 2015 07:16 PM IST
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बसपा सरकार के शासनकाल में ग्रामीण अंचलों में मनरेगा के तहत ग्राम पंचायतों में खुदवाए गए आदर्श तालाब तो गुम हो ही गए हैं, वहीं सरकारी विभागों से इन तालाबों के आंकड़े भी गायब हैं। विकास भवन में मनरेगा सेल, जिला विकास विभाग, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, मत्स्य समेत कई विभागों के पास आदर्श तालाबों की गिनती तक नहीं है। इससे वर्ष 2006-07 में शुरू की गई आदर्श तालाबों की स्थापना और उनके सौंदर्यीकरण की मुहिम न सिर्फ फाइलों में कैद हो गई, बल्कि हालात यह है कि विकास भवन में आदर्श तालाबों के  दस्तावेज भी ढूंढे नहीं मिल रहे हैं।
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भीषण गर्मी और धूप के कारण जिले के अधिकतर क्षेत्रों में अभी से पानी की समस्या गहराने लगी है। जिले में आदर्श तालाब सूख ही नहीं गए हैं, बल्कि इनका वजूद भी समाप्त हो गया है। इससे न सिर्फ लोगों बल्कि पानी के लिए पशु-पक्षियों को दिक्कताें का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में सूख चुके तालाबों की हालत यह है कि बच्चों ने इन्हें खेल का मैदान बना लिया है। इन तालाबों में प्रशासन की ओर से पानी भरने का भी इंतजाम नहीं किया गया है। बसपा सरकार में वर्ष 2006-07 में मनरेगा में करोड़ों रुपये खर्च कर जिले भर में आदर्श तालाब योजना शुरू की गई थी। वर्ष 2008-09 में योजना ने रफ्तार पकड़ी और उस समय जिले की सभी 995 ग्राम पंचायतों में आदर्श तालाबों की स्थापना और उनके सौंदर्यीकरण पर जोर दिया गया। वर्ष 2010-11 में जिले भर में तत्कालीन अधिकारियों ने पंचायतों में स्थलीय सत्यापन कर करीब 60 आदर्श तालाबों की स्थापना का काम पूरा होने की रिपोर्ट सौंपी थी, लेकिन मौजूदा समय में आदर्श तालाबों की तस्वीर क्या है, उनमें पानी है या नहीं, रखरखाव के क्या इंतजाम हैं। इन सब बिंदुओं को लेकर प्रशासनिक अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
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परियोजना निदेशक डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि आदर्श तालाबों की खुदाई का काम मनरेगा के तहत हुआ था, इसलिए इसकी जानकारी भी उपायुक्त मनरेगा के पास ही होनी चाहिए।
डीडीओ वीरेंद्र कुमार यादव ने बताय कि जिले में आदर्श तालाबों की कोई योजना विकास विभाग से संचालित नहीं होती। इस संबंध में उपायुक्त मनरेगा ही जानकारी रखते हैं।
एक तालाब पर खर्च हुए थे 30 लाख
ग्राम पंचायतों में आदर्श तालाब खुदवाने, पानी भरने और सौंदर्यीकरण पर मनरेगा में 30 से 35 लाख रुपये खर्च हुए थे। मंशा थी कि इससे लोगों को पानी की उपलब्धता रहेगी और गर्मी में दिक्कतों से नहीं जूझना पड़ेगा।
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कहीं घपले की भेंट तो नहीं चढ़ गए आदर्श तालाब !
करीब एक साल पहले मनरेगा में घोटाला प्रकाश में आने के बाद सीबीआई पूरे मामले की जांच कर रही है। घपले में खीरी जिला भी शामिल है। सीबीआई यहां से मनरेगा के तहत हुए कार्यों का दस्तावेज मंगवा चुकी है। ऐसे में सवाल खड़े हो गए हैं कि क्या आदर्श तालाबों की स्थापना भी कहीं घोटाले की भेंट तो नहीं चढ़ गई।  

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