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मेगा ब्लाक से पहले ही डग्गामार वाहनों की भरमार
अमर उजाला ब्यूरो बांकेगंज।
Updated Wed, 12 Oct 2016 11:36 PM IST
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थमे रेल के पहिये
- फोटो : अमर उजाला
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गोला, बांकेगंज और कुकरा मार्ग पर वाहन चलाने के नाम पर वसूली
कस्बे से बरेली पीलीभीत, लखीमपुर, मैलानी, लखनऊ जाने का एकमात्र साधन ट्रेनें 15 अक्तूबर से मेगा ब्लाक के बाद बंद हो रहीं हैं। इससे दो दिन पहले ही इस मार्ग पर डग्गामार वाहनों की भरमार हो गई है। डग्गामार वाहनों के संचालन को लेकर वाहन स्वामियों में मारामारी मची हुई है। इसका फायदा उठाकर कुछ सफेदपोश लोगों के नाम पर अवैध वसूली भी शुरू कर दी है। बावजूद इसके पुलिस और परिवहन विभाग जानबूझ कर भी अनजान बना हुआ है।
बांकेगंज कस्बे को बरेली और लखनऊ से जोड़ने का एक मात्र साधन ट्रेन थी। इस मार्ग से कोई रोडवेज बस नहीं गुजरती। कुकरा, बांकेगंज और गोला के बीच प्राइवेट बसों के अलावा दर्जनों वैन और टेंपो का संचालन जरूर होता है, लेकिन इनका कोई समय तय नहीं है। 15 अक्तूबर से मीटरगेज ट्रेनों का संचालन बंद होने से यहां के बाशिंदों के सामने दिक्कतें बढ़ सकती है। आवागमन की दिक्कतों का फायदा उठाकर ट्रेनें बंद होने से पहले ही डग्गामार वाहनों का संचालन शुरू हो गया है। गोला से बांकेगंज और कुकरा के बीच डग्गामार वाहनों के संचालन की होड़ लग गई है। इसका फायदा उठाते हुए इलाके के कुछ दबंग लोगों में सफेदपोश के इशारों पर वसूली शुरू कर दी गई है। मार्केट के व्यापारियों का आरोप है कि इस मार्ग पर फर्राटे मारकर सरपट दौड़ते डग्गामार वाहनों की चपेट में आकर अक्सर लोग घायल हो जाते है। इसी मार्ग पर एक माह पहले रायपुर गांव के निकट अनियंत्रित बस पेड़ से टकरा गई थी। जिसमें बैठे कई यात्री गंभीर घायल हो गए थे। लोगों की शिकायत के बाद भी पुलिस और परिवहन विभाग ने संबधित के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की। सफेदपोशों के नाम का इस्तेमाल कर डग्गामार वाहन चालक बांकेगंज, कुकरा और गोला रूट पर चांदी काट रहे हैं।
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कस्बे से बरेली पीलीभीत, लखीमपुर, मैलानी, लखनऊ जाने का एकमात्र साधन ट्रेनें 15 अक्तूबर से मेगा ब्लाक के बाद बंद हो रहीं हैं। इससे दो दिन पहले ही इस मार्ग पर डग्गामार वाहनों की भरमार हो गई है। डग्गामार वाहनों के संचालन को लेकर वाहन स्वामियों में मारामारी मची हुई है। इसका फायदा उठाकर कुछ सफेदपोश लोगों के नाम पर अवैध वसूली भी शुरू कर दी है। बावजूद इसके पुलिस और परिवहन विभाग जानबूझ कर भी अनजान बना हुआ है।
बांकेगंज कस्बे को बरेली और लखनऊ से जोड़ने का एक मात्र साधन ट्रेन थी। इस मार्ग से कोई रोडवेज बस नहीं गुजरती। कुकरा, बांकेगंज और गोला के बीच प्राइवेट बसों के अलावा दर्जनों वैन और टेंपो का संचालन जरूर होता है, लेकिन इनका कोई समय तय नहीं है। 15 अक्तूबर से मीटरगेज ट्रेनों का संचालन बंद होने से यहां के बाशिंदों के सामने दिक्कतें बढ़ सकती है। आवागमन की दिक्कतों का फायदा उठाकर ट्रेनें बंद होने से पहले ही डग्गामार वाहनों का संचालन शुरू हो गया है। गोला से बांकेगंज और कुकरा के बीच डग्गामार वाहनों के संचालन की होड़ लग गई है। इसका फायदा उठाते हुए इलाके के कुछ दबंग लोगों में सफेदपोश के इशारों पर वसूली शुरू कर दी गई है। मार्केट के व्यापारियों का आरोप है कि इस मार्ग पर फर्राटे मारकर सरपट दौड़ते डग्गामार वाहनों की चपेट में आकर अक्सर लोग घायल हो जाते है। इसी मार्ग पर एक माह पहले रायपुर गांव के निकट अनियंत्रित बस पेड़ से टकरा गई थी। जिसमें बैठे कई यात्री गंभीर घायल हो गए थे। लोगों की शिकायत के बाद भी पुलिस और परिवहन विभाग ने संबधित के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की। सफेदपोशों के नाम का इस्तेमाल कर डग्गामार वाहन चालक बांकेगंज, कुकरा और गोला रूट पर चांदी काट रहे हैं।
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