{"_id":"657deaf0c562994ac80fb1de","slug":"medicines-or-equipment-patients-are-forced-to-go-to-private-doctors-lakhimpur-news-c-4-bly1014-306316-2023-12-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lakhimpur Kheri News: दवाएं न उपकरण... निजी डॉक्टरों के पास जाना मरीजों की मजबूरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lakhimpur Kheri News: दवाएं न उपकरण... निजी डॉक्टरों के पास जाना मरीजों की मजबूरी
विज्ञापन
गोला में खराब पड़ी मशीन स्रोत:संवाद
लखीमपुर खीरी। जिले में दांतों की समस्या से निपटने के लिए जिला अस्पताल से लेकर जिले की सीएचसी पर इंतजाम नाकाफी हैं। कहीं मशीनें खराब हैं तो कहीं दंत रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। हर रोज जिले में सैकड़ों मरीज सामने आ रहे हैं, लेकिन उन्हें सस्ते इलाज की कोई सुविधा नहीं मिल पा रही है।
जिला अस्पताल पहुंच रहे मरीजों में सबसे ज्यादा दांतों में दर्द की शिकायत है। गर्म-ठंडा पानी लगना, पायरिया की दिक्कत के अलावा समय से पहले दांतों का गिर जाना और दांतों में गड्ढे हो जाने के मामले सामने आ रहे हैं। दांत रोगियों के इलाज के लिए नाममात्र की दवाइयां और मशीनें हैं। जिला अस्पताल में आरटीसी कराने तक की कोई व्यवस्था नहीं है। यहां पर महज दांतों की सफाई के अलावा गड्ढे भरने का इंतजाम है।
दंत चिकित्सक डॉ. मंजेश बताते हैं कि हर रोज होने वाली ओपीडी में 35 से 40 मरीजों का इलाज किया जा रहा है। सबसे ज्यादा मरीज दांत के दर्द से पीड़ित दिखाई दे रहे हैं। फिलहाल सीमित संसाधनों में ही डाक्टर किसी तरह से मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
विज्ञापन
गोला में एयरोटर और स्केलर नहीं
गोला गोकर्णनाथ। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोला में दंत रोग से संबंधित हर रोज करीब 25 से 30 मरीजों की ओपीडी होती है। डॉक्टर सुशील कुमार ने बताया कि डेंटल चेयर वर्किंग में है लेकिन एयरोटर और स्केलर नहीं है। इससे दिक्कतें हो रही हैं।
धौरहरा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के दंत विभाग में डेंटल ट्रे, एक्स-रे मशीन, स्केलर, आरसीटी, कम्प्रेशन स्टाल सहित अन्य उपकरणों की भारी कमी है। इसके चलते मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। मरीज प्राइवेट डाक्टरों से अपना इलाज कराने को मजबूर हैं। डॉक्टर पुल्कित भल्ला ने बताया प्रतिदिन 20 से 25 दांतों के पीड़ित मरीज आ रहे हैं। दवा की उपलब्धता है लेकिन मशीनें नहीं हैं।
बेहजम। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेहजम में दांत का कोई डाक्टर नहीं है। मरीजों को जिला अस्पताल के अलावा प्राइवेट क्लीनिक में इलाज कराना पड़ रहा है। सीएचसी प्रभारी डॉ. अनिल वर्मा ने बताया कि दांत के डाक्टर की पोस्टिंग यहां है, लेकिन जिला अस्पताल संबद्ध होने के चलते डॉक्टर नहीं आते हैं। दांत के मरीजों को वह खुद देखते हैं। दवाओं पूरी व्यवस्था है।
पसगवां। सीएचसी में दंत चिकित्साधिकारी डाॅ. हर्षिता तैनात हैं, लेकिन डेंटल हाईजिनिस्ट का पद रिक्त हैं। डेंटल चेयर, सक्शन मशीन, एक्सरे फिल्म होल्डर, थायराइड कालर, आटो क्लेव आदि उपकरण और आवश्यक दवाएं नहीं है। अधीक्षक डाॅ. अश्वनी कुमार वर्मा का दावा है कि प्रतिदिन 15-20 मरीज आ रहे हैं ।
न बैठने के लिए कुर्सी हैं न इलाज के लिए मशीनें
मोहम्मदी। सीएचसी में बना दंत रोग विभाग महज शो पीस बनकर रह गया है। यहां पर मरीजों के लिए न तो बैठने के लिए न कुर्सियां हैं और न ही कोई उपकरण है। दाढ़ और दांत में दर्द का ही इलाज किया जा रहा है। डॉक्टर अलका पांडे ने बताया कि वह 10-15 मरीजों की रोज ओपीडी हो रही है। उपकरण न होने की वजह से दांत निकलने तक की सुविधा नहीं है। कई बार उपकरणों के लिए जिला मुख्यालय पर बैठे अधिकारियों को लिखापढ़ी की जा चुकी है लेकिन अभी तक कोई भी उपकरण नहीं मिल पाया है।
लाइट खराब, मोबाइल की रोशनी से होती है जांच
