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Lakhimpur Kheri News: खेतों तक पहुंचने से पहले अटक गई खाद
Wed, 06 May 2026 11:21 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 06 May 2026 11:21 PM IST
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भल्लिया बुजुर्ग समिति पर यूरिया खाद मिलने का इंतजार करते किसान। संवाद
लखीमपुर खीरी। बारिश के बाद खेतों में फसल बचाने और अगली बोआई की तैयारी के लिए खाद की मांग अचानक बढ़ गई है, लेकिन जिले में खाद वितरण व्यवस्था लड़खड़ाती नजर आ रही है।
कहीं समितियों पर यूरिया का स्टॉक खत्म है तो कहीं खाद होने के बावजूद सर्वर और ई-पॉश मशीनें ठप पड़ी हैं। किसान सुबह से लाइन में लग रहे हैं, लेकिन शाम तक बिना खाद लिए लौटने को मजबूर हैं। बरबर के पैकीपुर स्टॉक में यूरिया नहीं है। सचिव राहुल सिंह ने बताया कि नया स्टॉक अगले सप्ताह आने की संभावना है। बेलरायां के भिडोरी और तकियापुरवा में भी पांच दिनों से यूरिया खत्म है। तकियापुरवा सचिव रवि शुक्ला ने बताया कि ड्राफ्ट कंपनी को भेजा गया है और खाद जल्द आने की उम्मीद है। रमियाबेहड़ की परौरी, बी-पैक्स झिन्ना पुरवा, रमियाबेहड़, सुजानपुर, कलुआ कोट, लखाही, नैनापुर और सुजईकुंडा समितियों पर शनिवार से खाद वितरण प्रभावित है। रमियाबेहड़ सचिव श्याम मोहन ने बताया कि यूरिया और एनपीके उपलब्ध है, लेकिन सर्वर की समस्या से वितरण नहीं हो पा रहा। सुजानपुर सचिव महेश मनार ने बताया कि खाद की डिमांड भेजी गई है। परौरी समिति में एनपीके की 150, डीएपी की 150 और यूरिया की 100 बोरियां मौजूद हैं, लेकिन सर्वर न चलने से वितरण बंद है। किसान रवि यादव, नीरज, श्याम किशोर, राजीव मिश्रा और अतीक अहमद ने बताया कि अंगूठा सत्यापन न होने से कई दिनों से खाद नहीं मिल रही। बेहजम के पैक्स अंछनिया में सात एमटी एनपीके है, लेकिन यूरिया नहीं है। अंदापुर गौरिया में 300 बोरी डीएपी, भूलनपुर में 200 बोरी डीएपी और रुकनापुर मूडाधामू में 540 बोरी डीएपी उपलब्ध है, लेकिन यूरिया का स्टॉक नहीं है। मोहम्मदी के गुलरिया केंद्र पर खाद मौजूद होने के बावजूद सर्वर बंद होने से वितरण ठप पड़ा है। मितौली क्षेत्र में भी किसान खाद के लिए परेशान हैं। सचिव अर्चना सिंह ने बताया कि बायोमीट्रिक मशीन काम नहीं कर रही। धौरहरा क्षेत्र में भी किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। सचिव शिवा त्रिवेदी ने बताया कि बायोमीट्रिक मशीनें बंद हैं। किसान अभय शुक्ला, सुरेंद्र, अनूप और रामू ने बताया कि खेती के इस समय खाद की सबसे ज्यादा जरूरत है, लेकिन वितरण नहीं हो पा रहा। केशवापुर के बी-पैक्स भल्लिया बुजुर्ग पर बुधवार को सैकड़ों किसान घंटों लाइन में लगे रहे। सचिव पवनेश ने बताया कि समिति में 900 बोरी यूरिया, 350 बोरी डीएपी और 50 बोरी एनपीके मौजूद है। आधे घंटे के लिए मशीन चलने पर सिर्फ 16 किसानों को यूरिया मिल सकी। बाकी किसान खाली हाथ लौट गए। किसानों पुत्तन, साहबलाल, अजय कुमार और छोटेलाल ने बताया कि कर्ज लेकर खेती करना पहले ही मुश्किल है, ऊपर से खाद संकट ने परेशानी और बढ़ा दी है।
