UP Nikay Chunav 2023: नगर पालिका से सीखा राजनीति का ककहरा, फिर देश-प्रदेश में जमाई अपनी धाक
लखीमपुर खीरी जिले में कई ऐसे नेता हुए हैं, जिन्होंने अपनी सियासी सफर की शुरुआत नगर निकाय से की। बाद में वे संसद तक पहुंचे। कुछ विधायक भी बने।
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लखीमपुर खीरी जिले की नगरीय निकाय से अपनी राजनीति शुरू कर कई अध्यक्ष और सभासद विधानसभा और लोकसभा तक पहुंचे हैं। नगरीय निकाय से संसद तक का सफर पूरा करने वाले लोगों में कुंवर खुशवक्त रॉय, बाल गोविंद वर्मा, सुरथ बहादुर शाह और जफर अली नकवी शामिल हैं। नगर पालिका से विधानसभा में कदम रखने वाले लोगों में बंशीधर मिश्र और अरविंद गिरि शामिल हैं।
जिले की नगरीय निकायों से राजनीति का ककहरा सीखकर देश और प्रदेश की राजनीति में अपनी प्रतिष्ठा स्थापित करने वाले लोगों में पहला नाम कुंवर खुशवक्त रॉय का है। 1944 से 1946 तक नगर पालिका लखीमपुर के अध्यक्ष रहे कुंवर खुशवक्त राय आजादी के बाद हुए दूसरे लोकसभा चुनाव में खीरी संसदीय क्षेत्र से सांसद बने।
चार बार सांसद बने बाल गोविंद वर्मा
बाल गोविंद वर्मा वर्ष 1964 में गोला नगर पालिका के अध्यक्ष बने। नगर पालिका अध्यक्ष बनने से पहले वह 1962 में लोकसभा सदस्य चुने जा चुके थे। बाल गोविंद वर्मा खीरी संसदीय क्षेत्र से चार बार सांसद रहे। वह 1962, 1967, 1971 और 1980 में लोकसभा चुनाव जीते उन्होंने सांसदी के तीन कार्यकाल पूरे किए लेकिन 1980 में चुनाव जीतने के चंद दिनों बाद ही हृदय गति रुक जाने से उनका निधन हो गया।
संविधान सभा के सदस्य रहने के बाद संभाली पालिका की कमान
संविधान सभा के सदस्य और विधायक रहे बंशीधर मिश्र 1957-1958 में लखीमपुर नगर पालिका के अध्यक्ष रहे। पं. बंशीधर मिश्र जाने माने कांग्रेस नेता और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। आजादी की लड़ाई से लेकर संविधान सभा की सदस्यता और विधानसभा की सदस्यता से राजनीति के गुर सीखकर बंशीधर मिश्र ने लखीमपुर नगर पालिका को अपने अनुभव का लाभ दिया। बड़े पदों पर रहने के बाद बंशीधर मिश्र के लखीमपुर नगर पालिका में अध्यक्ष पद का दायित्व संभालने से पद की गरिमा और प्रतिष्ठा दी।नगर पालिका से विधानसभा तक पहुंचे थे अरविंद गिरि
नगर पालिका के दो बाद अध्यक्ष रहे अरविंद गिरि हैदराबाद विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रहे। नगर पालिका अध्यक्ष रहते हुए वह हैदराबाद सीट से सपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़े और जीतकर विधायक बने। विधायक रहते हुए भी वह अध्यक्ष के पद पर आसीन रहे। जब अध्यक्ष पद महिला के लिए आरक्षित हो गया तो अरविंद गिरि ने अपनी पत्नी सुधा गिरि को चुनाव मैदान में उतारा। सुधा गिरि भी पांच साल तक विधायक रहीं।