फरधान। हर दिन औसतन विभिन्न बीमारियों से ग्रसित 300 मरीजों की ओपीडी की जाती है, लेकिन यहां दंत रोग विभाग में जरूरी उपकरण काम लायक नहीं हैं। डेंटल चेयर निष्क्रिय हो चुकी है। उसका कंप्रेसर, स्केेलर, कंट्रोल यूनिट, लाइट, माइक्रो मोटर खराब है। डेंटल चेयर की लाइट खराब होने से जांच मोबाइल की रोशनी में होती है। इलाज कराने आए जयकरन, रामसुमिरन आदि ने बताया कि मशीन खराब होने से दांतों की सफाई नहीं हो पाई। सीएचसी के दंत रोग विभाग को करीब दो साल पहले दो डेंटल चेयर मिली थी। दांत रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रोशनी प्रतिदिन बीस से तीस मरीज देखती है।
विज्ञापन
जिला अस्पताल पहुंच रहे मरीजों में सबसे ज्यादा दांतों में दर्द की शिकायत है। गर्म-ठंडा पानी लगना, पायरिया की दिक्कत के अलावा समय से पहले दांतों का गिर जाना और दांतों में गड्ढे हो जाने के मामले सामने आ रहे हैं। दांत रोगियों के इलाज के लिए नाममात्र की दवाइयां और मशीनें हैं। जिला अस्पताल में आरटीसी कराने तक की कोई व्यवस्था नहीं है। यहां पर महज दांतों की सफाई के अलावा गड्ढे भरने का इंतजाम है।
विज्ञापन
दंत चिकित्सक डॉ. मंजेश बताते हैं कि हर रोज होने वाली ओपीडी में 35 से 40 मरीजों का इलाज किया जा रहा है। सबसे ज्यादा मरीज दांत के दर्द से पीड़ित दिखाई दे रहे हैं। फिलहाल सीमित संसाधनों में ही डाक्टर किसी तरह से मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
विज्ञापन
गोला में एयरोटर और स्केलर नहीं
गोला गोकर्णनाथ। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोला में दंत रोग से संबंधित हर रोज करीब 25 से 30 मरीजों की ओपीडी होती है। डॉक्टर सुशील कुमार ने बताया कि डेंटल चेयर वर्किंग में है लेकिन एयरोटर और स्केलर नहीं है। इससे दिक्कतें हो रही हैं।
धौरहरा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के दंत विभाग में डेंटल ट्रे, एक्स-रे मशीन, स्केलर, आरसीटी, कम्प्रेशन स्टाल सहित अन्य उपकरणों की भारी कमी है। इसके चलते मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। मरीज प्राइवेट डाक्टरों से अपना इलाज कराने को मजबूर हैं। डॉक्टर पुल्कित भल्ला ने बताया प्रतिदिन 20 से 25 दांतों के पीड़ित मरीज आ रहे हैं। दवा की उपलब्धता है लेकिन मशीनें नहीं हैं।
बेहजम। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेहजम में दांत का कोई डाक्टर नहीं है। मरीजों को जिला अस्पताल के अलावा प्राइवेट क्लीनिक में इलाज कराना पड़ रहा है। सीएचसी प्रभारी डॉ. अनिल वर्मा ने बताया कि दांत के डाक्टर की पोस्टिंग यहां है, लेकिन जिला अस्पताल संबद्ध होने के चलते डॉक्टर नहीं आते हैं। दांत के मरीजों को वह खुद देखते हैं। दवाओं पूरी व्यवस्था है।
पसगवां। सीएचसी में दंत चिकित्साधिकारी डाॅ. हर्षिता तैनात हैं, लेकिन डेंटल हाईजिनिस्ट का पद रिक्त हैं। डेंटल चेयर, सक्शन मशीन, एक्सरे फिल्म होल्डर, थायराइड कालर, आटो क्लेव आदि उपकरण और आवश्यक दवाएं नहीं है। अधीक्षक डाॅ. अश्वनी कुमार वर्मा का दावा है कि प्रतिदिन 15-20 मरीज आ रहे हैं ।
न बैठने के लिए कुर्सी हैं न इलाज के लिए मशीनें
मोहम्मदी। सीएचसी में बना दंत रोग विभाग महज शो पीस बनकर रह गया है। यहां पर मरीजों के लिए न तो बैठने के लिए न कुर्सियां हैं और न ही कोई उपकरण है। दाढ़ और दांत में दर्द का ही इलाज किया जा रहा है। डॉक्टर अलका पांडे ने बताया कि वह 10-15 मरीजों की रोज ओपीडी हो रही है। उपकरण न होने की वजह से दांत निकलने तक की सुविधा नहीं है। कई बार उपकरणों के लिए जिला मुख्यालय पर बैठे अधिकारियों को लिखापढ़ी की जा चुकी है लेकिन अभी तक कोई भी उपकरण नहीं मिल पाया है।
लाइट खराब, मोबाइल की रोशनी से होती है जांच
फरधान। हर दिन औसतन विभिन्न बीमारियों से ग्रसित 300 मरीजों की ओपीडी की जाती है, लेकिन यहां दंत रोग विभाग में जरूरी उपकरण काम लायक नहीं हैं। डेंटल चेयर निष्क्रिय हो चुकी है। उसका कंप्रेसर, स्केेलर, कंट्रोल यूनिट, लाइट, माइक्रो मोटर खराब है। डेंटल चेयर की लाइट खराब होने से जांच मोबाइल की रोशनी में होती है। इलाज कराने आए जयकरन, रामसुमिरन आदि ने बताया कि मशीन खराब होने से दांतों की सफाई नहीं हो पाई। सीएचसी के दंत रोग विभाग को करीब दो साल पहले दो डेंटल चेयर मिली थी। दांत रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रोशनी प्रतिदिन बीस से तीस मरीज देखती है।

गोला में खराब पड़ी मशीन स्रोत:संवाद