जलालपुर और निपनिया में खाद का स्टॉक नहीं है। सिकंदराबाद के नीमगांव में भी किसान सुबह से लाइन में लगे रहे, लेकिन दोपहर बाद तक सर्वर शुरू नहीं हुआ। सचिव प्रदीप ने बताया कि खाद उपलब्ध है, लेकिन तकनीकी खराबी के चलते वितरण नहीं हो सका।
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कहीं समितियों पर यूरिया का स्टॉक खत्म है तो कहीं खाद होने के बावजूद सर्वर और ई-पॉश मशीनें ठप पड़ी हैं। किसान सुबह से लाइन में लग रहे हैं, लेकिन शाम तक बिना खाद लिए लौटने को मजबूर हैं। बरबर के पैकीपुर स्टॉक में यूरिया नहीं है। सचिव राहुल सिंह ने बताया कि नया स्टॉक अगले सप्ताह आने की संभावना है। बेलरायां के भिडोरी और तकियापुरवा में भी पांच दिनों से यूरिया खत्म है। तकियापुरवा सचिव रवि शुक्ला ने बताया कि ड्राफ्ट कंपनी को भेजा गया है और खाद जल्द आने की उम्मीद है। रमियाबेहड़ की परौरी, बी-पैक्स झिन्ना पुरवा, रमियाबेहड़, सुजानपुर, कलुआ कोट, लखाही, नैनापुर और सुजईकुंडा समितियों पर शनिवार से खाद वितरण प्रभावित है। रमियाबेहड़ सचिव श्याम मोहन ने बताया कि यूरिया और एनपीके उपलब्ध है, लेकिन सर्वर की समस्या से वितरण नहीं हो पा रहा। सुजानपुर सचिव महेश मनार ने बताया कि खाद की डिमांड भेजी गई है। परौरी समिति में एनपीके की 150, डीएपी की 150 और यूरिया की 100 बोरियां मौजूद हैं, लेकिन सर्वर न चलने से वितरण बंद है। किसान रवि यादव, नीरज, श्याम किशोर, राजीव मिश्रा और अतीक अहमद ने बताया कि अंगूठा सत्यापन न होने से कई दिनों से खाद नहीं मिल रही। बेहजम के पैक्स अंछनिया में सात एमटी एनपीके है, लेकिन यूरिया नहीं है। अंदापुर गौरिया में 300 बोरी डीएपी, भूलनपुर में 200 बोरी डीएपी और रुकनापुर मूडाधामू में 540 बोरी डीएपी उपलब्ध है, लेकिन यूरिया का स्टॉक नहीं है। मोहम्मदी के गुलरिया केंद्र पर खाद मौजूद होने के बावजूद सर्वर बंद होने से वितरण ठप पड़ा है। मितौली क्षेत्र में भी किसान खाद के लिए परेशान हैं। सचिव अर्चना सिंह ने बताया कि बायोमीट्रिक मशीन काम नहीं कर रही। धौरहरा क्षेत्र में भी किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। सचिव शिवा त्रिवेदी ने बताया कि बायोमीट्रिक मशीनें बंद हैं। किसान अभय शुक्ला, सुरेंद्र, अनूप और रामू ने बताया कि खेती के इस समय खाद की सबसे ज्यादा जरूरत है, लेकिन वितरण नहीं हो पा रहा। केशवापुर के बी-पैक्स भल्लिया बुजुर्ग पर बुधवार को सैकड़ों किसान घंटों लाइन में लगे रहे। सचिव पवनेश ने बताया कि समिति में 900 बोरी यूरिया, 350 बोरी डीएपी और 50 बोरी एनपीके मौजूद है। आधे घंटे के लिए मशीन चलने पर सिर्फ 16 किसानों को यूरिया मिल सकी। बाकी किसान खाली हाथ लौट गए। किसानों पुत्तन, साहबलाल, अजय कुमार और छोटेलाल ने बताया कि कर्ज लेकर खेती करना पहले ही मुश्किल है, ऊपर से खाद संकट ने परेशानी और बढ़ा दी है।
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जलालपुर और निपनिया में खाद का स्टॉक नहीं है। सिकंदराबाद के नीमगांव में भी किसान सुबह से लाइन में लगे रहे, लेकिन दोपहर बाद तक सर्वर शुरू नहीं हुआ। सचिव प्रदीप ने बताया कि खाद उपलब्ध है, लेकिन तकनीकी खराबी के चलते वितरण नहीं हो सका।

भल्लिया बुजुर्ग समिति पर यूरिया खाद मिलने का इंतजार करते किसान। संवाद
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