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Lakhimpur Kheri News: मौसम बदलते ही अपने वतन लौटने लगे प्रवासी परिंदे
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दुधवा के झादीताल से उड़ान भरते प्रवासी पक्षी। स्रोत-डीटीआर।
बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व किशनपुर सेंक्चुरी के झादीताल में हजारों किलोमीटर की लंबी उड़ान भरकर आए प्रवासी परिंदे यहां तीन माह का प्रवास करने के बाद अब अपने वतन लौटने लगे हैं।
पक्षियों का लौटना अप्रैल के पहले सप्ताह से शुरू हुआ है। पक्षियों के कई झुंड उड़ान भर चुके हैं, जो बचे हैं वे वापसी की उड़ान भरने की तैयारी में हैं। दुधवा टाइगर रिजर्व की किशनपुर सेंक्चुरी के झादीताल, दुधवा के भादीताल समेत जंगल के सभी जलाशयों में हर साल मध्य एशिया और यूरोप के ठंडे देशों से विभिन्न प्रजातियों के पक्षी हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर तराई के जलाशयों में आते हैं।
यह पक्षी मध्य नवंबर से आना शुरू होते हैं। दिसंबर, जनवरी और फरवरी के महीने में दुधवा के सभी तालाबों और मैनहेन झील समेत सभी जलाशय रंग-बिरंगे परिंदों से गुलजार रहते हैं।
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इन पक्षियों की चहचहाहट से वातावरण गूंजता रहता है। तीन माह यहां प्रवास करने के बाद फरवरी के अंत से मार्च-अप्रैल के मध्य तक प्रवासी पक्षी अपने वतन लौट जाते हैं।
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पक्षियों का लौटना अप्रैल के पहले सप्ताह से शुरू हुआ है। पक्षियों के कई झुंड उड़ान भर चुके हैं, जो बचे हैं वे वापसी की उड़ान भरने की तैयारी में हैं। दुधवा टाइगर रिजर्व की किशनपुर सेंक्चुरी के झादीताल, दुधवा के भादीताल समेत जंगल के सभी जलाशयों में हर साल मध्य एशिया और यूरोप के ठंडे देशों से विभिन्न प्रजातियों के पक्षी हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर तराई के जलाशयों में आते हैं।
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यह पक्षी मध्य नवंबर से आना शुरू होते हैं। दिसंबर, जनवरी और फरवरी के महीने में दुधवा के सभी तालाबों और मैनहेन झील समेत सभी जलाशय रंग-बिरंगे परिंदों से गुलजार रहते हैं।
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इन पक्षियों की चहचहाहट से वातावरण गूंजता रहता है। तीन माह यहां प्रवास करने के बाद फरवरी के अंत से मार्च-अप्रैल के मध्य तक प्रवासी पक्षी अपने वतन लौट जाते हैं।