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एसआईटी जांच में फंस सकती है कई बड़े अफसरों की गर्दन
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शिकार और कटान में वनाधिकारियों और कर्मचारियों की संलिप्तता पहले भी हो चुकी है उजागर
लखीमपुर खीरी। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित दुधवा और पीलीभीत टाइगर रिजर्व अरसे से शातिर शिकारियों, वन्यजीव अंग तस्करों के निशाने पर रहे हैं। संरक्षित वन क्षेत्र में साल और सागौन के कीमती पेड़ों का कटान भी होता रहा है, जो वनाधिकारियों और वन कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। एसआईटी जांच में दोनों टाइगर रिजर्व के कई बड़े अफसरों की गर्दनें फंसती नजर आ रही हैं।
हाल के मामलों पर नजर डालें तो एक सप्ताह के अंदर ही दुधवा टाइगर रिजर्व के संपूर्णानगर और किशनपुर में बाघ के दांतों के साथ वन्यजीव अंगों के तस्कर पकड़े गए हैं। बाघ की खाल, हड्डियां, दांत और मूछ के बालों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी मांग है। नेपाल सीमा पर होने के कारण पीलीभीत और दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगल अंतरराष्ट्रीय वनापराधियों और तस्करों के लिए सबसे मुफीद साबित होते हैं। यही कारण है कि इन क्षेत्रों में शिकारियों की सक्रियता रहती है।
दुधवा और पीलीभीत के जंगलों में वनापराधों की एसआईटी जांच की घोषणा के बाद ही शिकारियों और तस्करों की ताबड़तोड़ गिरफ्तारी से इस आशंका को बल मिलता है कि कई अधिकारी शिकार और कटान के मामलों को जानकर भी अनजान बने हुए थे। शासन से दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) और पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के वनापराधों की एसआईटी जांच की तलवार लटकने से दोनों टाइगर रिजर्व में अफरातफरी है। यही नहीं एसआटी जांच से कई सनसनीखेज खुलासा होने की संभावना जताई जा रही है।
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समाचार पत्रों के माध्यम के एसआटी जांच के बारे में पता चला है। हालांकि दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन शिकार और अन्य वनापराधों को रोकने लिए हमेशा सतर्क रहता है।
- डॉ. अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन
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लखीमपुर खीरी। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित दुधवा और पीलीभीत टाइगर रिजर्व अरसे से शातिर शिकारियों, वन्यजीव अंग तस्करों के निशाने पर रहे हैं। संरक्षित वन क्षेत्र में साल और सागौन के कीमती पेड़ों का कटान भी होता रहा है, जो वनाधिकारियों और वन कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। एसआईटी जांच में दोनों टाइगर रिजर्व के कई बड़े अफसरों की गर्दनें फंसती नजर आ रही हैं।
हाल के मामलों पर नजर डालें तो एक सप्ताह के अंदर ही दुधवा टाइगर रिजर्व के संपूर्णानगर और किशनपुर में बाघ के दांतों के साथ वन्यजीव अंगों के तस्कर पकड़े गए हैं। बाघ की खाल, हड्डियां, दांत और मूछ के बालों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी मांग है। नेपाल सीमा पर होने के कारण पीलीभीत और दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगल अंतरराष्ट्रीय वनापराधियों और तस्करों के लिए सबसे मुफीद साबित होते हैं। यही कारण है कि इन क्षेत्रों में शिकारियों की सक्रियता रहती है।
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दुधवा और पीलीभीत के जंगलों में वनापराधों की एसआईटी जांच की घोषणा के बाद ही शिकारियों और तस्करों की ताबड़तोड़ गिरफ्तारी से इस आशंका को बल मिलता है कि कई अधिकारी शिकार और कटान के मामलों को जानकर भी अनजान बने हुए थे। शासन से दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) और पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के वनापराधों की एसआईटी जांच की तलवार लटकने से दोनों टाइगर रिजर्व में अफरातफरी है। यही नहीं एसआटी जांच से कई सनसनीखेज खुलासा होने की संभावना जताई जा रही है।
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समाचार पत्रों के माध्यम के एसआटी जांच के बारे में पता चला है। हालांकि दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन शिकार और अन्य वनापराधों को रोकने लिए हमेशा सतर्क रहता है।
- डॉ. अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन