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कर्मों के अनुसार ही फल पाता है मनुष्य
लखीमपुर खीरी
Updated Mon, 16 Feb 2015 07:08 PM IST
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आर्यसमाज के वार्षिकोत्सव में यज्ञ के बाद भजनोपदेशक युगुल किशोर ने ‘लीला तेरी अजब निराली है’ भजन गाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। भरतपुर राजस्थान के पं. देशराज सत्येंद्र ने ईश्वर को कर्म फल प्रदाता बताया। उन्होंने कहा कि मनुष्य कृत कारित अनुमोदित कर्म से पाप-पुण्य करता हुआ दुख-सुख प्राप्त करता है।
उन्होंने कहा कि आजकल देखने में आ रहा है कि जितनी पूजा पाठ बढ़ रहे है उतने ही अपराध बढ़ रहे हैं। इसका मतलब सार्थक पूजा पाठ नहीं हो रहा है। ईश्वर को सर्वत्र व्यापक मानकर भजन करे और समझे कि ईश्वर हमें देख सुन और जान रहा है। उन्होंने कहा कि गीता में कहे अवश्यमेव भौकताव्यं कृत कर्म शुभाअशुभम के सिद्धांत से कोई भी ईश्वर के दंड से बच नहीं सकता यह समझकर अन्याय और अत्याचार से बचे। ईश्वर का ध्यान किया जाता है और देवताओं की पूजा यज्ञ से होती है। संध्या और यज्ञ प्रत्येक मनुष्य को हर रोज करना चाहिए।
सायंकालीन कार्यक्रम यज्ञदत्त मिश्र के आवास पर यज्ञ और भजनोपदेश के साथ हुआ। इस मौके पर ओम प्रकाश मिश्र, यज्ञदत्त मिश्र, शिवचंद्र सिंह, डॉ. निरुपमा अशोक, आर्येंद्र पाल सिंह, अजय श्रीवास्तव, बुद्धदेव के अलावा तमाम शिक्षक और धर्मानुरागी मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि आजकल देखने में आ रहा है कि जितनी पूजा पाठ बढ़ रहे है उतने ही अपराध बढ़ रहे हैं। इसका मतलब सार्थक पूजा पाठ नहीं हो रहा है। ईश्वर को सर्वत्र व्यापक मानकर भजन करे और समझे कि ईश्वर हमें देख सुन और जान रहा है। उन्होंने कहा कि गीता में कहे अवश्यमेव भौकताव्यं कृत कर्म शुभाअशुभम के सिद्धांत से कोई भी ईश्वर के दंड से बच नहीं सकता यह समझकर अन्याय और अत्याचार से बचे। ईश्वर का ध्यान किया जाता है और देवताओं की पूजा यज्ञ से होती है। संध्या और यज्ञ प्रत्येक मनुष्य को हर रोज करना चाहिए।
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सायंकालीन कार्यक्रम यज्ञदत्त मिश्र के आवास पर यज्ञ और भजनोपदेश के साथ हुआ। इस मौके पर ओम प्रकाश मिश्र, यज्ञदत्त मिश्र, शिवचंद्र सिंह, डॉ. निरुपमा अशोक, आर्येंद्र पाल सिंह, अजय श्रीवास्तव, बुद्धदेव के अलावा तमाम शिक्षक और धर्मानुरागी मौजूद रहे।
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